भारतीय GDP वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 में 7% रहने का अनुमान: S&P ग्लोबल-क्रिसिल रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
एस&पी ग्लोबल-क्रिसिल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.8 प्रतिशत की मज़बूत विकास दर दर्ज की है और वित्त वर्ष 2026-27 में इसके लगभग 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। 30 सितंबर 2026 को जारी यह रिपोर्ट वैश्विक अनिश्चितता और ऊँचे अमेरिकी टैरिफ के बीच भारत की घरेलू आर्थिक मज़बूती को रेखांकित करती है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
'इंडिया फॉरवर्ड: रीइमैजिनिंग ग्रोथ' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास दर का थोड़ा धीमा होना स्वाभाविक है, क्योंकि देश अपने आर्थिक विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत अपनी समष्टि-आर्थिक (macro-economic) मज़बूती को दीर्घकालिक विकास गति में सफलतापूर्वक परिवर्तित कर पाता है, तो वह इस रफ़्तार को बनाए रखने की अच्छी स्थिति में होगा।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत की उम्मीद से बेहतर वृद्धि, घरेलू माँग की मज़बूती और तेज़ी से बदलते अनिश्चित वैश्विक परिवेश में अर्थव्यवस्था की अनुकूलन क्षमता को दर्शाती है। गौरतलब है कि यह वृद्धि ऐसे समय में आई है जब कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक दबावों से जूझ रही हैं।
विशेषज्ञ की राय
एस&पी ग्लोबल रेटिंग्स के प्रेसिडेंट और क्रिसिल के बोर्ड चेयरमैन यान ले पैलेक ने कहा कि भारत के पास बुनियादी ढाँचे के निरंतर विकास, अधिक प्रतिस्पर्धी संघवाद, गहरे पूँजी बाज़ारों और सशक्त वित्तीय मध्यस्थता (financial intermediation) के ज़रिए अपनी आर्थिक ताक़त को और बढ़ाने का एक बड़ा अवसर है। उन्होंने संस्थागत सुदृढ़ता और निवेश की निरंतरता को विकास के अगले चरण की कुंजी बताया।
भू-राजनीतिक परिदृश्य और ऊर्जा सुरक्षा
रिपोर्ट में भू-राजनीतिक मोर्चे पर यह सुझाव दिया गया है कि भारत वैश्विक मामलों में खुद को एक 'बैलेंसिंग पावर' के बजाय एक 'लीडिंग पावर' के रूप में स्थापित कर रहा है। यह बदलाव भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता और आर्थिक कद के अनुरूप है।
ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में रिपोर्ट ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति में संभावित रुकावट को एक गंभीर चिंता के रूप में चिह्नित किया है। भारत का आधे से अधिक कच्चा तेल आयात इसी रणनीतिक जलमार्ग से होकर आता है, जिससे भारत इस मार्ग में किसी भी व्यवधान से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों में शामिल हो जाता है।
डिजिटल रुपया और CBDC की संभावनाएँ
रिपोर्ट में केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) यानी डिजिटल रुपए की बढ़ती संभावनाओं की ओर भी ध्यान आकृष्ट किया गया है। इसमें कहा गया है कि CBDC भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की चौथी परत के रूप में उभर सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल रुपया 'प्रोग्रामेबल मनी' को संभव बना सकता है और तेज़ी से टोकनाइज़ हो रही वैश्विक अर्थव्यवस्था में सीमा-पार व्यापार तथा प्रेषण (remittance) को संप्रभु मुद्रा से जोड़े रखने में सहायक हो सकता है।
आगे की राह
रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत की विकास यात्रा का अगला पड़ाव निवेश की गति बनाए रखने और महत्त्वपूर्ण आर्थिक संस्थानों को सुदृढ़ करने पर निर्भर करेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतिगत निरंतरता बनी रही, तो भारत वैश्विक विकास के इंजन के रूप में अपनी स्थिति और मज़बूत कर सकता है।