27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मार्को रुबियो का भारत की आर्थिक स्थिरता पर बयान सराहनीय: पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मार्को रुबियो का भारत की आर्थिक स्थिरता पर बयान सराहनीय: पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद

सारांश

पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत की आर्थिक स्थिरता पर दिए बयान को सराहनीय बताया, साथ ही ट्रंप कार्यकाल में बिगड़े भारत-अमेरिका संबंधों को सुधारने के लिए व्यापार समझौते और वीजा नीति में बदलाव की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत की आर्थिक स्थिरता पर दिए बयान को स्वागतयोग्य बताया।
वैद के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए और चाइल्ड लेबर जैसे मुद्दों पर भारत को विशेष रूप से निशाना बनाया।
जी-7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप मुलाकात को सकारात्मक बताया, लेकिन व्यापार व वीजा नीति में ठोस बदलाव की माँग की।
भारत ने UAE, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया से व्यापार समझौते किए, परंतु अमेरिका के साथ अब तक कोई समझौता नहीं।
बी-1 वीजा से जुड़े विवादास्पद प्रावधानों को अमेरिकी अदालत ने निरस्त किया, जिससे भारतीय पेशेवरों को राहत मिली।
वैद ने भारत-अमेरिका-वेनेजुएला के बीच कच्चे तेल के क्षेत्र में पारस्परिक लाभ के मॉडल की संभावना जताई।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व पुलिस महानिदेशक शेष पॉल वैद ने 27 जून 2025 को भारत-अमेरिका संबंधों पर अपना स्पष्ट मत व्यक्त करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भूमिका को मान्यता देना एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम है। वैद के अनुसार, यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।

भारत की आर्थिक स्थिरता: वैद का आकलन

वैद ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद भारत महंगाई को नियंत्रण में रखने और आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़ने देने में सफल रहा है। उन्होंने इसका श्रेय केंद्र सरकार की नीतियों को दिया। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उथल-पुथल के बावजूद भारत की आर्थिक गति अपेक्षाकृत स्थिर रही है।

भारत-अमेरिका संबंधों में खटास के कारण

पूर्व डीजीपी ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा। उनके अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए और चाइल्ड लेबर जैसे मुद्दों के आधार पर भारत को विशेष रूप से निशाना बनाया, जबकि वैद का मानना है कि ऐसे नियम सभी देशों पर समान रूप से लागू होने चाहिए थे। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को समर्थन देने की नीति ने भी भारत में चिंताएँ उत्पन्न कीं।

वैद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पूरे दौर में धैर्य का परिचय दिया, परंतु आम भारतीयों के मन में अमेरिका को लेकर संदेह की भावना पैदा हुई है।

जी-7 मुलाकात और आगे की राह

जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात को वैद ने सकारात्मक बताया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच संवाद की नई शुरुआत हुई है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल मुलाकातों से काम नहीं चलेगा — अमेरिका को व्यापार और वीजा नीति में भी व्यावहारिक लचीलापन दिखाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि अगले वर्ष राष्ट्रपति ट्रंप भारत आते हैं, तो उससे पहले अमेरिका को ठोस सकारात्मक कदम उठाने होंगे।

व्यापार समझौते और वीजा नीति पर चिंता

वैद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत ने संयुक्त अरब अमीरात, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, लेकिन अमेरिका के साथ अब तक कोई द्विपक्षीय व्यापार समझौता नहीं हो सका। उनका मानना है कि अमेरिका को भारत की चिंताओं को समझते हुए जल्द सहमति बनानी चाहिए।

बी-1 वीजा से जुड़े कुछ प्रस्तावों के कारण भारतीय पेशेवरों को निशाना बनाए जाने की भावना बनी थी। हालाँकि, अमेरिकी अदालत ने ऐसे कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया, जिससे राहत मिली। वैद ने कहा कि भारतीय पेशेवर अपनी योग्यता और कानून के पालन के लिए विश्व भर में जाने जाते हैं और उन्हें अलग से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

ऊर्जा सहयोग की संभावनाएँ

वैद ने वेनेजुएला के साथ ऊर्जा सहयोग की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत की रिफाइनिंग क्षमता को देखते हुए अमेरिका, भारत और वेनेजुएला मिलकर कच्चे तेल के क्षेत्र में पारस्परिक लाभ का एक व्यावहारिक मॉडल विकसित कर सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में दोनों लोकतांत्रिक देशों के संबंध और अधिक मज़बूत होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कूटनीतिक मिठास से परे जाकर व्यापार और वीजा जैसे ठोस मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है। हालाँकि, यह ध्यान देने योग्य है कि रुबियो का बयान व्यापार वार्ता में किसी ठोस रियायत की घोषणा नहीं है — यह कूटनीतिक स्वर में बदलाव भर है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वर्षों से बातचीत चल रही है और अब तक कोई परिणाम नहीं निकला; केवल सकारात्मक बयानों से यह गतिरोध नहीं टूटेगा। असली कसौटी यह होगी कि ट्रंप की संभावित भारत यात्रा से पहले अमेरिका टैरिफ और वीजा नीति पर कितना व्यावहारिक लचीलापन दिखाता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने भारत की आर्थिक स्थिरता पर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक भूमिका की सराहना की, जिसे पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने स्वागतयोग्य बताया। हालाँकि, वैद ने स्पष्ट किया कि सकारात्मक बयानों के साथ-साथ व्यापार और वीजा नीति में ठोस बदलाव भी ज़रूरी हैं।
ट्रंप कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध क्यों तनावपूर्ण रहे?
वैद के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए और चाइल्ड लेबर जैसे मुद्दों पर भारत को विशेष रूप से निशाना बनाया। इसके अलावा, अमेरिका द्वारा पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को समर्थन देने की नीति ने भी भारत में चिंताएँ बढ़ाईं।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता क्यों नहीं हो पाया?
वैद के अनुसार, भारत ने UAE, जापान, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं, लेकिन अमेरिका के साथ अब तक सहमति नहीं बन पाई। उनका मानना है कि अमेरिका को भारत की चिंताओं को समझते हुए जल्द इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बी-1 वीजा विवाद में भारतीय पेशेवरों को क्या राहत मिली?
बी-1 वीजा से जुड़े कुछ प्रावधानों के कारण भारतीय पेशेवरों को निशाना बनाए जाने की भावना बनी थी, लेकिन अमेरिकी अदालत ने ऐसे कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया। वैद ने कहा कि भारतीय पेशेवर अपनी योग्यता और कानून-पालन के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन्हें अलग से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
वेनेजुएला के साथ ऊर्जा सहयोग में भारत की क्या भूमिका हो सकती है?
वैद के अनुसार, भारत की मज़बूत रिफाइनिंग क्षमता को देखते हुए अमेरिका, भारत और वेनेजुएला मिलकर कच्चे तेल के क्षेत्र में पारस्परिक लाभ का एक व्यावहारिक मॉडल विकसित कर सकते हैं। यह तीनों देशों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 6 महीने पहले