27 अगस्त 2026
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पीएम स्वनिधि पुनर्गठन के एक वर्ष: 21.86 लाख ऋण वितरित, 10.56 लाख नए विक्रेता जुड़े

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पीएम स्वनिधि पुनर्गठन के एक वर्ष: 21.86 लाख ऋण वितरित, 10.56 लाख नए विक्रेता जुड़े

सारांश

पीएम स्वनिधि के पुनर्गठित स्वरूप ने एक वर्ष में ₹6,294 करोड़ के 21.86 लाख ऋण वितरित किए और 10.56 लाख नए विक्रेताओं को जोड़ा। रुपे क्रेडिट कार्ड, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और 50 स्ट्रीट फूड हब के साथ यह योजना अब महज ऋण से आगे, समग्र सशक्तिकरण मिशन बन चुकी है।

मुख्य बातें

पीएम स्वनिधि के पुनर्गठित स्वरूप ने 27 अगस्त 2026 को एक वर्ष पूरा किया; ऋण अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई।
पहले एक वर्ष में 21.86 लाख ऋण वितरित, कुल राशि ₹6,294 करोड़ ; 10.56 लाख नए लाभार्थी जुड़े।
यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के ज़रिए ₹30,000 तक की क्रेडिट सीमा; अब तक 27,077 कार्ड स्वीकृत।
योजना शुरू होने ( जून 2020 ) से अब तक 78.68 लाख विक्रेताओं को ₹19,171 करोड़ से अधिक के 1.18 करोड़ ऋण दिए गए।
देशभर में 50 स्ट्रीट फूड हब विकसित होंगे; प्रत्येक के लिए ₹4 करोड़ तक सहायता।
लोक कल्याण मेलों का अगला चरण 1–30 सितंबर 2026 तक; 51.15 लाख परिवारों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग पूरी।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के पुनर्गठित स्वरूप ने 27 अगस्त 2026 को अपना पहला वर्ष पूरा कर लिया। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, इस एक वर्ष में 21.86 लाख ऋण वितरित किए गए, जिनकी कुल राशि ₹6,294 करोड़ रही, और 10.56 लाख नए लाभार्थी योजना से जुड़े। केंद्र सरकार ने 27 अगस्त 2025 को इस योजना के विस्तारित संस्करण को मंजूरी दी थी, जिसमें ऋण वितरण की अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई थी।

योजना के पुनर्गठन में क्या बदला

पुनर्गठित योजना के तहत देशभर के 1.15 करोड़ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को औपचारिक ऋण, डिजिटल वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अंतर्गत लगभग 50 लाख नए लाभार्थियों को शामिल करने की योजना है। मंत्रालय ने सिटी रीजन एप्रोच अपनाते हुए जनगणना नगरों को भी इस योजना के दायरे में लाया है, जिससे पहले से वंचित विक्रेता अब औपचारिक ऋण तक पहुँच सकते हैं।

डिजिटल सशक्तिकरण और नई सुविधाएँ

पात्र लाभार्थियों के लिए यूपीआई से लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड की सुविधा शुरू की गई है, जिसके ज़रिए विक्रेताओं को ₹30,000 तक की क्रेडिट सीमा उपलब्ध है। अब तक 27,077 क्रेडिट कार्डों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अलावा एंड-टू-एंड डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म (डीएलपी) के माध्यम से आवेदन से लेकर ऋण वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाया गया है। वेंडर माइग्रेशन मॉड्यूल यह सुनिश्चित करता है कि एक शहरी निकाय से दूसरे में स्थानांतरित होने पर विक्रेता के लाभ बाधित न हों।

समग्र उपलब्धियाँ: जून 2020 से अब तक

योजना की शुरुआत जून 2020 में हुई थी। तब से अब तक 78.68 लाख रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 1.18 करोड़ से अधिक ऋण दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि ₹19,171 करोड़ से अधिक है। सरकार ने समय पर ऋण चुकाने को प्रोत्साहित करने के लिए ₹421 करोड़ की ब्याज सब्सिडी जारी की है। 57.09 लाख विक्रेताओं ने ₹908 करोड़ से अधिक के डिजिटल लेनदेन किए हैं, और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ₹418.78 करोड़ की कैशबैक प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है।

