पीएम स्वनिधि योजना: यूपी में जून अभियान, सीडीओ को मिली जवाबदेही; हजारों स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 1 जून से 30 जून 2025 तक एक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे स्वरोज़गार से जुड़े पात्र लाभार्थियों तक आसान ऋण सुविधा पहुँचाना है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान की निगरानी जिलेवार मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को सौंपी गई है।
अभियान की रूपरेखा और निगरानी तंत्र
ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी ने सभी संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि 'सेंसस टाउन रिपोर्ट' तथा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर पात्र लाभार्थियों की पहचान कर निर्धारित लक्ष्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएँ। प्रत्येक सीडीओ अपने जिले के खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को आवश्यक निर्देश देंगे और अभियान की नियमित समीक्षा करेंगे।
अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय को भेजी जाएगी, ताकि क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता न आए। राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) की अपेक्षाओं के अनुरूप यह अभियान उन सभी पात्र विक्रेताओं को चिह्नित करने पर केंद्रित है जो अब तक योजना के लाभ से वंचित रहे हैं।
कौन से जिले हैं फोकस में
इस विशेष अभियान के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अमेठी, आज़मगढ़, बरेली, गाज़ियाबाद, गोरखपुर, झाँसी, कानपुर नगर, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी, सीतापुर और सुल्तानपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों को लाभार्थियों से सीधा समन्वय स्थापित कर आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
आम जनता पर असर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के ज़रिए जून के अंत तक हज़ारों नए स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे कारोबारियों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। योजना से जुड़ने पर लाभार्थियों को न केवल आसान ऋण सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके व्यवसाय को स्थायित्व और विस्तार देने में भी सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब असंगठित क्षेत्र के छोटे विक्रेता अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भरता के कारण ऊँची ब्याज दरों की मार झेलते रहे हैं।
पीएम स्वनिधि योजना की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख माइक्रो-क्रेडिट पहल है, जिसे कोविड-19 महामारी के बाद स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका पुनर्स्थापित करने के लिए शुरू किया गया था। इस योजना के तहत लाभार्थी ₹10,000 से शुरू होकर क्रमशः ₹20,000 और ₹50,000 तक का ऋण ले सकते हैं। उत्तर प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए यह जून अभियान एक संरचित प्रशासनिक कदम है।
क्या होगा आगे
अभियान के समापन के बाद जिलेवार प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि जून के लक्ष्य पूरे होते हैं, तो राज्य सरकार इसी मॉडल को आगामी महीनों में भी जारी रख सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीडीओ स्तर पर जवाबदेही तय करने से ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन में तेज़ी आएगी।