7 अक्टूबर 2026
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मोदी के 25 साल: गुजरात की 8 पहलें जो बनीं राष्ट्रीय कार्यक्रम — स्वागत से खेलो इंडिया तक

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मोदी के 25 साल: गुजरात की 8 पहलें जो बनीं राष्ट्रीय कार्यक्रम — स्वागत से खेलो इंडिया तक

सारांश

7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुए मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल — और इस दौरान गुजरात की प्रयोगशाला से निकले 8 से अधिक मॉडल जो राष्ट्रीय कार्यक्रमों की नींव बने। 'स्वागत' से 'प्रगति', 'ज्योतिग्राम' से 'जल जीवन मिशन', और 'खेल महाकुंभ' से 'खेलो इंडिया' तक — गवर्नेंस में एक अनूठी निरंतरता की कहानी।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी; 7 अक्टूबर 2026 को उनके सार्वजनिक नेतृत्व के 25 वर्ष पूरे हुए।
केंद्रीय कैबिनेट ने एक विशेष प्रस्ताव में 'स्वागत' और 'ज्योतिग्राम' सहित गुजरात की पहलों को राष्ट्रीय कार्यक्रमों की प्रेरणा के रूप में रेखांकित किया।
'स्वागत' शिकायत निवारण मंच ( अप्रैल 2003 ) को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड मिला; इसे 'प्रगति' मंच की प्रेरणा बताया गया।
गुजरात की 'मुख्यमंत्री अमृतम' योजना ( 2012 ) को 'आयुष्मान भारत-PMJAY' ( 2018 ) के अनुभव-आधार से जोड़ा गया।
'खेल महाकुंभ' (2010) में 16 खेलों में 13 लाख प्रतिभागी शामिल हुए; मोदी ने इसे राष्ट्रीय 'खेलो इंडिया' आंदोलन का 'बीज' बताया।
गवर्नेंस, स्वास्थ्य, डिजिटल, जल, बिजली, स्वच्छता, शिक्षा और खेल — 8 क्षेत्रों में गुजरात के प्रयोग राष्ट्रीय नीतियों का हिस्सा बने।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर 7 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने एक विशेष प्रस्ताव में उनके नेतृत्व-सफर को रेखांकित किया। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के सबसे लंबे समय तक सेवारत निर्वाचित प्रधानमंत्री तक की इस यात्रा में, कई राज्य-स्तरीय प्रयोग बाद में राष्ट्रीय कार्यक्रमों की आधारशिला बने। कैबिनेट के प्रस्ताव में 'स्वागत' और 'ज्योतिग्राम' जैसी पहलों का विशेष उल्लेख किया गया।

मुख्य घटनाक्रम

मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 25 वर्षों के इस कार्यकाल में — पहले गुजरात में और फिर नई दिल्ली में — उन्होंने शासन, स्वास्थ्य, डिजिटल अवसंरचना, जल प्रबंधन, स्वच्छता, बालिका शिक्षा, कौशल विकास और खेल क्षेत्र में ऐसे प्रयोग किए जो आगे चलकर केंद्रीय योजनाओं के रूप में देशभर में लागू हुए।

शासन और डिजिटल गवर्नेंस

अप्रैल 2003 में गुजरात में शुरू किया गया 'स्वागत' (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) एक प्रौद्योगिकी-आधारित शिकायत निवारण मंच था, जिसने नागरिकों को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखने का अवसर दिया। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड प्राप्त हुआ। मोदी ने बाद में स्वयं कहा कि 'स्वागत' ने उन्हें केंद्र में 'प्रगति' मंच के लिए प्रेरित किया — वह राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म जो बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा करता है और अंतर-मंत्रालयी अवरोधों को दूर करता है।

डिजिटल क्षेत्र में, गुजरात के 'ई-ग्राम विश्वग्राम' प्रोजेक्ट ने ब्रॉडबैंड के माध्यम से ग्राम पंचायतों को जोड़कर डिजिटल सेवाएं सुलभ कराईं। मोदी के अनुसार, इस अनुभव ने 'डिजिटल इंडिया' के अंतर्गत देशव्यापी तकनीकी-शासन ढाँचे के निर्माण का आधार तैयार किया।

स्वास्थ्य, जल और ऊर्जा

स्वास्थ्य क्षेत्र में, गुजरात की 'मुख्यमंत्री अमृतम' (एमए) योजना — जो 2012 में गरीब परिवारों को महँगे उपचार से राहत देने के लिए शुरू की गई थी — 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर लागू 'आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' के अनुभव-आधार का हिस्सा बनी। बाद में गुजरात ने एमए को 'आयुष्मान भारत' के साथ मिलाकर पीएमजेएवाई-एमए का रूप दिया।

बिजली के क्षेत्र में, 'ज्योतिग्राम योजना' ने अलग कृषि फीडरों के माध्यम से गुजरात के गाँवों में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की। जल प्रबंधन में, 'पानी समितियों' पर आधारित सामुदायिक जल प्रबंधन मॉडल को मोदी ने राष्ट्रीय 'जल जीवन मिशन' — जो ग्रामीण घरों तक पाइप से पीने का पानी पहुँचाता है — से जोड़ते हुए गुजरात के अनुभव को प्रेरणास्रोत बताया।

स्वच्छता, शिक्षा और कौशल विकास

गुजरात का 'निर्मल गुजरात' स्वच्छता अभियान राष्ट्रीय 'स्वच्छ भारत मिशन' से पहले ही शुरू हो चुका था। राष्ट्रीय अभियान की चर्चा करते हुए मोदी ने गुजरात के इस कार्यक्रम का संदर्भ भी दिया।

