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गुजरात शाला प्रवेशोत्सव 2026: दो दिनों में 11.20 लाख छात्रों का नामांकन, 17,338 गांवों तक पहुंचा अभियान

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गुजरात शाला प्रवेशोत्सव 2026: दो दिनों में 11.20 लाख छात्रों का नामांकन, 17,338 गांवों तक पहुंचा अभियान

सारांश

गुजरात के 'शाला प्रवेशोत्सव 2026' ने दो दिनों में 11.20 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन कर दिया — 17,338 गांव, 24,716 स्कूल और 60,184 अधिकारी व जन-प्रतिनिधि इसके साक्षी बने। बालवाटिका में नामांकन पात्र बच्चों की संख्या से भी अधिक रहा।

मुख्य बातें

शाला प्रवेशोत्सव 2026 के पहले दो दिनों में गुजरात में 11.20 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन हुआ।
अभियान 17,338 गांवों और 24,716 स्कूलों तक पहुँचा; 60,184 अधिकारियों व जन-प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अभियान का 24वां संस्करण वडनगर के बी.एन.
हाई स्कूल से शुरू किया।
बालवाटिका में 1,39,925 पात्र बच्चों के मुकाबले 1.40 लाख से अधिक दाखिले दर्ज किए गए।
5,664 छात्राओं को ' विद्यालक्ष्मी बॉन्ड ' वितरित; 847 स्कूलों को नई परिवहन सुविधाएँ मिलीं।
अभियान के दौरान ₹9.19 करोड़ से अधिक का जन-योगदान प्राप्त हुआ।

गुजरात सरकार के 'कन्या केलवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव 2026' अभियान के पहले दो दिनों में राज्यभर में 11.20 लाख से अधिक छात्रों का स्कूलों में नामांकन हो चुका है। 24 जून 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह अभियान 17,338 गांवों और 24,716 स्कूलों तक फैल चुका है, जो इसे गुजरात के शिक्षा इतिहास के सबसे व्यापक नामांकन अभियानों में से एक बनाता है।

अभियान का विस्तार और दूसरे दिन की गतिविधियाँ

अभियान के दूसरे दिन राज्य के 8,173 गांवों और 11,987 स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान मंत्रियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों सहित कुल 29,682 गणमान्य व्यक्तियों ने स्कूलों का दौरा किया और बच्चों का स्वागत करते हुए उन्हें दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया। दोनों दिनों को मिलाकर 60,184 जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया।

नामांकन के प्रमुख आंकड़े

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को आंगनवाड़ी और प्री-प्राइमरी संस्थानों के माध्यम से 62,000 से अधिक बच्चों ने अपनी शैक्षिक यात्रा की शुरुआत की। बालवाटिका कक्षाओं में नामांकन की संख्या पात्र बच्चों से भी अधिक रही — 1,39,925 पात्र बच्चों के सापेक्ष 1.40 लाख से अधिक दाखिले दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त, कक्षा 1 में 34,000 से अधिक, कक्षा 9 में 1,96,755 और कक्षा 11 में 1,01,759 छात्रों का नामांकन हुआ।

राज्य के 'बैक टू स्कूल सर्वे' के तहत पहचाने गए 21,892 छात्रों को भी इस अभियान के दौरान शैक्षणिक संस्थाओं में दाखिला दिलाया गया।

मुख्यमंत्री ने वडनगर से किया शुभारंभ

इस अभियान का 24वां संस्करण मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वडनगर के बी.एन. हाई स्कूल से आरंभ किया — यही वह विद्यालय है जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बचपन में शिक्षा ग्रहण की थी। यह ऐतिहासिक स्थान चुनना प्रतीकात्मक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह अभियान मूलतः 2003 में शुरू किया गया था — उस समय नरेंद्र मोदी स्वयं गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

लड़कियों की शिक्षा और परिवहन सुविधाएँ

शिक्षा तक पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने 847 स्कूलों को नई परिवहन सुविधाएँ प्रदान कीं, जिससे दूरदराज़ के इलाकों के छात्रों को लाभ मिलेगा। अभियान के दौरान 5,664 छात्राओं को 'विद्यालक्ष्मी बॉन्ड' वितरित किए गए, जो लड़कियों को शिक्षा जारी रखने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु बनाए गए हैं।

जन-भागीदारी और आर्थिक योगदान

इस अभियान को व्यापक जन-समर्थन भी मिला। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के दौरान ₹9.19 करोड़ से अधिक का योगदान प्राप्त हुआ, जिसमें ₹1.25 करोड़ से अधिक का नकद दान और ₹7.95 करोड़ से अधिक मूल्य की शैक्षिक सामग्री शामिल है जो राज्यभर के स्कूलों को दान की गई।

गौरतलब है कि यह कार्यक्रम हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र से पूर्व आयोजित किया जाता है और इसका विशेष ध्यान लड़कियों तथा पिछड़े समुदायों के बच्चों के नामांकन पर रहता है। अभियान का आगामी चरण यह तय करेगा कि क्या यह नामांकन दर वर्ष के अंत तक कक्षाओं में उपस्थिति में भी परिलक्षित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी नामांकन नहीं, ठहराव है। गुजरात में ड्रॉपआउट दर — विशेषकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में — वर्षों से चिंता का विषय रही है। बालवाटिका में पात्रता से अधिक नामांकन उत्साहजनक है, परंतु यह सवाल बना रहता है कि क्या ये बच्चे वर्ष के अंत तक कक्षाओं में बने रहेंगे। 2003 से चल रहे इस अभियान के दो दशक बाद भी यदि हर वर्ष लाखों बच्चों को 'नए सिरे से' नामांकित करना पड़ रहा है, तो यह प्रणालीगत समस्या की ओर इशारा करता है जिसे महज़ उत्सव से नहीं, नीतिगत निरंतरता से सुलझाना होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाला प्रवेशोत्सव 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
शाला प्रवेशोत्सव गुजरात सरकार का वार्षिक स्कूल नामांकन अभियान है, जिसे 2003 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य राज्यभर में — विशेषकर लड़कियों और पिछड़े समुदायों के बच्चों में — साक्षरता बढ़ाना और सभी पात्र बच्चों को शिक्षा प्रणाली से जोड़ना है।
इस वर्ष अभियान में कितने छात्रों का नामांकन हुआ?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 'कन्या केलवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव 2026' के पहले दो दिनों में 11.20 लाख से अधिक छात्रों का नामांकन हुआ। यह अभियान 17,338 गांवों और 24,716 स्कूलों तक पहुँचा।
अभियान की शुरुआत कहाँ और किसने की?
अभियान के 24वें संस्करण का शुभारंभ मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वडनगर के बी.एन. हाई स्कूल से किया। यह वही विद्यालय है जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बचपन में शिक्षा प्राप्त की थी।
विद्यालक्ष्मी बॉन्ड क्या है और किसे मिला?
विद्यालक्ष्मी बॉन्ड गुजरात सरकार की एक पहल है जो लड़कियों को शिक्षा जारी रखने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस अभियान के दौरान 5,664 छात्राओं को ये बॉन्ड वितरित किए गए।
अभियान में जन-भागीदारी कितनी रही?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के दौरान ₹9.19 करोड़ से अधिक का जन-योगदान मिला, जिसमें ₹1.25 करोड़ से अधिक नकद दान और ₹7.95 करोड़ से अधिक मूल्य की शैक्षिक सामग्री शामिल है। इसके अलावा, 60,184 जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने कार्यक्रमों में भाग लिया।
राष्ट्र प्रेस
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