पीएम स्वनिधि योजना: 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख लोन, ₹17,800 करोड़ वितरित
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत देशभर में 75.5 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को अब तक 112 लाख से ज़्यादा लोन मिल चुके हैं — यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में सामने आई है। कुल ₹17,800 करोड़ से अधिक की ऋण राशि वितरित की जा चुकी है, जबकि ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में लाभार्थियों को अतिरिक्त ₹800 करोड़ भी दिए गए हैं।
योजना की प्रमुख उपलब्धियाँ
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, इस योजना के लाभार्थियों में लगभग 46 प्रतिशत महिलाएँ हैं, जबकि करीब 70 प्रतिशत लाभार्थी वंचित और कमज़ोर वर्गों से आते हैं। अब तक 55 लाख से अधिक विक्रेताओं ने लगभग ₹8.96 लाख करोड़ मूल्य के 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेन-देन किए हैं — जो असंगठित क्षेत्र में डिजिटल समावेशन की एक उल्लेखनीय छलाँग है।
इसके अलावा, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सहयोग से लगभग 6 लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता मानकों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
योजना की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान की गई थी, ताकि उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जा सके जिनका कारोबार महामारी से गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। यह रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए देश की पहली विशेष सूक्ष्म ऋण योजना थी।
गौरतलब है कि असंगठित क्षेत्र के इस बड़े वर्ग की औपचारिक ऋण व्यवस्था तक पहुँच ऐतिहासिक रूप से बेहद सीमित रही है। योजना का उद्देश्य इसी खाई को पाटना और वित्तीय समावेशन को मज़बूत करना था।
लोन संरचना और पात्रता
योजना के तहत पात्र विक्रेताओं को बिना किसी गारंटी के ₹15,000, ₹25,000 और ₹50,000 तक के कार्यशील पूंजी लोन चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराए जाते हैं। समय पर ऋण चुकाने वाले विक्रेता अगले चरण में अधिक राशि के लोन के लिए स्वतः पात्र हो जाते हैं।
इसके साथ ही 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी, ऋण गारंटी सहायता और ₹30,000 तक की सीमा वाले UPI-लिंक्ड RuPay क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जाती है। डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने के लिए ₹1,600 तक का कैशबैक प्रोत्साहन भी उपलब्ध है।
सड़क, फुटपाथ, पगडंडी या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर सामान बेचने वाले अथवा सेवाएँ देने वाले सभी विक्रेता — जिनमें सब्ज़ी, फल, खाद्य पदार्थ विक्रेता के साथ-साथ नाई, मोची और कपड़ा धुलाई जैसी सेवाएँ देने वाले लोग भी शामिल हैं — इस योजना के लिए पात्र हैं।
योजना का विस्तार और भविष्य की दिशा
योजना की उपलब्धियों को देखते हुए सरकार ने पीएम स्वनिधि का पुनर्गठन और विस्तार करने को मंज़ूरी दी है। अब ऋण वितरण की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ा दी गई है। यह विस्तार शहरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस वर्ग के लिए दीर्घकालिक नीतिगत प्रतिबद्धता का संकेत देता है।
योजना ने सूक्ष्म उद्यमों, स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं और शहरी स्थानीय निकायों के साथ रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के एकीकरण को भी मज़बूत किया है — जो आने वाले वर्षों में शहरी आजीविका नीति की बुनियाद बन सकता है।