बालिका शिक्षा के क्षेत्र में, 'कन्या केलवणी' और 'शाला प्रवेशोत्सव' जैसे गुजराती अभियानों ने लड़कियों के स्कूल नामांकन को प्रोत्साहित किया। इन्हीं नीतिगत प्राथमिकताओं की झलक बाद में केंद्र सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम में दिखी। इसी प्रकार, गुजरात के 'कौशल्य वर्धन केंद्र' व्यावसायिक प्रशिक्षण की ओर राज्य-स्तरीय कदम थे, जो केंद्र में समर्पित 'कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय' बनने से पहले ही अस्तित्व में आ चुके थे।

खेल और आगे की राह

खेल क्षेत्र में, मोदी ने 2010 में गुजरात में 'खेल महाकुंभ' का आयोजन किया, जिसमें 16 खेलों में 13 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। केंद्र में, 'खेलो इंडिया' ने खेल प्रतिभाओं की पहचान और विकास के लिए राष्ट्रीय मंच का रूप लिया। मोदी ने स्वयं 'खेल महाकुंभ' को वह 'बीज' बताया जो एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन में परिणत हुआ।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मोदी के नेतृत्व की राजनीतिक पुनर्समीक्षा हो रही है; यह विश्लेषण सरकारी दृष्टिकोण से प्रस्तुत है, जबकि इन योजनाओं के स्वतंत्र मूल्यांकन पर बहस जारी है। आने वाले समय में इन राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और परिणामों का व्यापक मूल्यांकन ही मोदी की इस विरासत की असली कसौटी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन योजनाओं के परिणाम एकसमान नहीं रहे: 'आयुष्मान भारत' की पहुँच व्यापक है, पर दावा-अस्वीकृति दर और अस्पताल की गुणवत्ता पर सवाल बने हुए हैं। 'स्वच्छ भारत' के खुले में शौच-मुक्ति के आँकड़ों और ज़मीनी हकीकत के बीच अंतर पर स्वतंत्र शोध सामने आ चुके हैं। असली कसौटी यह है कि क्या 'गुजरात मॉडल' की सफलताएँ — जो एक छोटे, अपेक्षाकृत समृद्ध और एकल-दल शासित राज्य में प्रयोगशाला में परखी गईं — भारत की भाषाई, आर्थिक और प्रशासनिक विविधता में उसी पैमाने पर दोहराई जा सकती हैं। जवाब केवल योजनाओं की घोषणाओं में नहीं, उनके सत्यापन-योग्य परिणामों में मिलेगा।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोदी के 25 साल के सफर में गुजरात की कौन-सी पहलें राष्ट्रीय कार्यक्रम बनीं?
'स्वागत' (शिकायत निवारण) से 'प्रगति', 'ई-ग्राम विश्वग्राम' से 'डिजिटल इंडिया', 'मुख्यमंत्री अमृतम' से 'आयुष्मान भारत', 'ज्योतिग्राम' और 'पानी समितियों' से 'जल जीवन मिशन', 'निर्मल गुजरात' से 'स्वच्छ भारत', 'कन्या केलवणी' से 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ', 'कौशल्य वर्धन केंद्र' से कौशल विकास मंत्रालय, और 'खेल महाकुंभ' से 'खेलो इंडिया' — ये आठ प्रमुख उदाहरण हैं जिनका उल्लेख कैबिनेट प्रस्ताव में किया गया।
'स्वागत' पोर्टल क्या था और इसका राष्ट्रीय संस्करण कौन सा है?
'स्वागत' अप्रैल 2003 में गुजरात में शुरू किया गया प्रौद्योगिकी-आधारित शिकायत निवारण मंच था, जिसने नागरिकों को सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखने का अवसर दिया। इसे 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला। मोदी ने इसे केंद्र में 'प्रगति' मंच — जो बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की समीक्षा करता है — की प्रेरणा बताया।
मोदी के 25 साल के कार्यकाल का यह मूल्यांकन किसने किया?
7 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने एक विशेष प्रस्ताव में मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व-सफर को रेखांकित किया। यह प्रस्ताव सरकारी दृष्टिकोण से प्रस्तुत है और इसमें गुजरात की पहलों तथा राष्ट्रीय कार्यक्रमों के बीच संबंध को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया है।
गुजरात की 'मुख्यमंत्री अमृतम' योजना और 'आयुष्मान भारत' में क्या संबंध है?
गुजरात की 'मुख्यमंत्री अमृतम' (एमए) योजना 2012 में गरीब परिवारों को महँगे उपचार से राहत देने के लिए शुरू की गई थी। 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर लागू 'आयुष्मान भारत-PMJAY' के अनुभव-आधार का यह हिस्सा बनी। बाद में गुजरात ने एमए को 'आयुष्मान भारत' के साथ मिलाकर 'पीएमजेएवाई-एमए' का रूप दिया।
'खेल महाकुंभ' और 'खेलो इंडिया' में क्या संबंध है?
मोदी ने 2010 में गुजरात में 'खेल महाकुंभ' शुरू किया था, जिसमें 16 खेलों में 13 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। केंद्र में सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम खेल प्रतिभाओं की पहचान और विकास का मंच बना। मोदी ने स्वयं 'खेल महाकुंभ' को उस आंदोलन का 'बीज' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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