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भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 10.88% CAGR से बढ़ा, रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर

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भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 10.88% CAGR से बढ़ा, रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर

सारांश

सरकारी फैक्टशीट के अनुसार भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 10.88% CAGR से बढ़ रहा है। रक्षा उत्पादन FY26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर, इलेक्ट्रॉनिक्स ₹13.11 लाख करोड़ पर और सेमीकंडक्टर में ₹1.64 लाख करोड़ के 12 प्रोजेक्ट मंजूर — यह भारत के औद्योगिक पुनर्जागरण की सबसे ठोस तस्वीर है।

मुख्य बातें

भारत का विनिर्माण क्षेत्र 10.88% CAGR से बढ़ रहा है और GDP में 16-17% योगदान देता है।
क्षेत्र से 2.7 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार; जून 2026 में उत्पादन वृद्धि 7.8% ।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन FY2025-26 में रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ — 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से चार गुना अधिक।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ (FY26), मोबाइल निर्यात ₹2.59 लाख करोड़ पर।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत 12 इकाइयों को ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक निवेश की मंजूरी।
जुलाई 2026 में माल निर्यात 44.24 अरब डॉलर , जो एक वर्ष पूर्व के 36.98 अरब डॉलर से अधिक।

केंद्र सरकार की आत्मनिर्भरता, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन और औद्योगिक नीति सुधारों के बल पर भारत का विनिर्माण क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि की धुरी बनकर उभरा है। 15 अगस्त 2026 को जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, स्थिर कीमतों पर सकल मूल्य वर्धित (GVA) वृद्धि का चक्रवृद्धि वार्षिक दर (CAGR 10.88 प्रतिशत) रहा है, जो इस क्षेत्र की सतत विस्तार क्षमता को रेखांकित करता है। रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर — तीनों रणनीतिक मोर्चों पर भारत ने एक साथ मील के पत्थर हासिल किए हैं।

मैन्युफैक्चरिंग की समग्र स्थिति

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र इस समय GDP में 16 से 17 प्रतिशत का योगदान देता है और 2.7 करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है। जून 2026 में विनिर्माण उत्पादन में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो लगातार सुधरती औद्योगिक गतिविधि का संकेत है। जुलाई 2026 में माल निर्यात बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुँच गया, जबकि एक वर्ष पूर्व यह 36.98 अरब डॉलर था — यानी सालाना आधार पर उल्लेखनीय उछाल।

रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल

स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के मोर्चे पर भारत ने एक दशक में कायापलट किया है। सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन का मूल्य रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुँच गया। यह वित्त वर्ष 2024-25 के ₹1,54,071 करोड़ की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। तुलनात्मक रूप से, वर्ष 2014-15 में यह आँकड़ा महज ₹46,429 करोड़ था — यानी एक दशक में चार गुने से अधिक की वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाएँ पुनर्गठित हो रही हैं और भारत खुद को एक विश्वसनीय रक्षा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण की छलांग

वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के ₹11.32 लाख करोड़ की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक है। मोबाइल फोन निर्यात ₹2.59 लाख करोड़ तक पहुँच गया है, जिससे भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी उपस्थिति और मजबूत कर रहा है। बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (LSEM) के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजना ने मोबाइल निर्माण इकोसिस्टम में करीब ₹96,000 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नई बुनियाद

सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 के अंतर्गत जुलाई 2026 तक ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक निवेश वाली 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं। गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर विनिर्माण में प्रवेश भारत की दीर्घकालिक तकनीकी संप्रभुता की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

फार्मास्यूटिकल्स और आगे की राह

फैक्टशीट के अनुसार, फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में उत्पादन, नवाचार और निर्यात में निरंतर वृद्धि ने भारत की पहचान एक विश्वसनीय वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में और पुख्ता की है। सरकार का मानना है कि रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और फार्मा — इन चार क्षेत्रों में एक साथ हो रहा विस्तार भारत को वैश्विक विनिर्माण मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र के और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन GDP में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी अभी भी 16-17% पर है — जबकि 25% का लक्ष्य एक दशक से अधिक समय से अधूरा है। रोजगार का आँकड़ा 2.7 करोड़ बताया गया है, परंतु इसमें असंगठित क्षेत्र और ठेका श्रमिकों की गिनती की पद्धति स्पष्ट नहीं है। PLI योजना ने निवेश तो खींचा है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन का स्वतंत्र सत्यापन अभी भी एक बड़ा सवाल है। सेमीकंडक्टर में 12 इकाइयों की मंजूरी उत्साहजनक है — असली परीक्षा तब होगी जब ये इकाइयाँ उत्पादन शुरू करें और वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी मापी जाए।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर किस दर से बढ़ रहा है?
सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, स्थिर कीमतों पर GVA आधार पर भारत का विनिर्माण क्षेत्र 10.88% CAGR की दर से बढ़ रहा है। यह क्षेत्र GDP में 16-17% योगदान देता है और 2.7 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है।
भारत का रक्षा उत्पादन FY26 में कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुँचा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹1,54,071 करोड़ से 15.6% अधिक है। तुलना के लिए, 2014-15 में यह केवल ₹46,429 करोड़ था।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के तहत अब तक क्या हासिल हुआ है?
जुलाई 2026 तक सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 के तहत ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक निवेश वाली 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयाँ शामिल हैं।
भारत का माल निर्यात जुलाई 2026 में कितना रहा?
जुलाई 2026 में भारत का माल निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुँच गया, जबकि एक वर्ष पूर्व जुलाई 2025 में यह 36.98 अरब डॉलर था।
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में PLI योजना का क्या असर रहा?
बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (LSEM) PLI योजना ने मोबाइल निर्माण इकोसिस्टम में करीब ₹96,000 करोड़ का निवेश आकर्षित किया है। FY2025-26 में कुल इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ रहा और मोबाइल फोन निर्यात ₹2.59 लाख करोड़ तक पहुँचा।
राष्ट्र प्रेस
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