16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम स्वनिधि योजना: 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख लोन, ₹17,800 करोड़ वितरित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम स्वनिधि योजना: 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख लोन, ₹17,800 करोड़ वितरित

सारांश

पीएम स्वनिधि योजना ने 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं तक ₹17,800 करोड़ से ज़्यादा पहुँचाए हैं — जिनमें 46% महिलाएँ और 70% वंचित वर्ग के लोग हैं। कोविड-काल में शुरू हुई यह योजना अब मार्च 2030 तक विस्तारित हो चुकी है।

मुख्य बातें

पीएम स्वनिधि योजना के तहत 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख से ज़्यादा लोन मिल चुके हैं।
देशभर में ₹17,800 करोड़ से अधिक की ऋण राशि वितरित; ब्याज सब्सिडी और कैशबैक के रूप में अतिरिक्त ₹800 करोड़ दिए गए।
लाभार्थियों में लगभग 46% महिलाएँ और करीब 70% वंचित एवं कमज़ोर वर्ग के लोग।
55 लाख से अधिक विक्रेताओं ने ₹8.96 लाख करोड़ मूल्य के 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए।
योजना की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ाई गई; बिना गारंटी के ₹15,000 से ₹50,000 तक चरणबद्ध लोन उपलब्ध।
लगभग 6 लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को FSSAI के सहयोग से खाद्य सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया।

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत देशभर में 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को अब तक 112 लाख से ज़्यादा लोन मिल चुके हैं — यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सामने आई है। कुल ₹17,800 करोड़ से अधिक की ऋण राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में लाभार्थियों को अतिरिक्त ₹800 करोड़ भी दिए गए हैं।

योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इस योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित और कमज़ोर वर्गों से आते हैं। अब तक 55 लाख से अधिक विक्रेताओं ने लगभग ₹8.96 लाख करोड़ मूल्य के 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए हैं — जो असंगठित क्षेत्र में डिजिटल समावेशन की एक उल्लेखनीय छलाँग है।

इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सहयोग से लगभग 6 लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी, ताकि उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जा सके जिनका कारोबार महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। यह रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए देश की पहली विशेष सूक्ष्म ऋण योजना थी।

गौरतलब है कि असंगठित क्षेत्र के इस बड़े वर्ग की औपचारिक ऋण व्यवस्था तक पहुँच ऐतिहासिक रूप से बेहद सीमित रही है। योजना का उद्देश्य इसी खाई को पाटना और वित्तीय समावेशन को मज़बूत करना था।

लोन संरचना और पात्रता

योजना के तहत पात्र विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक के कार्यशील पूंजी लोन चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले विक्रेता अगले चरण में अधिक राशि के लोन के लिए स्वतः पात्र हो जाते हैं।

इसके साथ ही 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी, ऋण गारंटी सहायता और ₹30,000 तक की सीमा वाले UPI-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जाती है। डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,600 तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी उपलब्ध है।

सड़क, फुटपाथ, पगडंडी या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सामान बेचने वाले अथवा सेवाएँ देने वाले सभी विक्रेता — जिनमें सब्ज़ी, फल, खाद्य पदार्थ विक्रेता के साथ-साथ नाई, मोची और कपड़ा धुलाई जैसी सेवाएँ देने वाले लोग भी शामिल हैं — इस योजना के लिए पात्र हैं।

योजना का विस्तार और भविष्य की दिशा

योजना की उपलब्धियों को देखते हुए सरकार ने पीएम स्वनिधि का पुनर्गठन और विस्तार करने को मंज़ूरी दी है। अब ऋण वितरण की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है। यह विस्तार शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस वर्ग के लिए दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धता का संकेत देता है।

योजना ने सूक्ष्म उद्यमों, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं और शहरी स्थानीय निकायों के साथ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के एकीकरण को भी मज़बूत किया है — जो आने वाले वर्षों में शहरी आजीविका नीति की बुनियाद बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या ये लोन वास्तव में आजीविका में टिकाऊ बदलाव ला रहे हैं या महज़ ऋण चक्र को औपचारिक रूप दे रहे हैं। 112 लाख लोन बनाम 75.5 लाख लाभार्थियों का अनुपात दर्शाता है कि अनेक विक्रेताओं ने एक से अधिक बार लोन लिया — जो पुनर्भुगतान क्षमता के लिहाज़ से सकारात्मक संकेत है, पर इसकी स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है। ₹8.96 लाख करोड़ के डिजिटल लेन-देन का दावा उल्लेखनीय है, किंतु इसमें लेन-देन की संख्या और औसत मूल्य का विश्लेषण यह तय करेगा कि डिजिटल समावेशन सतही है या गहरा। मार्च 2030 तक का विस्तार नीतिगत निरंतरता का संकेत देता है, लेकिन बिना मज़बूत आउटकम-मापन ढाँचे के यह विस्तार केवल संख्याओं की दौड़ बन सकता है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और इसकी शुरुआत कब हुई?
पीएम स्वनिधि (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि) रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए देश की पहली विशेष सूक्ष्म ऋण योजना है, जिसे कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के विक्रेताओं को बिना गारंटी के किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना और वित्तीय समावेशन को मज़बूत करना है।
पीएम स्वनिधि के तहत कितना लोन मिलता है?
योजना के तहत पात्र विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के चरणबद्ध तरीके से ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक के कार्यशील पूंजी लोन मिलते हैं। समय पर चुकाने पर अगले चरण में अधिक राशि के लोन के लिए पात्रता मिलती है और 7% वार्षिक ब्याज सब्सिडी भी दी जाती है।
पीएम स्वनिधि योजना के लिए कौन पात्र है?
सड़क, फुटपाथ, पगडंडी या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सामान बेचने वाले या सेवाएँ देने वाले सभी विक्रेता पात्र हैं। इनमें सब्ज़ी, फल, खाद्य पदार्थ विक्रेता के साथ-साथ नाई, मोची और कपड़ा धुलाई जैसी सेवाएँ देने वाले लोग भी शामिल हैं।
पीएम स्वनिधि योजना कब तक चलेगी?
सरकार ने योजना का पुनर्गठन और विस्तार करते हुए ऋण वितरण की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी है। यह विस्तार योजना की उपलब्धियों और इसके सकारात्मक प्रभाव को देखते हुए मंज़ूर किया गया है।
पीएम स्वनिधि में महिलाओं और वंचित वर्गों की भागीदारी कितनी है?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित और कमज़ोर वर्गों से आते हैं। यह आँकड़ा योजना के सामाजिक समावेशन के उद्देश्य को रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले