गुजरात में 'समरस विद्या सेतु' अभियान: CM भूपेंद्र पटेल ने 80,000 से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा में लाने की मुहिम छेड़ी
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 22 जुलाई को अहमदाबाद से राज्यव्यापी अभियान 'समरस विद्या सेतु' का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य स्कूल छोड़ चुके 80,000 से अधिक बच्चों को चिह्नित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि गुजरात में ड्रॉपआउट दर घटकर 2 प्रतिशत रह गई है और अब राज्य सरकार इसे 'ज़ीरो ड्रॉपआउट' के स्तर तक ले जाने के संकल्प के साथ काम कर रही है।
अभियान की रूपरेखा और क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री पटेल ने बताया कि राज्य स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की जिलेवार सूची तैयार की गई है। इस सूची के आधार पर शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक नेता मिलकर बच्चों के माता-पिता से संपर्क साधेंगे। प्रत्येक बच्चे को उसकी आयु के अनुरूप कक्षा 1 से 12 में से उचित कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा।
जो बच्चे शैक्षणिक रूप से पिछड़ गए हैं, उनके लिए विशेष सहायक शिक्षा (Supplementary Education) का प्रबंध किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्कूली शिक्षा में समावेश को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।
शिक्षकों की भूमिका और अभिभावक जागरूकता
मुख्यमंत्री ने शिक्षक-अभिभावक समन्वय को इस अभियान की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि आज सरकारी शिक्षक इतने सजग हो गए हैं कि यदि कोई बच्चा दो दिन लगातार अनुपस्थित रहता है, तो शिक्षक स्वयं उसके घर पहुँचकर कारण जानते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें।
पटेल ने गर्व के साथ उल्लेख किया कि सरकारी और नगर निगम के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के चलते कई छात्र अब निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। उन्होंने इसे शिक्षा विभाग के समर्पित प्रयासों का परिणाम बताया और सभी शिक्षकों व कर्मचारियों को बधाई दी।
रोज़गार और उच्च शिक्षा का संदर्भ
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात आज देश में व्यापार और निवेश के लिए सबसे पसंदीदा राज्य बन चुका है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में राज्य के युवाओं को रोज़गार के अधिकतम अवसर दिलाने के लिए उच्च शिक्षा अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक योगदान से संभव होगी।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे शिक्षा क्षेत्र में नए मुकाम हासिल कर प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प में सहभागी बनें।
शिक्षा मंत्री का दृष्टिकोण
शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाज ने इस अभियान को महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने वाला जन-आंदोलन बताया। उनके अनुसार, 'समरस विद्या सेतु' समाज के हर वर्ग को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन के बीच राज्यों से अपेक्षा की जा रही है कि वे ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम स्तर पर लाएँ। आने वाले हफ्तों में अभियान की प्रगति की निगरानी जिला स्तर पर की जाएगी।