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पीएम स्वनिधि योजना के 6 साल: रेहड़ी-पटरी वालों की बदली किस्मत, ₹10,000 के कर्ज से खड़ा किया कारोबार

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पीएम स्वनिधि योजना के 6 साल: रेहड़ी-पटरी वालों की बदली किस्मत, ₹10,000 के कर्ज से खड़ा किया कारोबार

सारांश

₹10,000 के छोटे ऋण ने फरीदाबाद के चोले-भटूरे वाले राजेश और रांची के चाय विक्रेता गोपाल की ज़िंदगी बदल दी। पीएम स्वनिधि योजना के 6 साल पूरे होने पर ये कहानियाँ दिखाती हैं कि सस्ता औपचारिक ऋण असंगठित क्षेत्र को कैसे मुख्यधारा से जोड़ सकता है।

मुख्य बातें

पीएम स्वनिधि योजना के 6 वर्ष पूरे; जून 2020 में कोविड राहत के तौर पर शुरू हुई थी।
फरीदाबाद के राजेश कुमार को ₹10,000 और फिर ₹20,000 का ऋण मिला, जिससे चोले-भटूरे का कारोबार संभला और बढ़ा।
रांची के गोपाल प्रसाद बर्मन ने ऋण से बड़ा चूल्हा व बर्तन खरीदे, चाय के साथ नाश्ते की बिक्री शुरू की।
योजना के तहत ₹10,000 से ₹50,000 तक बिना गारंटी ऋण; समय पर चुकाने पर ब्याज सब्सिडी।
FSSAI वेबिनार के ज़रिए लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता प्रशिक्षण भी मिला।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के छह वर्ष पूर्ण होने पर देशभर के रेहड़ी-पटरी और छोटे कारोबारियों की जीवन-बदलने वाली कहानियाँ सामने आ रही हैं। यह योजना सस्ते ऋण के ज़रिए लाखों असंगठित विक्रेताओं को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बनी है। 1 जून 2025 को इस मील के पत्थर पर, दो लाभार्थियों की कहानियाँ इस योजना के ज़मीनी असर को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती हैं।

फरीदाबाद: चोले-भटूरे के ठेले से आत्मविश्वास तक

हरियाणा के फरीदाबाद निवासी राजेश कुमार वर्षों से चोले-भटूरे का ठेला लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते आए थे। बढ़ती महंगाई और बाज़ार के अनौपचारिक कर्ज के बोझ तले उनका कारोबार लड़खड़ा रहा था। पीएम स्वनिधि योजना के तहत उन्हें पहले ₹10,000 और फिर ₹20,000 का ऋण मिला, जिससे उन्होंने न केवल कारोबार को संभाला बल्कि उसे विस्तार भी दिया।

राजेश कुमार ने बताया, 'योजना अपनाने से पहले कारोबार काफी कमज़ोर था और आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी। बाज़ार से लिया गया कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा था। इस योजना ने केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान किया।'

इसके अलावा भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के वेबिनार के माध्यम से राजेश को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता और गुणवत्तापूर्ण सेवा से जुड़ी जानकारियाँ भी मिलीं। साफ-सफाई और सुरक्षित खाद्य सामग्री के उपयोग से ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ा।

रांची: चाय की रेहड़ी से नाश्ते का कारोबार

झारखंड की राजधानी रांची के निवासी गोपाल प्रसाद बर्मन पहले एक छोटी चाय की रेहड़ी से परिवार का गुजारा करते थे। सीमित आय के कारण घर का खर्च चलाना कठिन था और व्यवसाय के विस्तार के लिए पूँजी नहीं थी। पीएम स्वनिधि योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने इसका लाभ उठाया।

पहले ऋण से उन्होंने बड़ा चूल्हा, अतिरिक्त बर्तन और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी और चाय के साथ नाश्ते की बिक्री भी शुरू की। मेहनत और नियमित बचत से उन्होंने निर्धारित समय में ऋण चुका दिया।

गोपाल प्रसाद बर्मन ने कहा, 'सड़क किनारे कारोबार करने वालों को मौसम और बाज़ार की परिस्थितियों जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बारिश, गर्मी और सर्दी का सीधा असर आमदनी पर पड़ता है। इसके बावजूद पीएम स्वनिधि योजना की मदद से आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और अब पहले की तुलना में बेहतर जीवन जी रहे हैं।'

