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पीएम स्वनिधि योजना से 75.5 लाख स्ट्रीट वेंडर्स सशक्त, ₹17,800 करोड़ से अधिक वितरित: मनोहर लाल

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पीएम स्वनिधि योजना से 75.5 लाख स्ट्रीट वेंडर्स सशक्त, ₹17,800 करोड़ से अधिक वितरित: मनोहर लाल

सारांश

पीएम स्वनिधि योजना के छह साल पूरे होने पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को लाभ मिला है और ₹17,800 करोड़ से अधिक वितरित हो चुके हैं। यह योजना कोविड-प्रभावित छोटे विक्रेताओं को औपचारिक बैंकिंग से जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बन गई है।

मुख्य बातें

पीएम स्वनिधि योजना के तहत देशभर में 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को लाभ मिला है।
अब तक 1.12 करोड़ से अधिक बिना गारंटी के ऋण स्वीकृत; ₹17,800 करोड़ से अधिक वितरित।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में 2.59 लाख से अधिक ऋण और ₹430 करोड़ की वित्तीय सहायता।
त्रिपुरा में 9,300 से अधिक ऋण स्वीकृत, लगभग ₹15 करोड़ लाभार्थियों को दिए गए।
योजना ने लाखों वेंडरों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा।
योजना 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शहरी छोटे व्यवसायियों की मदद के लिए शुरू की गई थी।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने रविवार, 31 मई 2026 को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में शुरू की गई पीएम स्वनिधि योजना देशभर में स्ट्रीट वेंडरों को सम्मान, वित्तीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। उन्होंने बताया कि अब तक 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को इस योजना का लाभ मिल चुका है और ₹17,800 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।

योजना का उद्देश्य और दायरा

मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि इस योजना का मकसद महज बिना गारंटी के ऋण देना नहीं है। उनके अनुसार, 'इस योजना का उद्देश्य केवल बिना गारंटी के लोन उपलब्ध कराना ही नहीं था, बल्कि स्ट्रीट वेंडरों को गरिमा, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा एवं सामाजिक मान्यता के साथ जीवन में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना भी था।'

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने स्ट्रीट वेंडरों की कड़ी मेहनत, संघर्ष और समाज में उनके योगदान को मान्यता देते हुए यह योजना शुरू की थी। पीएम स्वनिधि को मूल रूप से कोविड-19 महामारी से प्रभावित छोटे व्यवसायियों को किफायती कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराने के लिए लॉन्च किया गया था।

मुख्य आँकड़े और उपलब्धियाँ

मंत्री ने बताया कि पिछले छह वर्षों में इस योजना के तहत 1.12 करोड़ से अधिक बिना गारंटी वाले ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। यह आँकड़ा दर्शाता है कि योजना केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी स्तर पर इसका व्यापक असर पड़ा है। गौरतलब है कि ₹17,800 करोड़ से अधिक की राशि का वितरण इसे शहरी गरीबों के लिए अब तक की सबसे बड़ी ऋण-आधारित पहलों में से एक बनाता है।

पूर्वोत्तर और त्रिपुरा में योजना का प्रभाव

पूर्वोत्तर क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए मनोहर लाल ने बताया कि इस क्षेत्र में 2.59 लाख से अधिक ऋण वितरित किए गए हैं और ₹430 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

त्रिपुरा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य में 9,300 से अधिक ऋण स्वीकृत हो चुके हैं और लाभार्थियों को लगभग ₹15 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर राज्यों में वित्तीय समावेशन की गति अन्य क्षेत्रों की तुलना में ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है।

वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा कदम

मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस योजना ने लाखों स्ट्रीट वेंडरों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के माध्यम से लाखों लोग पहली बार बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं और औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन गए हैं, जिससे वित्तीय समावेशन और आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त हुआ है।'

यह पहलू इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि असंगठित क्षेत्र के अधिकांश विक्रेता पहले साहूकारों पर निर्भर थे, जो ऊँची ब्याज दरों पर ऋण देते थे। औपचारिक बैंकिंग से जुड़ाव न केवल उनकी वित्तीय लागत कम करता है, बल्कि क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में भी सहायक है।

आगे की राह

केंद्रीय मंत्री के बयान से संकेत मिलता है कि सरकार इस योजना के विस्तार और गहराई दोनों पर ध्यान दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऋण लेने वाले वेंडर समय पर पुनर्भुगतान कर पाते हैं या नहीं, और क्या वे उच्च ऋण सीमाओं का लाभ उठाने में सक्षम हो पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन ऋणों का पुनर्भुगतान दर क्या है और कितने वेंडर दूसरी या तीसरी बार उच्च ऋण सीमा तक पहुँच पाए हैं — जो वास्तविक आर्थिक उन्नति का संकेतक होगा। यह योजना वित्तीय समावेशन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, परंतु असंगठित क्षेत्र में टिकाऊ आजीविका सुनिश्चित करने के लिए ऋण से आगे — कौशल विकास, बाज़ार तक पहुँच और सामाजिक सुरक्षा — की भी ज़रूरत है। पूर्वोत्तर और त्रिपुरा के आँकड़े राष्ट्रीय औसत से काफी कम हैं, जो यह सवाल उठाते हैं कि क्या दूरदराज़ के इलाकों में योजना का क्रियान्वयन समान रूप से हो पा रहा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम स्वनिधि योजना क्या है और इसे कब शुरू किया गया?
पीएम स्वनिधि योजना 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई एक केंद्रीय योजना है, जिसका उद्देश्य स्ट्रीट वेंडरों को बिना गारंटी के किफायती कार्यशील पूंजी ऋण देना और उन्हें औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना है। यह शहरी गरीबों की आजीविका को मज़बूत करने और उन्हें सामाजिक मान्यता दिलाने का भी प्रयास करती है।
पीएम स्वनिधि योजना से अब तक कितने लोगों को लाभ मिला है?
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के अनुसार, अब तक देशभर में 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। 1.12 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत हुए हैं और ₹17,800 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
पूर्वोत्तर भारत और त्रिपुरा में पीएम स्वनिधि का क्या असर रहा है?
पूर्वोत्तर क्षेत्र में 2.59 लाख से अधिक ऋण वितरित किए गए हैं और ₹430 करोड़ से अधिक की सहायता दी गई है। त्रिपुरा में विशेष रूप से 9,300 से अधिक ऋण स्वीकृत हुए हैं और लाभार्थियों को लगभग ₹15 करोड़ दिए गए हैं।
पीएम स्वनिधि योजना वित्तीय समावेशन में कैसे मदद करती है?
यह योजना उन स्ट्रीट वेंडरों को पहली बार बैंकिंग प्रणाली से जोड़ती है जो पहले साहूकारों पर निर्भर थे। औपचारिक ऋण लेने से उनकी क्रेडिट हिस्ट्री बनती है, जिससे वे भविष्य में बड़े ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं के पात्र बन सकते हैं।
पीएम स्वनिधि योजना के तहत कितना ऋण मिलता है?
यह योजना बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण प्रदान करती है। समय पर पुनर्भुगतान करने पर लाभार्थी उच्च ऋण सीमा के लिए भी पात्र हो सकते हैं, जिससे उनके व्यवसाय का क्रमिक विस्तार संभव होता है।
राष्ट्र प्रेस
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