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भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ पर, 12 वर्षों में निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ के पार

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भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ पर, 12 वर्षों में निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ के पार

सारांश

2014 में शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी न रहने वाला स्मार्टफोन आज भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद है। ₹13.11 लाख करोड़ के उत्पादन और 11 गुना बढ़े निर्यात के साथ, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र एक दशक में असेंबली शॉप से वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ पर पहुँचा, जो पिछले वर्ष से 15.8% अधिक है।
पिछले 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ से अधिक हुआ।
स्मार्टफोन अब भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद — पेट्रोलियम और रत्न-आभूषण से आगे।
भारत में उपयोग होने वाले 99.2% मोबाइल फोन देश में ही निर्मित; भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 25 लाख रोज़गार; मोबाइल हाई-प्रिसीजन सेगमेंट में 70% कार्यबल महिलाएँ।
ECMS के तहत स्वीकृत परियोजनाओं से ₹61,671 करोड़ निवेश और 65,040 प्रत्यक्ष रोज़गार की संभावना।

भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र वित्त वर्ष 2025-26 में ₹13.11 लाख करोड़ के उत्पादन मूल्य तक पहुँच गया है — जो पिछले वित्त वर्ष के ₹11.32 लाख करोड़ की तुलना में 15.8 प्रतिशत की वृद्धि है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

संसद में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि केवल संख्याओं तक सीमित नहीं है — इसने भारत की वैश्विक विनिर्माण पहचान को भी बदल दिया है। स्मार्टफोन, जो वर्ष 2014 में भारत के शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी स्थान नहीं पाते थे, अब वित्त वर्ष 2025-26 में पेट्रोलियम, रत्न एवं आभूषण जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बन गए हैं। यह बदलाव एक दशक से भी कम समय में हुआ है — जो किसी भी औद्योगिक क्षेत्र के लिए असाधारण माना जाता है।

रोज़गार और लैंगिक समावेश

मंत्री के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 25 लाख लोगों को रोज़गार दे रहा है। अकेले मोबाइल फोन विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी वैल्यू चेन में लगभग 12 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है। उल्लेखनीय यह है कि मोबाइल फोन निर्माण के कुछ हाई-प्रिसीजन सेगमेंट में कुल कार्यबल का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है, जो इस क्षेत्र को लैंगिक समावेशी औद्योगिक विकास का एक उदाहरण बनाता है।

मोबाइल फोन: आयातक से निर्यातक तक का सफर

जितिन प्रसाद ने रेखांकित किया कि भारत वर्ष 2014 में मोबाइल फोन का शुद्ध आयातक था, लेकिन अब वह शुद्ध निर्यातक बन चुका है। आज देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में ही निर्मित हो रहे हैं। इसके साथ ही भारत मोबाइल फोन उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन गया है। प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI-LSEM) योजना के अंतर्गत अब तक लगभग ₹96,000 करोड़ (करीब 14 अरब डॉलर) का निवेश आकर्षित किया जा चुका है।

आईटी हार्डवेयर और ईसीएमएस की प्रगति

सरकार ने वर्ष 2023 में आईटी हार्डवेयर PLI स्कीम 2.0 लॉन्च की, जिसका लक्ष्य लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और अन्य हार्डवेयर के लिए मज़बूत घरेलू विनिर्माण आधार तैयार करना है। इस योजना के तहत अब तक ₹24,385.89 करोड़ का संचयी उत्पादन, ₹1,056.36 करोड़ का निवेश और 5,216 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के अंतर्गत 23 उत्पादों के लिए 75 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन परियोजनाओं से ₹61,671 करोड़ का निवेश, ₹4.51 लाख करोड़ का उत्पादन और 65,040 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है — जबकि ECMS का समग्र लक्ष्य ₹59,350 करोड़ निवेश और 91,600 प्रत्यक्ष रोज़गार है।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्गठन और 'चीन+1' रणनीति के तहत बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को विकल्प के रूप में देख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ECMS और PLI 2.0 का समन्वित क्रियान्वयन भारत को न केवल असेंबली हब, बल्कि कंपोनेंट निर्माण में भी आत्मनिर्भर बना सकता है — जो अब तक इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौती रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि इसमें असेंबली की हिस्सेदारी कितनी है और वास्तविक मूल्य-संवर्धन कितना — क्योंकि भारत अभी भी अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट आयात करता है। स्मार्टफोन का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बनना ऐतिहासिक है, परंतु इसकी वैल्यू चेन में चीनी और ताइवानी कंपोनेंट की प्रधानता एक संरचनात्मक कमज़ोरी बनी हुई है। ECMS इस खाई को पाटने की कोशिश है, लेकिन 65,040 रोज़गार का लक्ष्य 25 लाख के मौजूदा आधार की तुलना में मामूली है। जब तक कंपोनेंट आत्मनिर्भरता नहीं आती, 'विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता' का तमगा आंशिक ही रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन ₹13.11 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹11.32 लाख करोड़ से 15.8 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में दी।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 12 वर्षों में कितना बढ़ा?
पिछले 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़कर ₹4 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। इस दौरान स्मार्टफोन भारत का सबसे बड़ा एकल निर्यात उत्पाद बन गए हैं, जो 2014 में शीर्ष 100 निर्यात उत्पादों में भी शामिल नहीं थे।
भारत मोबाइल फोन उत्पादन में किस स्थान पर है?
भारत अब मोबाइल फोन उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा निर्माता बन चुका है। देश में उपयोग होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन अब भारत में ही बनाए जा रहे हैं और भारत 2014 के शुद्ध आयातक से शुद्ध निर्यातक बन गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) से क्या उम्मीद है?
ECMS के तहत अब तक 23 उत्पादों के लिए 75 आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं। इन परियोजनाओं से ₹61,671 करोड़ का निवेश, ₹4.51 लाख करोड़ का उत्पादन और 65,040 प्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की संभावना है, जबकि योजना का समग्र लक्ष्य ₹59,350 करोड़ निवेश और 91,600 प्रत्यक्ष रोज़गार का है।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी कैसी है?
मोबाइल फोन निर्माण के हाई-प्रिसीजन सेगमेंट में कुल कार्यबल का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र समग्र रूप से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 25 लाख लोगों को रोज़गार दे रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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