पीएम स्वनिधि योजना: 55 लाख से अधिक विक्रेता डिजिटल, ₹8.96 लाख करोड़ के लेनदेन, 2030 तक विस्तार
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है। 30 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इन लाभार्थियों ने सामूहिक रूप से 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनकी कुल राशि ₹8.96 लाख करोड़ रही है। योजना की उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।
योजना की मुख्य उपलब्धियाँ
पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू की गई थी और यह देश की पहली सरकार-समर्थित ऋण गारंटी वाली सूक्ष्म ऋण योजना है जो विशेष रूप से रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर केंद्रित है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, लाभार्थियों को डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और ब्याज सब्सिडी के रूप में लगभग ₹800 करोड़ भी प्राप्त हुए हैं।
गौरतलब है कि योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने इसके माध्यम से पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्राप्त किया — जो भारत की असंगठित अर्थव्यवस्था में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सामाजिक समावेशन और आय में सुधार
आधिकारिक बयान के अनुसार, लाभार्थियों की आय में औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। योजना के 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित समुदायों से आते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी असंगठित क्षेत्र में आर्थिक असमानता को लेकर व्यापक बहस जारी है।
योजना ने बेहतर आवास सुविधा, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुँच को भी मजबूत किया है, जिससे शहरी कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
ऋण संरचना और डिजिटल प्रोत्साहन
यह योजना तीन चरणों में बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराती है — ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 — साथ में ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी सहायता भी दी जाती है। जो विक्रेता दूसरे चरण का ऋण सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे ₹30,000 तक की सीमा वाले यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र हो जाते हैं।
डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को खुदरा और थोक डिजिटल लेनदेन पर ₹1,600 तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है।
आगे की राह
योजना को मार्च 2030 तक विस्तार दिए जाने के साथ, सरकार का लक्ष्य और अधिक विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ना है। यह योजना अब एक देशव्यापी अभियान का रूप ले चुकी है, जो भारत की असंगठित अर्थव्यवस्था में वित्तीय सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और सामाजिक सुरक्षा का आधार बन रही है।