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पीएम स्वनिधि योजना: 55 लाख से अधिक विक्रेता डिजिटल, ₹8.96 लाख करोड़ के लेनदेन, 2030 तक विस्तार

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पीएम स्वनिधि योजना: 55 लाख से अधिक विक्रेता डिजिटल, ₹8.96 लाख करोड़ के लेनदेन, 2030 तक विस्तार

सारांश

पीएम स्वनिधि योजना ने पाँच साल में 55 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा और ₹8.96 लाख करोड़ के लेनदेन का रिकॉर्ड बनाया। 95% लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक ऋण पाया और आय में 20% वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई। योजना अब मार्च 2030 तक जारी रहेगी।

मुख्य बातें

पीएम स्वनिधि योजना के तहत 55 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया।
लाभार्थियों ने 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए, कुल मूल्य ₹8.96 लाख करोड़ ।
डिजिटल कैशबैक और ब्याज सब्सिडी के रूप में लाभार्थियों को लगभग ₹800 करोड़ प्राप्त हुए।
लगभग 95% लाभार्थियों ने पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्राप्त किया; आय में औसतन 20% वार्षिक वृद्धि।
46% लाभार्थी महिलाएँ; लगभग 70% वंचित समुदायों से; योजना मार्च 2030 तक विस्तारित।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा चुका है। 30 मई 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इन लाभार्थियों ने सामूहिक रूप से 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनकी कुल राशि ₹8.96 लाख करोड़ रही है। योजना की उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।

योजना की मुख्य उपलब्धियाँ

पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में शुरू की गई थी और यह देश की पहली सरकार-समर्थित ऋण गारंटी वाली सूक्ष्म ऋण योजना है जो विशेष रूप से रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं पर केंद्रित है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, लाभार्थियों को डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन और ब्याज सब्सिडी के रूप में लगभग ₹800 करोड़ भी प्राप्त हुए हैं।

गौरतलब है कि योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थियों ने इसके माध्यम से पहली बार औपचारिक संस्थागत ऋण प्राप्त किया — जो भारत की असंगठित अर्थव्यवस्था में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सामाजिक समावेशन और आय में सुधार

आधिकारिक बयान के अनुसार, लाभार्थियों की आय में औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। योजना के 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जबकि लगभग 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित समुदायों से आते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी असंगठित क्षेत्र में आर्थिक असमानता को लेकर व्यापक बहस जारी है।

योजना ने बेहतर आवास सुविधा, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक पहुँच को भी मजबूत किया है, जिससे शहरी कमजोर वर्गों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

ऋण संरचना और डिजिटल प्रोत्साहन

यह योजना तीन चरणों में बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराती है — ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 — साथ में ब्याज सब्सिडी और ऋण गारंटी सहायता भी दी जाती है। जो विक्रेता दूसरे चरण का ऋण सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे ₹30,000 तक की सीमा वाले यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र हो जाते हैं।

डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को खुदरा और थोक डिजिटल लेनदेन पर ₹1,600 तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है।

आगे की राह

योजना को मार्च 2030 तक विस्तार दिए जाने के साथ, सरकार का लक्ष्य और अधिक विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ना है। यह योजना अब एक देशव्यापी अभियान का रूप ले चुकी है, जो भारत की असंगठित अर्थव्यवस्था में वित्तीय सशक्तिकरण, डिजिटल समावेशन और सामाजिक सुरक्षा का आधार बन रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह आर्थिक गतिविधि टिकाऊ आय में तब्दील हुई है या केवल कैशबैक-प्रेरित लेनदेन की संख्या बढ़ी है। 20% वार्षिक आय वृद्धि का दावा सरकारी बयान पर आधारित है — स्वतंत्र सत्यापन अभी सार्वजनिक नहीं है। 70% वंचित समुदायों तक पहुँच सामाजिक समावेशन की दृष्टि से उत्साहजनक है, पर 2030 तक विस्तार के साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या ऋण चुकौती दर और दीर्घकालिक वित्तीय स्वायत्तता के आँकड़े भी उतने ही मजबूत हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और यह कब शुरू हुई?
पीएम स्वनिधि यानी प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना जून 2020 में शुरू हुई थी। यह देश की पहली सरकार-समर्थित ऋण गारंटी वाली सूक्ष्म ऋण योजना है जो रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी के ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक का कार्यशील पूंजी ऋण देती है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत अब तक कितने डिजिटल लेनदेन हुए हैं?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 55 लाख से अधिक लाभार्थियों ने मिलकर 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनकी कुल राशि ₹8.96 लाख करोड़ रही है। इसके अलावा लाभार्थियों को कैशबैक और ब्याज सब्सिडी के रूप में लगभग ₹800 करोड़ भी मिले हैं।
पीएम स्वनिधि योजना को कब तक बढ़ाया गया है?
योजना की मजबूत उपलब्धियों को देखते हुए इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है। इससे और अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक वित्तीय तंत्र से जोड़ने का लक्ष्य है।
इस योजना से महिलाओं और वंचित वर्गों को कितना फायदा हुआ है?
आधिकारिक बयान के अनुसार, योजना के लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं और करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित समुदायों से आते हैं। लाभार्थियों की आय में औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।
पीएम स्वनिधि योजना में रुपे क्रेडिट कार्ड और कैशबैक की सुविधा कैसे मिलती है?
जो विक्रेता दूसरे चरण का ऋण सफलतापूर्वक चुका देते हैं, वे ₹30,000 तक की सीमा वाले यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के लिए पात्र हो जाते हैं। इसके अलावा, डिजिटल लेनदेन को प्रोत्साहित करने के लिए खुदरा और थोक लेनदेन पर ₹1,600 तक का कैशबैक भी प्रदान किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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