पीएम मोदी के उपहारों की ई-नीलामी: ₹50 करोड़ से गंगा सफाई, कन्या केलवानी से बेटियों की पढ़ाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्राप्त उपहारों और स्मृति चिन्हों की नीलामी पिछले 25 वर्षों से जनसेवा का एक अनूठा माध्यम बनी हुई है — बालिका शिक्षा से लेकर नमामि गंगा अभियान तक इस पहल ने करोड़ों रुपये जुटाए हैं। जनवरी 2019 से शुरू हुई 'पीएम स्मृति चिन्ह ई-नीलामी' के आठवें संस्करण में लगभग 1,500 उपहार शामिल हैं, जो 31 अक्टूबर 2026 तक नीलाम होंगे और एकत्रित धनराशि नदी सफाई परियोजना को समर्पित रहेगी।
25 वर्षों की अनूठी परंपरा
यह सिलसिला अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री पद से शुरू हुआ और मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अनवरत जारी रहा। शॉल, मूर्तियाँ और अन्य यादगार वस्तुओं को नकद में परिवर्तित कर उस राशि को सार्वजनिक कल्याण योजनाओं में लगाने की यह परिपाटी मोदी की सार्वजनिक छवि का अभिन्न हिस्सा बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसी भावना को अपने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत रेखांकित कर रही है, जो 17 सितंबर 2026 से एक महीने तक चल रहा है।
कन्या केलवानी निधि: बेटियों की शिक्षा की नींव
गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए मोदी ने 2003 में कन्या केलवानी निधि की स्थापना की, जिसका उद्देश्य बालिका शिक्षा और महिला साक्षरता को बढ़ावा देना था। तत्कालीन मुख्यमंत्री को प्राप्त उपहारों की नीलामी से इस कोष को धन मिलता था। वर्षों बाद यह पहल मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना (MYSY) के रूप में संस्थागत हो गई, जिसे 2017-18 में औपचारिक रूप दिया गया।
MYSY के अंतर्गत नीट के ज़रिए MBBS में दाखिला पाने वाली पात्र महिला छात्राओं को ट्यूशन फीस का 50 प्रतिशत सहायता के रूप में मिलता है। यह योजना बाद में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और अन्य कौशल विकास कार्यक्रमों के साथ और सशक्त हुई।
नमामि गंगा अभियान को मिली नीलामी से संजीवनी
2014 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया नमामि गंगा कार्यक्रम गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने का देश का सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास माना जाता है। जनवरी 2019 से 'पीएम मोमेंटोस ई-नीलामी' की आय सीधे इसी परियोजना में जाती है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, नीलामी के पिछले संस्करणों के माध्यम से इस परियोजना के लिए ₹50 करोड़ से अधिक की धनराशि जुटाई जा चुकी है। आलोचकों का कहना है कि नमामि गंगा अभी अपने सभी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाई है, फिर भी नीलामी का योगदान निरंतर बना हुआ है।
आम नागरिकों के लिए इतिहास का हिस्सा बनने का मौका
इस वर्ष के आठवें संस्करण में नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में प्रदर्शित लगभग 1,500 उपहार शामिल हैं। उल्लेखनीय बात यह है कि इनमें से कई वस्तुओं की न्यूनतम बोली मात्र ₹200 रखी गई है, ताकि साधारण भारतीय नागरिक भी इतिहास के एक टुकड़े का स्वामित्व ले सकें।
मंत्री का बयान और सेवा की भावना
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 'पीएम मोमेंटोस ई-ऑक्शन 2026' के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री मोदी की विचारधारा को उद्धृत करते हुए कहा कि मोदी मानते हैं — 'जो कुछ प्राप्त होता है वह मेरा नहीं है; जो कुछ मुझे दिया जाता है वह मेरा नहीं है और जो मेरा नहीं है उसे जमा करने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।' शेखावत ने इस नीलामी को व्यक्तिगत उपहारों से आगे बढ़कर सार्वजनिक भागीदारी और राष्ट्रीय उद्देश्य का प्रतीक बताया।
यह आयोजन केवल धन संग्रह का माध्यम नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और निस्वार्थ सेवा की एक मिसाल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है — एक ऐसी परंपरा जो आने वाले वर्षों में और गहरी हो सकती है।