स्ट्रीट फूड हब और लोक कल्याण मेले

सरकार ने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की आजीविका और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए देशभर में 50 स्ट्रीट फूड हब (एसएफएच) विकसित करने की योजना बनाई है। प्रत्येक हब के लिए शहरों को ₹4 करोड़ तक की वित्तीय सहायता और वेंडिंग जोन अधिसूचित करने के लिए ₹25 लाख की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। लोक कल्याण मेलों का अगला चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जहाँ विक्रेता, बैंक और शहरी स्थानीय निकाय एक मंच पर आएंगे। इसके अतिरिक्त 6 लाख से अधिक स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता प्रशिक्षण दिया गया है।

आगे की राह

स्वनिधि से समृद्धि पहल के तहत 51.15 लाख से अधिक लाभार्थी परिवारों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइलिंग की जा चुकी है, और पात्र परिवारों को केंद्र सरकार की आठ प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के तहत 1.59 करोड़ से अधिक लाभ स्वीकृत किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि पीएम स्वनिधि अब एक साधारण ऋण योजना से आगे बढ़कर वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला व्यापक मिशन बन चुकी है, जो 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

294 करोड़ का वितरण प्रभावशाली आँकड़े हैं, लेकिन असली कसौटी यह है कि इन ऋणों ने विक्रेताओं की आय और आर्थिक स्थिरता में कितना वास्तविक बदलाव लाया। 27,077 रुपे क्रेडिट कार्ड — 1.15 करोड़ लक्षित विक्रेताओं के मुकाबले — अभी भी बेहद सीमित पहुँच दर्शाते हैं, जो यह सवाल उठाता है कि डिजिटल समावेशन की रफ़्तार पर्याप्त है या नहीं। ₹421 करोड़ की ब्याज सब्सिडी और ₹418.78 करोड़ की कैशबैक राशि बड़े निवेश हैं, पर स्वतंत्र सत्यापन के बिना यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि लाभ वास्तव में सबसे ज़रूरतमंद विक्रेताओं तक पहुँच रहा है या नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन क्या है और इसमें क्या बदला?
केंद्र सरकार ने 27 अगस्त 2025 को पीएम स्वनिधि के विस्तारित और पुनर्गठित संस्करण को मंजूरी दी, जिसमें ऋण वितरण अवधि 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई। इसमें सिटी रीजन एप्रोच, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म, रुपे क्रेडिट कार्ड और वेंडर माइग्रेशन मॉड्यूल जैसी नई सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।
पीएम स्वनिधि के तहत कितना ऋण मिल सकता है?
योजना के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को चरणबद्ध ऋण दिया जाता है। इसके अतिरिक्त पात्र लाभार्थियों को यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड के माध्यम से ₹30,000 तक की क्रेडिट सीमा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पीएम स्वनिधि से अब तक कितने विक्रेताओं को लाभ मिला है?
जून 2020 में योजना शुरू होने के बाद से 78.68 लाख रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 1.18 करोड़ से अधिक ऋण दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि ₹19,171 करोड़ से अधिक है। पुनर्गठन के पहले एक वर्ष में 10.56 लाख नए लाभार्थी जुड़े हैं।
स्ट्रीट फूड हब योजना क्या है और इससे विक्रेताओं को क्या फायदा होगा?
सरकार देशभर में 50 स्ट्रीट फूड हब विकसित करने की योजना बना रही है, जिसके लिए प्रत्येक शहर को ₹4 करोड़ तक की वित्तीय सहायता और वेंडिंग जोन अधिसूचित करने के लिए ₹25 लाख अतिरिक्त दिए जाएंगे। इससे विक्रेताओं को बेहतर बुनियादी सुविधाएँ और व्यवसाय के अनुकूल वातावरण मिलेगा।
लोक कल्याण मेले कब आयोजित होंगे और उनका उद्देश्य क्या है?
लोक कल्याण मेलों का अगला चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इन मेलों में रेहड़ी-पटरी विक्रेता, बैंक और शहरी स्थानीय निकाय एक मंच पर आएंगे, जहाँ लाभार्थियों को ऋण, सामाजिक कल्याण योजनाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की जानकारी व सुविधाएँ दी जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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