मोदी के 25 साल: गुजरात की 8 योजनाएँ जो राष्ट्रीय अभियान बनीं, 7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुई यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी — और ठीक 25 वर्ष बाद वे अनवरत जनसेवा में सक्रिय हैं, पहले राज्य के शीर्ष पद पर, फिर 2014 से देश के प्रधानमंत्री के रूप में। 'मोदी स्टोरी' सोशल मीडिया अकाउंट ने इन 25 वर्षों की उस नीतिगत यात्रा का लेखा-जोखा साझा किया है, जिसमें गुजरात में पायलट की गई कम-से-कम 8 प्रमुख योजनाओं को केंद्र में राष्ट्रीय कार्यक्रमों के रूप में विस्तारित किया गया।
गुजरात की प्रयोगशाला से राष्ट्रीय मंच तक
मोदी के कार्यकाल का एक विशिष्ट पैटर्न रहा है: गुजरात में नीति को परखना, फिर उसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करना। 'मोदी स्टोरी' के अनुसार, कन्या केलावणी निधि योजना — जो गुजरात में बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करती थी — को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली। इसी तरह राज्य की मुख्यमंत्री अमृतम् योजना ने गरीब परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी, जिसकी परिणति आयुष्मान भारत योजना के रूप में हुई।
डिजिटल शासन और शिकायत निवारण
गुजरात में 2003 में मोदी ने 'स्वागत' (स्टेट वाइड अटेंशन ऑन ग्रिवेंसेज बाय एप्लिकेशन ऑफ टेक्नोलॉजी) योजना शुरू की थी, जो तकनीक के ज़रिये सीधे नागरिकों की शिकायतें सुनने की प्रणाली थी। प्रधानमंत्री बनने के बाद इसी मॉडल पर 'प्रगति' (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) योजना तैयार की गई। इसी दौर में 'ई-ग्राम विश्वग्राम' डिजिटल पहल की नींव पर केंद्र का 'डिजिटल इंडिया' अभियान खड़ा हुआ।
जल, स्वच्छता और ऊर्जा की योजनाएँ
गुजरात में 'वासमो पानी समिति' के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ जल पहुँचाने की पहल की गई थी। प्रधानमंत्री बनने के बाद इसे 'जल जीवन मिशन' के रूप में 15 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च किया गया। इसी तरह 'ज्योतिग्राम' ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम ने 'सौभाग्य योजना' का रूप लिया, और 'निर्मल गुजरात' स्वच्छता अभियान ने 'स्वच्छ भारत मिशन' की शक्ल ली।
कौशल विकास, पोषण और खेल
गुजरात के 'कौशल्य वर्धन केंद्र' ने केंद्र में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की स्थापना को प्रेरित किया। बच्चों के पोषण के लिए राज्य-स्तरीय 'इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज' मॉडल का विस्तार 'पोषण अभियान' के रूप में हुआ। खेल के क्षेत्र में 'खेल महाकुंभ' का राष्ट्रीय संस्करण 'खेलो इंडिया' बना।
25 वर्ष की विरासत का महत्व
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब नीति-निरंतरता और दीर्घकालिक शासन को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ है। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2026 को मोदी की सत्ता में यह यात्रा 25 वर्ष पूरे करती है — एक ऐसा मील का पत्थर जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) व्यापक जनसंपर्क के साथ मना रही है। इन योजनाओं का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि ज़मीनी क्रियान्वयन कितना प्रभावी सिद्ध होता है।