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पीएम स्वनिधि के 6 साल: मोदी ने दी बधाई, 75.5 लाख लाभार्थियों को ₹17,800 करोड़ से अधिक ऋण वितरित

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पीएम स्वनिधि के 6 साल: मोदी ने दी बधाई, 75.5 लाख लाभार्थियों को ₹17,800 करोड़ से अधिक ऋण वितरित

सारांश

पीएम स्वनिधि के 6 साल — और आँकड़े बड़े हैं: 75.5 लाख लाभार्थी, ₹17,800 करोड़ से अधिक ऋण, और ₹8.96 लाख करोड़ के डिजिटल लेनदेन। साहूकारों की जकड़ से मुक्ति का यह वादा अब मार्च 2030 तक जारी रहेगा।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जून 2026 को पीएम स्वनिधि योजना के 6 वर्ष पूरे होने पर लाभार्थियों को बधाई दी।
अब तक 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज़्यादा ऋण; कुल मूल्य ₹17,800 करोड़ से अधिक।
55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े; 841 करोड़ डिजिटल लेनदेन, मूल्य लगभग ₹8.96 लाख करोड़ ।
डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन के रूप में करीब ₹800 करोड़ की कैशबैक और ब्याज सब्सिडी दी गई।
योजना को मार्च 2030 तक बढ़ाया गया; ऋण सीमा ₹15,000 से ₹50,000 तक चरणबद्ध।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 जून 2026 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के छह वर्ष पूरे होने पर देशभर के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं और योजना के लाभार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह योजना 'केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि भरोसे, गरिमा और सशक्तिकरण का प्रतीक है।' सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अब तक 75.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को 1.12 करोड़ से ज़्यादा ऋण वितरित किए जा चुके हैं, जिनका कुल मूल्य ₹17,800 करोड़ से अधिक है।

योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

पीएम स्वनिधि योजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी। इसका मूल उद्देश्य शहरी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर्स को साहूकारों की निर्भरता से मुक्त कर संस्थागत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था। गौरतलब है कि यह योजना बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण देती है — एक ऐसा प्रावधान जो पहले इस वर्ग के लिए लगभग अनुपलब्ध था।

मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े

सरकार के अनुसार, 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। इन लाभार्थियों ने मिलकर 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग ₹8.96 लाख करोड़ रहा है। डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए लाभार्थियों को करीब ₹800 करोड़ की कैशबैक और ब्याज सब्सिडी भी प्रदान की गई है। योजना की सफलता को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।

ऋण संरचना और अतिरिक्त लाभ

योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक का ऋण दिया जाता है। समय पर चुकाने वालों को ब्याज सब्सिडी और क्रेडिट गारंटी का लाभ मिलता है। दूसरी किस्त सफलतापूर्वक चुकाने वाले विक्रेताओं को ₹30,000 तक की सीमा वाला यूपीआई से जुड़ा रुपे क्रेडिट कार्ड भी दिया जाता है, साथ ही ₹1,600 तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी उपलब्ध है।

डिजिटल और सामाजिक समावेशन

'स्वनिधि से समृद्धि' कार्यक्रम के तहत लाभार्थियों और उनके परिवारों को विभिन्न केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसके अलावा वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सहयोग से दिया जाता है। यह योजना अब केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं रही — यह छोटे कारोबारियों के समग्र सशक्तिकरण का माध्यम बन चुकी है।

आगे की राह

योजना को मार्च 2030 तक विस्तार दिए जाने के साथ, सरकार का लक्ष्य और अधिक विक्रेताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ना है। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी अनौपचारिक रोज़गार को औपचारिक ढाँचे में लाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन ऋणों ने कितने विक्रेताओं की आय में स्थायी वृद्धि की — न कि केवल कितने खाते खुले। ₹8.96 लाख करोड़ के डिजिटल लेनदेन का आँकड़ा बड़ा दिखता है, पर यह मूल्य लेनदेन की संख्या का गुणनफल है, न कि लाभार्थी की औसत आय का प्रमाण। 'स्वनिधि से समृद्धि' जैसे समग्र कार्यक्रम सही दिशा में हैं, परंतु स्वतंत्र मूल्यांकन के बिना यह तय करना कठिन है कि साहूकार-निर्भरता वास्तव में कम हुई या केवल ऋण का स्रोत बदला। मार्च 2030 तक विस्तार के साथ सरकार को पारदर्शी परिणाम-आधारित रिपोर्टिंग भी सुनिश्चित करनी होगी।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और इसे कब शुरू किया गया था?
पीएम स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) योजना वर्ष 2020 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य शहरी रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी के संस्थागत ऋण देकर साहूकारों की निर्भरता से मुक्त करना है।
पीएम स्वनिधि के तहत कितना ऋण मिलता है?
योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक का ऋण दिया जाता है। दूसरी किस्त सफलतापूर्वक चुकाने वाले विक्रेताओं को ₹30,000 तक की सीमा वाला यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड भी मिलता है।
पीएम स्वनिधि योजना कब तक चलेगी?
सरकार ने योजना को मार्च 2030 तक बढ़ा दिया है। पहले यह सीमित अवधि के लिए थी, लेकिन योजना की सफलता को देखते हुए इसे विस्तार दिया गया है।
पीएम स्वनिधि में डिजिटल लेनदेन को कैसे प्रोत्साहित किया जाता है?
लाभार्थियों को ₹1,600 तक का कैशबैक और ब्याज सब्सिडी दी जाती है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार अब तक करीब ₹800 करोड़ की कैशबैक और सब्सिडी वितरित की जा चुकी है, और 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
'स्वनिधि से समृद्धि' कार्यक्रम क्या है?
यह पीएम स्वनिधि का एक विस्तारित घटक है जिसके तहत लाभार्थियों और उनके परिवारों को विभिन्न केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसमें वित्तीय साक्षरता, डिजिटल साक्षरता और FSSAI के सहयोग से खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण भी शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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