23 जुलाई 2026
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गुजरात में 'समरस विद्या सेतु' अभियान: CM भूपेंद्र पटेल ने 80,000 से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा में लाने की मुहिम छेड़ी

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गुजरात में 'समरस विद्या सेतु' अभियान: CM भूपेंद्र पटेल ने 80,000 से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा में लाने की मुहिम छेड़ी

सारांश

गुजरात में ड्रॉपआउट दर 2% पर आ चुकी है, लेकिन CM भूपेंद्र पटेल यहीं नहीं रुकना चाहते। 'समरस विद्या सेतु' अभियान के ज़रिए 80,000 से अधिक बच्चों को ढूंढकर स्कूल वापस लाने की यह मुहिम, 'ज़ीरो ड्रॉपआउट' के संकल्प को ज़मीन पर उतारने की कोशिश है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 22 जुलाई को अहमदाबाद से 'समरस विद्या सेतु' अभियान की शुरुआत की।
गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर घटकर 2 प्रतिशत रह गई है; अब लक्ष्य 'ज़ीरो ड्रॉपआउट' है।
राज्य में स्कूल छोड़ चुके 80,000 से अधिक बच्चों की जिलेवार सूची तैयार की गई है।
प्रत्येक बच्चे को आयु के अनुसार कक्षा 1 से 12 में प्रवेश और पिछड़े बच्चों के लिए सहायक शिक्षा की व्यवस्था।
प्रद्युम्न वाज ने इसे सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बताया।
अभियान को 'विकसित भारत 2047' के संकल्प से जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 22 जुलाई को अहमदाबाद से राज्यव्यापी अभियान 'समरस विद्या सेतु' का शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य स्कूल छोड़ चुके 80,000 से अधिक बच्चों को चिह्नित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि गुजरात में ड्रॉपआउट दर घटकर 2 प्रतिशत रह गई है और अब राज्य सरकार इसे 'ज़ीरो ड्रॉपआउट' के स्तर तक ले जाने के संकल्प के साथ काम कर रही है।

अभियान की रूपरेखा और क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री पटेल ने बताया कि राज्य स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की जिलेवार सूची तैयार की गई है। इस सूची के आधार पर शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक नेता मिलकर बच्चों के माता-पिता से संपर्क साधेंगे। प्रत्येक बच्चे को उसकी आयु के अनुरूप कक्षा 1 से 12 में से उचित कक्षा में प्रवेश दिलाया जाएगा।

जो बच्चे शैक्षणिक रूप से पिछड़ गए हैं, उनके लिए विशेष सहायक शिक्षा (Supplementary Education) का प्रबंध किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्कूली शिक्षा में समावेश को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।

शिक्षकों की भूमिका और अभिभावक जागरूकता

मुख्यमंत्री ने शिक्षक-अभिभावक समन्वय को इस अभियान की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि आज सरकारी शिक्षक इतने सजग हो गए हैं कि यदि कोई बच्चा दो दिन लगातार अनुपस्थित रहता है, तो शिक्षक स्वयं उसके घर पहुँचकर कारण जानते हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करें।

पटेल ने गर्व के साथ उल्लेख किया कि सरकारी और नगर निगम के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के चलते कई छात्र अब निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। उन्होंने इसे शिक्षा विभाग के समर्पित प्रयासों का परिणाम बताया और सभी शिक्षकों व कर्मचारियों को बधाई दी।

रोज़गार और उच्च शिक्षा का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात आज देश में व्यापार और निवेश के लिए सबसे पसंदीदा राज्य बन चुका है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में राज्य के युवाओं को रोज़गार के अधिकतम अवसर दिलाने के लिए उच्च शिक्षा अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सफलता केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के सामूहिक योगदान से संभव होगी।

उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे शिक्षा क्षेत्र में नए मुकाम हासिल कर प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प में सहभागी बनें।

शिक्षा मंत्री का दृष्टिकोण

शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाज ने इस अभियान को महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने वाला जन-आंदोलन बताया। उनके अनुसार, 'समरस विद्या सेतु' समाज के हर वर्ग को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

गौरतलब है कि यह अभियान ऐसे समय में शुरू हुआ है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन के बीच राज्यों से अपेक्षा की जा रही है कि वे ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम स्तर पर लाएँ। आने वाले हफ्तों में अभियान की प्रगति की निगरानी जिला स्तर पर की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उन 80,000 बच्चों तक पहुँचने में है जो पहले से ही सिस्टम से बाहर हो चुके हैं — अक्सर आर्थिक मजबूरी, बाल श्रम या सामाजिक बाधाओं के कारण। सूची बनाना और संपर्क करना पहला कदम है, लेकिन इन बच्चों को स्कूल में टिकाए रखना — खासकर जब परिवारों की आजीविका दाँव पर हो — कहीं अधिक जटिल चुनौती है। 'समरस विद्या सेतु' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सहायक शिक्षा और अभिभावक जागरूकता के वादे ज़मीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं — और क्या इसकी निगरानी के लिए कोई पारदर्शी तंत्र स्थापित किया जाता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'समरस विद्या सेतु' अभियान क्या है?
'समरस विद्या सेतु' गुजरात सरकार का राज्यव्यापी अभियान है, जिसे मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 22 जुलाई को अहमदाबाद से शुरू किया। इसका उद्देश्य स्कूल छोड़ चुके 80,000 से अधिक बच्चों को चिह्नित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाना और गुजरात को 'ज़ीरो ड्रॉपआउट' राज्य बनाना है।
गुजरात में अभी स्कूल ड्रॉपआउट दर कितनी है?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार, गुजरात में स्कूल ड्रॉपआउट दर घटकर 2 प्रतिशत रह गई है। अब राज्य सरकार इसे शून्य तक लाने के लक्ष्य के साथ यह अभियान चला रही है।
इस अभियान के तहत ड्रॉपआउट बच्चों को कैसे स्कूल वापस लाया जाएगा?
जिलेवार तैयार की गई सूची के आधार पर शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और सामाजिक नेता माता-पिता से संपर्क करेंगे। प्रत्येक बच्चे को उसकी आयु के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा और पढ़ाई में पिछड़े बच्चों के लिए विशेष सहायक शिक्षा की व्यवस्था की गई है।
इस अभियान से किसे फायदा होगा?
इस अभियान का सीधा लाभ गुजरात के उन 80,000 से अधिक बच्चों को मिलेगा जो किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुके हैं। दीर्घकालिक रूप से यह राज्य के उन युवाओं को लाभान्वित करेगा जो उच्च शिक्षा और रोज़गार के बेहतर अवसर पाना चाहते हैं।
शिक्षा मंत्री ने इस अभियान के बारे में क्या कहा?
शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाज ने 'समरस विद्या सेतु' को महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने वाला जन-आंदोलन बताया। उनके अनुसार यह अभियान समाज के हर वर्ग को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।
राष्ट्र प्रेस
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