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पीएम स्वनिधि योजना के 6 साल: करनाल के मंदीप तनेजा बोले — ₹10,000 के लोन ने बदल दी जिंदगी

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पीएम स्वनिधि योजना के 6 साल: करनाल के मंदीप तनेजा बोले — ₹10,000 के लोन ने बदल दी जिंदगी

सारांश

करनाल के मंदीप तनेजा की कहानी सिर्फ एक पिज्जा स्टॉल की नहीं है — यह उस लाखों की आबादी की कहानी है जिनके लिए कोविड काल में ₹10,000 का बिना गारंटी लोन जीवन रेखा बन गया। पीएम स्वनिधि योजना के छह साल पूरे होने पर एक जमीनी सच्चाई।

मुख्य बातें

पीएम स्वनिधि योजना ने जून 2020 में शुरुआत के बाद 6 साल पूरे किए।
करनाल के मंदीप तनेजा को क्रमशः ₹10,000 , ₹20,000 और ₹50,000 की तीन किस्तों में ऋण मिला।
योजना के तहत रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना गारंटी ऋण दिया जाता है।
तनेजा ने लोन से नए उपकरण और स्टॉल की साज-सज्जा की, जिससे ग्राहक और बिक्री दोनों बढ़े।
योजना का लाभ नगर निगम की स्कीम के जरिए दिया गया।

प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने जून 2020 में अपनी शुरुआत के बाद से देशभर के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाई है। हरियाणा के करनाल में नेहरू प्लेस मार्केट में पिज्जा स्टॉल चलाने वाले मंदीप तनेजा इस योजना के उन लाभार्थियों में से एक हैं, जिनके लिए यह महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्थिक पुनर्जीवन का जरिया बनी। तनेजा के अनुसार, बिना गारंटी के मिले ऋण ने उनके रुके हुए कारोबार को फिर से खड़ा किया और परिवार को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।

मुश्किलों में फंसा एक छोटा कारोबार

मंदीप तनेजा करनाल के नेहरू प्लेस मार्केट में किफायती पिज्जा बेचते हैं। यही छोटा स्टॉल उनके पूरे परिवार की आजीविका का आधार है। कोविड-19 महामारी के दौरान सीमित आमदनी और अनिश्चित बिक्री ने उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी — एक तरफ परिवार के खर्चे, दूसरी तरफ कारोबार को जिंदा रखने की जद्दोजहद। तनेजा खुद कहते हैं, 'हम लोग रोज कमाने और रोज खाने वाले लोगों में हैं।'

योजना से कैसे मिली मदद

एक अखबार में पीएम स्वनिधि योजना का विज्ञापन देखने के बाद तनेजा को पता चला कि रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के ₹10,000 तक का ऋण मिल सकता है। उन्होंने तुरंत आवेदन किया और नगर निगम की स्कीम के जरिए पहला लोन प्राप्त किया।

पहली किस्त ₹10,000 से उन्होंने अपने स्टॉल के लिए नए उपकरण खरीदे, जिससे खाद्य सामग्री तैयार करना आसान हुआ और ग्राहक सेवा बेहतर हुई। समय पर ऋण चुकाने के बाद दूसरी किस्त ₹20,000 मिली, जिससे उन्होंने अपने रोजगार को और विस्तार दिया। तीसरी किस्त ₹50,000 का उपयोग उन्होंने स्टॉल की साज-सज्जा और बाहरी स्वरूप को बेहतर बनाने में किया, जिससे ग्राहकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

लाभार्थी की जुबानी

तनेजा ने बताया, 'पैसे की कमी की वजह से आधुनिक मशीनें नहीं खरीद पा रहा था, लोन लेने के बाद काम आसान हो गया।' उनके अनुसार, यदि यह योजना नहीं होती तो कोविड काल में बंद हुआ उनका रोजगार दोबारा शुरू नहीं हो पाता। उन्होंने कहा, 'इस योजना ने लोन के साथ ही जीने का सहारा भी दिया है।'

योजना की व्यापक पृष्ठभूमि

पीएम स्वनिधि योजना केंद्र सरकार ने जून 2020 में कोविड महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को राहत देने के उद्देश्य से शुरू की थी। यह ऐसे समय में आई जब अनौपचारिक क्षेत्र के लाखों कामगार लॉकडाउन की मार से सबसे अधिक प्रभावित थे। गौरतलब है कि योजना ने अपने छह साल पूरे कर लिए हैं और किफायती ऋण तथा सामाजिक सुरक्षा तक पहुँच के जरिए इस वर्ग को सशक्त बनाने का प्रयास जारी है।

आगे की राह

मंदीप तनेजा आज अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए पहले से कहीं अधिक उत्साहित हैं। उनकी कहानी उन हजारों छोटे विक्रेताओं के लिए प्रेरणा है जो अभी भी योजना का लाभ उठाने से वंचित हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि योजना की पहुँच देश के दूरदराज के इलाकों तक कितनी प्रभावी ढंग से हो पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीतिगत नजरिए से यह सवाल भी उठता है कि योजना की पहुँच वास्तव में कितने विक्रेताओं तक हो पाई है और कितने अभी भी जागरूकता के अभाव में वंचित हैं। यह भी गौरतलब है कि व्यक्तिगत सफलता की कहानियाँ योजना की व्यापक प्रभावशीलता का पूरा चित्र नहीं देती — बड़े पैमाने पर ऋण वापसी दर, डिफॉल्ट के आँकड़े और लाभार्थियों की कुल संख्या जैसे तथ्य अभी भी सार्वजनिक विमर्श में कम दिखते हैं। अनौपचारिक क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए एकमुश्त ऋण से आगे बढ़कर कौशल विकास और डिजिटल भुगतान एकीकरण जैसे दीर्घकालिक उपायों की जरूरत पर ध्यान देना जरूरी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है?
पीएम स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की एक माइक्रो-क्रेडिट पहल है, जो जून 2020 में कोविड महामारी के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को राहत देने के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत बिना किसी गारंटी के ₹10,000 से शुरू होकर ₹50,000 तक का ऋण दिया जाता है।
पीएम स्वनिधि योजना में कितनी किस्तों में लोन मिलता है?
योजना के तहत तीन चरणों में ऋण दिया जाता है — पहली किस्त ₹10,000, दूसरी किस्त ₹20,000 और तीसरी किस्त ₹50,000। अगली किस्त तभी मिलती है जब पिछला ऋण समय पर चुका दिया जाए।
करनाल के मंदीप तनेजा ने स्वनिधि योजना से क्या हासिल किया?
करनाल के नेहरू प्लेस मार्केट में पिज्जा स्टॉल चलाने वाले मंदीप तनेजा ने योजना के तहत तीनों किस्तों का लाभ उठाया। उन्होंने पहली किस्त से नए उपकरण खरीदे, दूसरी से कारोबार विस्तार किया और तीसरी से स्टॉल की साज-सज्जा की, जिससे उनकी बिक्री और ग्राहक संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
पीएम स्वनिधि योजना का लाभ कैसे लिया जा सकता है?
रेहड़ी-पटरी विक्रेता नगर निगम या स्थानीय शहरी निकाय के जरिए इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए किसी गारंटी की जरूरत नहीं होती और प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल है।
पीएम स्वनिधि योजना कोविड काल में क्यों जरूरी थी?
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं का रोजगार पूरी तरह ठप हो गया था और उनके पास औपचारिक बैंकिंग सुविधा तक पहुँच नहीं थी। ऐसे में बिना गारंटी का किफायती ऋण इस वर्ग के लिए कारोबार दोबारा शुरू करने का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प बना।
राष्ट्र प्रेस
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