योजना की पृष्ठभूमि और महत्व

पीएम स्वनिधि योजना जून 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। यह ऐसे समय में आई जब असंगठित क्षेत्र के लाखों विक्रेता बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के आजीविका खो चुके थे। योजना के तहत ₹10,000 से शुरू होकर ₹50,000 तक का ऋण बिना गारंटी के उपलब्ध कराया जाता है, और समय पर चुकाने पर ब्याज सब्सिडी भी मिलती है।

गौरतलब है कि यह योजना डिजिटल लेनदेन को भी प्रोत्साहित करती है — नियमित डिजिटल भुगतान पर लाभार्थियों को अतिरिक्त पुरस्कार राशि दी जाती है, जिससे वे औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ते हैं।

आम जनता और छोटे व्यापारियों पर असर

राजेश और गोपाल जैसे लाखों लाभार्थियों की कहानियाँ बताती हैं कि छोटी पूँजी भी बड़ा बदलाव ला सकती है। यह योजना न केवल ऋण देती है बल्कि प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और स्वच्छता जागरूकता के ज़रिए एक समग्र सहायता ढाँचा भी प्रदान करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, असंगठित क्षेत्र को औपचारिक ऋण तंत्र से जोड़ना दीर्घकालिक आर्थिक समावेश की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

योजना के छह वर्ष पूरे होने पर सरकार इसके विस्तार और अधिक लाभार्थियों तक पहुँच बनाने पर ज़ोर दे रही है, जिससे आने वाले वर्षों में और अधिक छोटे विक्रेता आत्मनिर्भरता की राह पर चल सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि छह साल में कितने लाभार्थी दूसरे और तीसरे ऋण चक्र तक पहुँचे और कितने वापस अनौपचारिक कर्ज के जाल में फँसे — यह डेटा सार्वजनिक रूप से सुलभ नहीं है। योजना का डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन मॉडल सराहनीय है, पर शहरी असंगठित क्षेत्र में स्मार्टफोन और इंटरनेट की पहुँच की असमानता इसके लाभ को सीमित करती है। जब तक ऋण चुकाने की दर, औसत आय वृद्धि और पुनः डिफ़ॉल्ट के आँकड़े पारदर्शी रूप से सामने नहीं आते, व्यक्तिगत सफलता की कहानियाँ नीतिगत सफलता का पूरा पैमाना नहीं बन सकतीं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
पीएम स्वनिधि यानी प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना जून 2020 में कोविड-19 महामारी से प्रभावित रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को राहत देने के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत ₹10,000 से ₹50,000 तक का ऋण बिना गारंटी के दिया जाता है और समय पर चुकाने पर ब्याज सब्सिडी भी मिलती है।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत कितना ऋण मिलता है?
योजना के तहत पहले चरण में ₹10,000, दूसरे चरण में ₹20,000 और तीसरे चरण में ₹50,000 तक का ऋण मिलता है। ऋण चुकाने की नियमितता और डिजिटल लेनदेन के आधार पर अगले चरण का ऋण मिलता है।
फरीदाबाद के राजेश कुमार को योजना से क्या फायदा हुआ?
फरीदाबाद के चोले-भटूरे विक्रेता राजेश कुमार को पहले ₹10,000 और फिर ₹20,000 का ऋण मिला, जिससे उनका कारोबार संभला और आय बढ़ी। FSSAI वेबिनार से मिले खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण ने ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ाया।
रांची के गोपाल प्रसाद बर्मन ने योजना का लाभ कैसे उठाया?
रांची के चाय विक्रेता गोपाल प्रसाद बर्मन ने पीएम स्वनिधि के पहले ऋण से बड़ा चूल्हा, अतिरिक्त बर्तन और सामग्री खरीदी और चाय के साथ नाश्ते की बिक्री शुरू की। नियमित बचत से उन्होंने समय पर ऋण चुकाया और कारोबार को आगे बढ़ाया।
पीएम स्वनिधि योजना से छोटे व्यापारियों को क्या-क्या सुविधाएँ मिलती हैं?
योजना केवल ऋण तक सीमित नहीं है — इसमें FSSAI के माध्यम से खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान प्रोत्साहन और औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जुड़ने का अवसर भी शामिल है। डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त पुरस्कार राशि भी दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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