गुजरात शाला प्रवेशोत्सव: 37,211 स्कूलों में 16.35 लाख से अधिक बच्चों का नामांकन, 13,084 छात्राओं को विद्यालक्ष्मी बॉन्ड
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में तीन दिवसीय शाला प्रवेशोत्सव और कन्या केलवणी महोत्सव अभियान के तहत राज्य के 37,211 स्कूलों में 16.35 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का नामांकन दर्ज किया गया। राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं मंत्री जितू वघानी ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी। यह अभियान स्कूलों में नामांकन दर बढ़ाने और ड्रॉपआउट की समस्या पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
अभियान का आगाज़ और नेतृत्व
मंत्री वघानी ने बताया कि 24वाँ शाला प्रवेशोत्सव इस बार वडनगर स्थित बीएन हाई स्कूल से शुरू किया गया — वही विद्यालय जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी। अभियान का संचालन मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में हुआ। तीनों दिन मुख्यमंत्री पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी स्वयं विभिन्न स्कूलों में पहुँचे।
नामांकन के आँकड़े
मंत्री द्वारा साझा किए गए आँकड़ों के अनुसार, इस अभियान के दौरान 1.93 लाख से अधिक बच्चों ने आँगनवाड़ी और नर्सरी स्कूलों में शिक्षा की शुरुआत की। 4.34 लाख से अधिक बच्चे बालवाटिका में दाखिल हुए, जबकि 1.05 लाख से अधिक छात्र कक्षा 1 में, 5.93 लाख से अधिक छात्र कक्षा 9 में और 3.08 लाख से अधिक छात्र कक्षा 11 में नामांकित हुए।
बालिका शिक्षा और परिवहन सुविधा
बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए 13,084 मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा हेतु 'विद्यालक्ष्मी बॉन्ड' प्रदान किए गए। इसके साथ ही दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ाई को सुलभ बनाने के लिए सरकार ने करीब 2,766 स्कूलों में परिवहन सुविधा शुरू की है, ताकि बच्चों की स्कूल तक पहुँच सुनिश्चित हो सके।
दानदाताओं का योगदान
गुजरात भर के दानदाताओं ने इस शिक्षा अभियान से जुड़े कार्यों के लिए ₹28.97 करोड़ से अधिक का योगदान दिया। यह सामाजिक भागीदारी अभियान की व्यापक स्वीकार्यता को रेखांकित करती है। गौरतलब है कि यह अभियान दो दशकों से अधिक समय से गुजरात में शिक्षा के सार्वभौमीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण वार्षिक पहल के रूप में स्थापित हो चुका है।
आगे की राह
मंत्री वघानी ने स्पष्ट किया कि अभियान का दीर्घकालिक लक्ष्य गुजरात की साक्षरता दर में सुधार लाना और राज्य में 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना है। ड्रॉपआउट दर में कमी और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में यह अभियान राज्य सरकार की प्राथमिकताओं का प्रतिबिंब है।