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मार्को रुबियो का भारत दौरे पर बड़ा बयान: भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी किसी तीसरे देश से संबंध की कीमत पर नहीं

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मार्को रुबियो का भारत दौरे पर बड़ा बयान: भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी किसी तीसरे देश से संबंध की कीमत पर नहीं

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली दौरे पर साफ कहा — भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी किसी तीसरे देश से संबंध की कीमत पर नहीं होगी। पाकिस्तान की बढ़ती अमेरिकी भूमिका और ईरान संकट के बीच यह बयान भारत के लिए एक महत्त्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली दौरे पर कहा कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी किसी अन्य देश से संबंध की कीमत पर नहीं होगी।
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
रुबियो के अनुसार अमेरिका ने ईरान की नौसेना नष्ट करने, बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता घटाने और रक्षा औद्योगिक ढाँचे को नुकसान पहुँचाने के लक्ष्य हासिल कर लिए हैं।
रुबियो ने ईरान पर हिज्बुल्लाह सहित प्रॉक्सी समूहों के ज़रिए वैश्विक आतंकवाद को वित्तपोषित करने का आरोप लगाया।
रुबियो के बयान को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली दौरे के दौरान स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी किसी भी अन्य देश के साथ वाशिंगटन के संबंधों की कीमत पर नहीं आएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच नज़दीकियाँ बढ़ी हैं और पाकिस्तान अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

रुबियो का भारत को स्पष्ट संदेश

भारत-अमेरिका संबंधों पर बोलते हुए रुबियो ने कहा, 'जहाँ तक दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों का सवाल है, हम दुनियाभर के देशों के साथ अलग-अलग स्तरों पर सहयोग करते हैं और विभिन्न तरीकों से काम करते हैं। भारत भी यही करता है। जिम्मेदार देश इसी तरह अपने संबंध आगे बढ़ाते हैं, लेकिन मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ हमारे संबंधों को भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता।' यह बयान भारत की उस चिंता को सीधे संबोधित करता है जो पाकिस्तान के साथ अमेरिकी संपर्क को लेकर नई दिल्ली में चर्चा का विषय बनी हुई थी।

ईरान पर अमेरिकी सैन्य अभियान के लक्ष्य

रुबियो ने ईरान के विरुद्ध चल रहे अमेरिकी अभियान पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि अभियान के लक्ष्य पहले से तय और स्पष्ट थे। उनके अनुसार, अमेरिका ने ईरान की नौसेना को नष्ट करने, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल दागने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से कम करने और उसके रक्षा औद्योगिक ढाँचे को नुकसान पहुँचाने के लक्ष्य निर्धारित किए थे — और कथित तौर पर ये तीनों लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं। रुबियो ने यह भी स्पष्ट किया कि सैन्य रणनीति पर विस्तृत टिप्पणी उनके विभाग के दायरे में नहीं आती।

ईरान पर आतंकवाद प्रायोजन के गंभीर आरोप

रुबियो ने ईरान पर वैश्विक आतंकवाद को वित्तपोषित करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने हिज्बुल्लाह प्रॉक्सी के ज़रिए अर्जेंटीना में एक यहूदी सांस्कृतिक केंद्र पर हमला कराया था जिसमें कई लोगों की जान गई। इसके अलावा, ईरान ने सड़क किनारे बम विस्फोटों की तकनीक को बढ़ावा दिया, जिसमें अमेरिकी सैनिक भी हताहत हुए। रुबियो के अनुसार, ईरान ने दुनिया भर में विरोधियों और आम नागरिकों को निशाना बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका और भारत की स्थिति

गौरतलब है कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में नई गर्मजोशी देखने को मिली है, जिसके तहत पाकिस्तान अमेरिका-ईरान वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में रुबियो का यह दौरा और उनका स्पष्ट बयान कूटनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।

आगे क्या होगा

रुबियो के इस दौरे से भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान संकट और पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका के बीच भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए वाशिंगटन के साथ सीधा और मज़बूत संवाद बनाए रखना होगा। रुबियो के बयान को इसी दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे परखने की ज़रूरत है — क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को ईरान वार्ता में सक्रिय भूमिका दी है, जो भारत के रणनीतिक हितों के विपरीत जा सकती है। 'साझेदारी की कीमत पर नहीं' जैसे कूटनीतिक वाक्यांश अक्सर व्यवहार में अस्पष्ट रह जाते हैं — असली कसौटी यह होगी कि अमेरिका पाकिस्तान को किस हद तक सामरिक समर्थन देता है। भारत को इस दौरे को एकमात्र आश्वासन मानने की बजाय ठोस नीतिगत प्रतिबद्धताओं की माँग करनी चाहिए।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने भारत दौरे पर क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में कहा कि दुनिया के किसी भी देश के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदार देश अलग-अलग स्तरों पर सहयोग करते हैं, लेकिन भारत-अमेरिका साझेदारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पाकिस्तान अमेरिका-ईरान तनाव में मध्यस्थ क्यों बन रहा है?
ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक नज़दीकियाँ बढ़ी हैं, जिसके चलते पाकिस्तान को अमेरिका-ईरान तनाव कम करने की मध्यस्थ भूमिका मिली है। यह भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि भारत-पाकिस्तान संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं।
रुबियो ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान के बारे में क्या बताया?
रुबियो के अनुसार अमेरिका ने ईरान की नौसेना को नष्ट करने, बैलिस्टिक मिसाइल दागने की क्षमता घटाने और रक्षा औद्योगिक ढाँचे को नुकसान पहुँचाने के निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। उन्होंने सैन्य रणनीति के विवरण पर टिप्पणी से परहेज़ किया।
रुबियो ने ईरान पर आतंकवाद को लेकर क्या आरोप लगाए?
रुबियो ने कहा कि ईरान ने हिज्बुल्लाह जैसे प्रॉक्सी समूहों के ज़रिए अर्जेंटीना में यहूदी सांस्कृतिक केंद्र पर हमला कराया, सड़क किनारे बमों से अमेरिकी सैनिकों समेत कई लोगों को हताहत किया और दुनिया भर में विरोधियों को निशाना बनाने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए। उनके अनुसार ईरान दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद प्रायोजक है।
रुबियो के भारत दौरे का महत्त्व क्या है?
यह दौरा ऐसे संवेदनशील समय में हुआ जब पाकिस्तान की अमेरिका से नज़दीकी और ईरान संकट ने भारत की कूटनीतिक चिंताएँ बढ़ा दी थीं। रुबियो के स्पष्ट बयान को भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों को पुनः पुष्ट करने और नई दिल्ली को आश्वस्त करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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