ट्रंप प्रशासन का वामपंथी समूहों पर वीजा प्रतिबंध, रुबियो ने 60 देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक में की घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने 17 जुलाई को 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की मंत्रिस्तरीय बैठक में ट्रंप प्रशासन की नई वीजा प्रतिबंध नीति की घोषणा की, जिसके तहत उन विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी जिन पर वामपंथी आतंकवादी संगठनों या उनसे जुड़े समूहों का समर्थन करने का आरोप है। यह कार्रवाई इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 212(ए)(3)(सी) के तहत की जा रही है और ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति को और कड़ा करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
नई नीति में क्या है
अमेरिकी विदेश विभाग के बयान के अनुसार, नई नीति के दायरे में वे विदेशी नागरिक आएंगे जिन्होंने आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन किया हो या उन्हें उकसाया हो, हिंसक आपराधिक गतिविधियों में सहयोग दिया हो, अथवा प्रशासन द्वारा वामपंथी आतंकवादी करार दिए गए समूहों को वित्तपोषण, भर्ती या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई हो। इसके अलावा हिंसक उद्देश्यों के लिए ऐसे नेटवर्कों के समन्वय में सहायता करने वाले भी इस प्रतिबंध के दायरे में होंगे।
रुबियो ने स्पष्ट किया कि आतंकवादी, हिंसक और आपराधिक वामपंथी नेटवर्कों को किसी भी प्रकार की सहायता देने वाले विदेशी नागरिकों को अमेरिकी धरती पर कदम रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस नीति से उन वीजा मार्गों को बंद किया जाएगा जिनका उपयोग ऐसे संगठन अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने और आर्थिक स्थिरता को कमज़ोर करने के लिए कर सकते हैं।
मंत्रिस्तरीय बैठक और वैश्विक समन्वय
बैठक में पश्चिम गोलार्ध, यूरोप और एशिया की सरकारें एक मंच पर आईं। बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक आतंकवाद के दोबारा उभरते खतरे से निपटने के लिए सूचना साझाकरण, आतंकवादियों की यात्रा पर रोक और सीमा-पार चरमपंथी नेटवर्कों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन सहयोग को मज़बूत करना बताया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए रुबियो ने कहा, 'लंबे समय तक हमारी आतंकवाद-रोधी रणनीति में एक बड़ी कमी रही है, क्योंकि राजनीतिक वामपंथ से प्रेरित कट्टर हिंसा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। हमें इस खतरे को पहचानना होगा और इससे निपटने के लिए अपने आतंकवाद-रोधी ढाँचे को मज़बूत करना होगा।'
चार समूह पहले ही घोषित, और नाम आएंगे
रुबियो ने बताया कि अमेरिका पहले ही चार हिंसक कट्टर वामपंथी समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है और उनकी फंडिंग में बाधा डालने वाली जानकारी के लिए 10 मिलियन डॉलर तक के 'रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस' की घोषणा की है। उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही और भी समूहों के नाम घोषित किए जाएंगे।
गौरतलब है कि व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति ज्ञापन-7 के तहत पहली बार सभी अमेरिकी कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को राजनीतिक आतंकवाद को रोकने, पहचानने, उसकी फंडिंग काटने और दोषियों पर मुकदमा चलाने के लिए एकजुट होकर काम करने का निर्देश दिया गया है।
वित्तीय प्रतिबंध और कार्रवाई का आधार
अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वित्त मंत्रालय राजनीतिक आतंकवाद का समर्थन करने वाले वित्तीय नेटवर्कों को निशाना बनाने के लिए वित्तीय प्रतिबंधों और एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग उपायों का उपयोग करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं, बल्कि संदिग्ध और आपराधिक गतिविधियों के आधार पर की जाएगी।
अमेरिकी विदेश विभाग की फैक्ट शीट के अनुसार, प्रशासन का मानना है कि अमेरिका में अन्य वैचारिक श्रेणियों की तुलना में अति-वामपंथी सरकार-विरोधी आतंकवाद से जुड़े हमलों और साजिशों की संख्या अधिक रही है।
आगे क्या होगा
यह पहल ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें आव्रजन प्रवर्तन, कानून प्रवर्तन सहयोग और वित्तीय उपायों के ज़रिए राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा से निपटने पर ज़ोर दिया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि 'वामपंथी आतंकवाद' की परिभाषा अस्पष्ट है और इसके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वाशिंगटन के अनुसार, साझेदार सरकारों के साथ खुफिया सूचना साझाकरण और सीमा-पार चरमपंथी नेटवर्क की फंडिंग रोकने की दिशा में काम तेज़ किया जाएगा।