पीएम स्वनिधि के 6 साल: मोदी ने दी बधाई, 75.5 लाख लाभार्थियों को ₹17,800 करोड़ से अधिक ऋण वितरित
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जून 2026 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के छह वर्ष पूरे होने पर देशभर के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और योजना के लाभार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह योजना 'केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भरोसे, गरिमा और सशक्तिकरण का प्रतीक है।' सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज़्यादा ऋण वितरित किए जा चुके हैं, जिनका कुल मूल्य ₹17,800 करोड़ से अधिक है।
योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
पीएम स्वनिधि योजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी। इसका मूल उद्देश्य शहरी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को साहूकारों की निर्भरता से मुक्त कर संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था। गौरतलब है कि यह योजना बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण देती है — एक ऐसा प्रावधान जो पहले इस वर्ग के लिए लगभग अनुपलब्ध था।
मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े
सरकार के अनुसार, 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इन लाभार्थियों ने मिलकर 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹8.96 लाख करोड़ रहा है। डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए लाभार्थियों को करीब ₹800 करोड़ की कैशबैक और ब्याज सब्सिडी भी प्रदान की गई है। योजना की सफलता को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।
ऋण संरचना और अतिरिक्त लाभ
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक का ऋण दिया जाता है। समय पर चुकाने वालों को ब्याज सब्सिडी और क्रेडिट गारंटी का लाभ मिलता है। दूसरी किस्त सफलतापूर्वक चुकाने वाले विक्रेताओं को ₹30,000 तक की सीमा वाला यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जाता है, साथ ही ₹1,600 तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी उपलब्ध है।
डिजिटल और सामाजिक समावेशन
'स्वनिधि से समृद्धि' कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों और उनके परिवारों को विभिन्न केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसके अलावा वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सहयोग से दिया जाता है। यह योजना अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रही — यह छोटे कारोबारियों के समग्र सशक्तिकरण का माध्यम बन चुकी है।
आगे की राह
योजना को मार्च 2030 तक विस्तार दिए जाने के साथ, सरकार का लक्ष्य और अधिक विक्रेताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ना है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी अनौपचारिक रोज़गार को औपचारिक ढाँचे में लाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।