भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से रवाना, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 18 जुलाई 2025 को हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ऐतिहासिक कदम के साथ भारत, जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो स्वच्छ रेल परिवहन के लिए हाइड्रोजन तकनीक को अपना रहे हैं। जींद-सोनीपत रेल खंड को इस पायलट परियोजना के लिए चुना गया है, जो भारतीय रेलवे के नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है।
पायलट रूट और बुनियादी ढाँचा
जींद-सोनीपत रेल खंड को इस ऑपरेशन के लिए पायलट रूट के रूप में चुना गया है। जींद में स्वदेशी तकनीक से एक हाइड्रोजन स्टोरेज और रीफ्यूलिंग सुविधा विकसित की गई है। पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (PESO) ने साइट पर कंप्रेस्ड हाइड्रोजन गैस के भंडारण और वितरण के लिए आवश्यक लाइसेंस प्रदान कर दिया है। रीफ्यूलिंग के लिए एक हाइड्रोजन कंप्रेशन सिस्टम स्थापित किया गया है, और निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक स्टैंडबाय कंप्रेसर यूनिट भी तैयार की जा रही है।
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक कैसे काम करती है
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक एक रासायनिक अभिक्रिया के ज़रिए हाइड्रोजन से बिजली उत्पन्न करती है, जिसमें उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। यह जीवाश्म ईंधन-आधारित प्रणालियों का एक पूर्णतः स्वच्छ विकल्प है। सरकारी बयान के अनुसार, यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और विश्व स्तर पर बहुत कम देश ऐसी प्रणालियाँ संचालित कर रहे हैं या उनका परीक्षण कर रहे हैं।
भारतीय रेलवे के हरित लक्ष्यों से जुड़ाव
यह परियोजना भारतीय रेलवे की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा गया है। गौरतलब है कि भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है और इसके ऊर्जा उपभोग का एक बड़ा हिस्सा अभी भी डीज़ल पर निर्भर है। हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन उन रूटों पर विकल्प खोल सकता है जहाँ विद्युतीकरण व्यावहारिक या किफायती नहीं है।
टीकमगढ़ स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन
इसी अवसर पर, प्रधानमंत्री मोदी ने केंद्र की अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकसित टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन (मध्य प्रदेश) का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। मध्य प्रदेश सरकार के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव टीकमगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
आगे की राह
हाइड्रोजन ट्रेन का यह पायलट प्रयोग भविष्य में इस तकनीक के विस्तार की दिशा तय करेगा। यदि जींद-सोनीपत खंड पर परिणाम सकारात्मक रहे, तो भारतीय रेलवे अन्य गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर भी इस मॉडल को लागू करने पर विचार कर सकता है। स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भर तकनीक के संगम से बनी यह परियोजना भारत के हरित परिवहन भविष्य की झलक दिखाती है।