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पीएम स्वनिधि योजना: यूपी में जून अभियान, सीडीओ को मिली जवाबदेही; हजारों स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा लाभ

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पीएम स्वनिधि योजना: यूपी में जून अभियान, सीडीओ को मिली जवाबदेही; हजारों स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा लाभ

सारांश

उत्तर प्रदेश में पीएम स्वनिधि योजना को नई रफ़्तार देने के लिए जून में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर सीडीओ को जवाबदेही सौंपी गई है और 17 से अधिक जिलों में हज़ारों स्ट्रीट वेंडर्स को आसान ऋण से जोड़ने का लक्ष्य है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 जून से 30 जून 2025 तक पीएम स्वनिधि योजना के तहत प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर अभियान की निगरानी मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को सौंपी गई है।
ग्राम्य विकास आयुक्त जी.एस.
प्रियदर्शी ने सभी जिलों के सीडीओ को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
आगरा, वाराणसी, गोरखपुर, कानपुर नगर, प्रयागराज सहित 17 से अधिक जिलों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
पात्र लाभार्थियों की पहचान 'सेंसस टाउन रिपोर्ट' और विभागीय सूची के आधार पर की जाएगी।
अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय को भेजी जाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत 1 जून से 30 जून 2025 तक एक प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे स्वरोज़गार से जुड़े पात्र लाभार्थियों तक आसान ऋण सुविधा पहुँचाना है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर चलाए जा रहे इस अभियान की निगरानी जिलेवार मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को सौंपी गई है।

अभियान की रूपरेखा और निगरानी तंत्र

ग्राम्य विकास विभाग के आयुक्त जी.एस. प्रियदर्शी ने सभी संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि 'सेंसस टाउन रिपोर्ट' तथा विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर पात्र लाभार्थियों की पहचान कर निर्धारित लक्ष्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएँ। प्रत्येक सीडीओ अपने जिले के खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को आवश्यक निर्देश देंगे और अभियान की नियमित समीक्षा करेंगे।

अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय को भेजी जाएगी, ताकि क्रियान्वयन में किसी प्रकार की शिथिलता न आए। राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा) की अपेक्षाओं के अनुरूप यह अभियान उन सभी पात्र विक्रेताओं को चिह्नित करने पर केंद्रित है जो अब तक योजना के लाभ से वंचित रहे हैं।

कौन से जिले हैं फोकस में

इस विशेष अभियान के अंतर्गत आगरा, अलीगढ़, अमेठी, आज़मगढ़, बरेली, गाज़ियाबाद, गोरखपुर, झाँसी, कानपुर नगर, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी, सीतापुर और सुल्तानपुर सहित प्रदेश के कई जिलों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों को लाभार्थियों से सीधा समन्वय स्थापित कर आवेदन और स्वीकृति प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

आम जनता पर असर

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के ज़रिए जून के अंत तक हज़ारों नए स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे कारोबारियों को पीएम स्वनिधि योजना से जोड़ने का लक्ष्य है। योजना से जुड़ने पर लाभार्थियों को न केवल आसान ऋण सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके व्यवसाय को स्थायित्व और विस्तार देने में भी सहायता मिलेगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब असंगठित क्षेत्र के छोटे विक्रेता अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भरता के कारण ऊँची ब्याज दरों की मार झेलते रहे हैं।

पीएम स्वनिधि योजना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख माइक्रो-क्रेडिट पहल है, जिसे कोविड-19 महामारी के बाद स्ट्रीट वेंडर्स की आजीविका पुनर्स्थापित करने के लिए शुरू किया गया था। इस योजना के तहत लाभार्थी ₹10,000 से शुरू होकर क्रमशः ₹20,000 और ₹50,000 तक का ऋण ले सकते हैं। उत्तर प्रदेश में इस योजना के क्रियान्वयन को और अधिक व्यापक बनाने के लिए यह जून अभियान एक संरचित प्रशासनिक कदम है।

क्या होगा आगे

अभियान के समापन के बाद जिलेवार प्रगति रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि जून के लक्ष्य पूरे होते हैं, तो राज्य सरकार इसी मॉडल को आगामी महीनों में भी जारी रख सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीडीओ स्तर पर जवाबदेही तय करने से ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन में तेज़ी आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि पिछले वर्षों में भी ऐसे अभियान घोषित हुए, पर लक्ष्य और उपलब्धि के बीच की खाई चिंताजनक रही है। 'सेंसस टाउन रिपोर्ट' आधारित पहचान प्रक्रिया तकनीकी रूप से मज़बूत लगती है, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डेटा की सटीकता पर सवाल बने रहते हैं। यह अभियान तब आया है जब असंगठित क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बना हुआ है — ऐसे में केवल आवेदन संख्या नहीं, बल्कि ऋण वितरण और पुनर्भुगतान दर को सफलता का पैमाना बनाना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना का यूपी विशेष अभियान क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 1 जून से 30 जून 2025 तक चलाया जा रहा एक प्रदेशव्यापी अभियान है, जिसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी और छोटे स्वरोज़गार से जुड़े पात्र लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि योजना के तहत आसान ऋण सुविधा से जोड़ना है। अभियान की निगरानी जिलेवार मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) करेंगे।
इस अभियान में सीडीओ की क्या भूमिका है?
मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अपने-अपने जिलों में अभियान की निगरानी करेंगे, खंड विकास अधिकारियों को निर्देश देंगे और नियमित प्रगति रिपोर्ट ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय को भेजेंगे। जिलेवार तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की जवाबदेही उन्हीं पर है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत कितना ऋण मिलता है?
पीएम स्वनिधि योजना के तहत लाभार्थी ₹10,000 से शुरू होकर क्रमशः ₹20,000 और ₹50,000 तक का माइक्रो-क्रेडिट ऋण ले सकते हैं। यह ऋण बिना गारंटी के उपलब्ध कराया जाता है और समय पर चुकाने पर अगले स्तर का ऋण मिलता है।
इस अभियान में किन जिलों को प्राथमिकता दी गई है?
अभियान के तहत आगरा, अलीगढ़, अमेठी, आज़मगढ़, बरेली, गाज़ियाबाद, गोरखपुर, झाँसी, कानपुर नगर, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी, सीतापुर और सुल्तानपुर सहित 17 से अधिक जिलों में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
पात्र लाभार्थियों की पहचान कैसे होगी?
'सेंसस टाउन रिपोर्ट' और विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के आधार पर पात्र स्ट्रीट वेंडर्स की पहचान की जाएगी। विशेष रूप से उन लाभार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो अब तक योजना के लाभ से वंचित रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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