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गुजरात में 'शाला प्रवेशोत्सव' का 24वाँ संस्करण: ड्रॉपआउट दर 37% से घटकर 1% से नीचे

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गुजरात में 'शाला प्रवेशोत्सव' का 24वाँ संस्करण: ड्रॉपआउट दर 37% से घटकर 1% से नीचे

सारांश

गुजरात में 'शाला प्रवेशोत्सव' का 24वाँ संस्करण महज एक रस्म नहीं — यह दो दशकों की मेहनत का प्रमाण है। ड्रॉपआउट दर 37% से 1% से नीचे लाना बताता है कि जब सरकार, समाज और स्कूल एकजुट हों तो शिक्षा क्रांति संभव है।

मुख्य बातें

23 जून 2026 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वडनगर के बीएन हाई स्कूल से शाला प्रवेशोत्सव के 24वें संस्करण का शुभारंभ किया।
राज्य के 38,400 सरकारी स्कूलों में 28 लाख 58 हजार से अधिक बच्चों के नामांकन का लक्ष्य रखा गया।
2003 में शुरू इस अभियान के बाद ड्रॉपआउट दर 37% से घटकर 1% से भी कम हो गई है।
नामांकन दर 100 प्रतिशत तक पहुँची; कन्या केलवणी महोत्सव के ज़रिए बालिका शिक्षा पर विशेष जोर।
जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी के अनुसार यह अभियान अब एक जन आंदोलन बन चुका है।

गुजरात सरकार के शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव के 24वें संस्करण ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव की कहानी एक बार फिर दोहराई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में 23 जून 2026 को शुरू हुए इस तीन दिवसीय महोत्सव ने राज्य के 38,400 सरकारी स्कूलों में 28 लाख 58 हजार से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा। 2003 में शुरू हुए इस अभियान की बदौलत ड्रॉपआउट दर 37 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

मुख्यमंत्री ने वडनगर से किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वडनगर के ऐतिहासिक बीएन हाई स्कूल से इस महोत्सव का शुभारंभ किया और कक्षा 1 से 11वीं तक के विद्यार्थियों को औपचारिक रूप से प्रवेश दिलाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, '24 साल पहले शुरू किया गया यह अभियान बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने और स्कूल ड्रॉपआउट कम करने के लिहाज से बेहद सफल साबित हुआ है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस पहल से नामांकन दर 100 प्रतिशत तक पहुँची है और नामांकन के बाद ड्रॉपआउट दर 1 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है।

अभियान की उपलब्धियाँ और दायरा

राज्य के हर जिले और तालुका में आयोजित इस महोत्सव में सरकार के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। इस वर्ष बालवाटिका, कक्षा 1, कक्षा 9 और कक्षा 11 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने बताया कि यह अभियान अब एक जन आंदोलन बन चुका है जिसमें पूरा समाज जुड़ा है और अधिकारी घर-घर जाकर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित कर रहे हैं।

बच्चों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया

छात्रा जिया परमार ने कहा, 'हमें अपने स्कूल की तरफ से किताबें और यूनिफॉर्म मिलती है। यह प्रवेश उत्सव हमारे लिए बहुत अच्छा है, हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।' वहीं छात्रा सोनाक्षी ने कहा कि नई किताबें, बूट्स-मोजे और छुट्टियों के बाद शिक्षकों से मिलने का अवसर स्कूल के पहले दिन को यादगार बनाता है।

अभिभावक नरेंद्रभाई बारोट ने सरकार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे बच्चों में उत्साह बढ़ा है और उनका भविष्य उज्ज्वल होगा। अभिभावक आशीष प्रजापति ने बताया कि स्कूलों में किताबें, ड्राइंग सामग्री, स्कूल बैग और पानी की बोतलें जैसी मूलभूत सुविधाएँ मिलती हैं, साथ ही तकनीक-आधारित शिक्षा भी दी जाती है।

कन्या शिक्षा पर विशेष जोर

राज्य सरकार इस महोत्सव के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दे रही है। कन्या केलवणी महोत्सव का उद्देश्य उन परिवारों को प्रोत्साहित करना है जो सामाजिक या आर्थिक कारणों से बेटियों को स्कूल नहीं भेज पाते। आँकड़ों के अनुसार, इस पहल के कारण बालिका नामांकन में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।

आगे की राह

गौरतलब है कि 2003 में जब यह अभियान शुरू हुआ था, तब गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर 37 प्रतिशत थी। दो दशकों से अधिक की निरंतर कोशिशों के बाद यह दर 1 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है — एक ऐसी उपलब्धि जिसे शिक्षा विशेषज्ञ सामुदायिक भागीदारी और सरकारी प्रोत्साहन के सफल मेल का नतीजा मानते हैं। यदि यह गति बनी रही तो गुजरात शीघ्र ही शून्य ड्रॉपआउट का लक्ष्य हासिल कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है: नामांकन और वास्तविक उपस्थिति दो अलग-अलग मापदंड हैं, और सरकारी आँकड़े अक्सर पहले को ही गिनते हैं। असली कसौटी यह है कि क्या ये बच्चे कक्षा 8 के बाद भी पढ़ाई जारी रखते हैं — खासकर बालिकाएँ। कन्या केलवणी महोत्सव की भावना सराहनीय है, पर बालिका माध्यमिक शिक्षा पूर्णता दर पर स्वतंत्र डेटा अभी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। दो दशकों का यह प्रयोग तब सही मायनों में सफल माना जाएगा जब ड्रॉपआउट-मुक्त गुजरात के बच्चे सीखने के परिणामों में भी राष्ट्रीय औसत से आगे नज़र आएँ।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव क्या है?
यह गुजरात सरकार का वार्षिक शिक्षा अभियान है जो 2003 में शुरू हुआ था, जिसका उद्देश्य हर बच्चे — विशेषकर बालिकाओं — को स्कूल में दाखिला दिलाना और ड्रॉपआउट रोकना है। इसके तहत सरकारी अधिकारी, मंत्री और समाज मिलकर घर-घर जाकर बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करते हैं।
2026 में शाला प्रवेशोत्सव का कौन-सा संस्करण आयोजित हुआ और इसकी शुरुआत कहाँ से हुई?
2026 में इस महोत्सव का 24वाँ संस्करण आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 23 जून 2026 को वडनगर के ऐतिहासिक बीएन हाई स्कूल से इसका शुभारंभ किया।
गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर में कितनी कमी आई है?
2003 में अभियान शुरू होने के समय गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर 37 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 1 प्रतिशत से भी कम हो गई है। साथ ही नामांकन दर 100 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
इस वर्ष कितने बच्चों के नामांकन का लक्ष्य रखा गया था?
2026 के महोत्सव में राज्य के 38,400 सरकारी स्कूलों में 28 लाख 58 हजार से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें बालवाटिका, कक्षा 1, कक्षा 9 और कक्षा 11 के विद्यार्थी शामिल थे।
कन्या केलवणी महोत्सव का विशेष महत्व क्या है?
कन्या केलवणी महोत्सव उन परिवारों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है जो सामाजिक या आर्थिक कारणों से बेटियों को स्कूल नहीं भेज पाते। इसके तहत बालिकाओं को किताबें, यूनिफॉर्म, स्कूल बैग जैसी मूलभूत सुविधाएँ निःशुल्क दी जाती हैं, जिससे बालिका नामांकन में उल्लेखनीय सुधार आया है।
राष्ट्र प्रेस
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