भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ पर, 12 वर्षों में निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ के पार
सारांश
मुख्य बातें
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र वित्त वर्ष 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ के उत्पादन मूल्य तक पहुँच गया है — जो पिछले वित्त वर्ष के ₹11.32 लाख करोड़ की तुलना में 15.8 प्रतिशत की वृद्धि है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
संसद में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है — इसने भारत की वैश्विक विनिर्माण पहचान को भी बदल दिया है। स्मार्टफोन, जो वर्ष 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी स्थान नहीं पाते थे, अब वित्त वर्ष 2025-26 में पेट्रोलियम, रत्न एवं आभूषण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बन गए हैं। यह बदलाव एक दशक से भी कम समय में हुआ है — जो किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए असाधारण माना जाता है।
रोज़गार और लैंगिक समावेश
मंत्री के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 25 लाख लोगों को रोज़गार दे रहा है। अकेले मोबाइल फोन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी वैल्यू चेन में लगभग 12 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है। उल्लेखनीय यह है कि मोबाइल फोन निर्माण के कुछ हाई-प्रिसीजन सेगमेंट में कुल कार्यबल का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है, जो इस क्षेत्र को लैंगिक समावेशी औद्योगिक विकास का एक उदाहरण बनाता है।
मोबाइल फोन: आयातक से निर्यातक तक का सफर
जितिन प्रसाद ने रेखांकित किया कि भारत वर्ष 2014 में मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक था, लेकिन अब वह शुद्ध निर्यातक बन चुका है। आज देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में ही निर्मित हो रहे हैं। इसके साथ ही भारत मोबाइल फोन उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI-LSEM) योजना के अंतर्गत अब तक लगभग ₹96,000 करोड़ (करीब 14 अरब डॉलर) का निवेश आकर्षित किया जा चुका है।
आईटी हार्डवेयर और ईसीएमएस की प्रगति
सरकार ने वर्ष 2023 में आईटी हार्डवेयर PLI स्कीम 2.0 लॉन्च की, जिसका लक्ष्य लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और अन्य हार्डवेयर के लिए मज़बूत घरेलू विनिर्माण आधार तैयार करना है। इस योजना के तहत अब तक ₹24,385.89 करोड़ का संचयी उत्पादन, ₹1,056.36 करोड़ का निवेश और 5,216 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के अंतर्गत 23 उत्पादों के लिए 75 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं से ₹61,671 करोड़ का निवेश, ₹4.51 लाख करोड़ का उत्पादन और 65,040 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है — जबकि ECMS का समग्र लक्ष्य ₹59,350 करोड़ निवेश और 91,600 प्रत्यक्ष रोज़गार है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन और 'चीन+1' रणनीति के तहत बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को विकल्प के रूप में देख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ECMS और PLI 2.0 का समन्वित क्रियान्वयन भारत को न केवल असेंबली हब, बल्कि कंपोनेंट निर्माण में भी आत्मनिर्भर बना सकता है — जो अब तक इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती रही है।