मार्को रुबियो ने सराही भारत की ऊर्जा विविधीकरण नीति, विशेषज्ञों ने बताई बड़ी कूटनीतिक सफलता
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति को खुलकर समर्थन दिया है। 27 जून 2026 को सामने आए इस बयान को वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, पूर्व राजनयिकों और रणनीतिक विशेषज्ञों ने भारत की एक उल्लेखनीय कूटनीतिक उपलब्धि करार दिया। रुबियो ने यह भी कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है और अंतरराष्ट्रीय निर्णय-प्रक्रियाओं में उसकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
रुबियो का बयान और उसका महत्त्व
रुबियो के इस समर्थन को भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान संघर्ष और उससे उत्पन्न तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है। भारत ने इस दौरान अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाकर घरेलू मूल्य स्थिरता बनाए रखी है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलिया इंडिया स्ट्रैटेजिक अलायंस के चेयरमैन जगविंदर सिंह विर्क ने कहा, 'यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह दिखाता है कि भारत क्या कर सकता है। पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 50 प्रतिशत तक बढ़े हैं। लेकिन भारत में तमाम मुश्किलों के बावजूद डीजल के दाम ज़्यादा नहीं बढ़े और पेट्रोल में भी सिर्फ पाँच, सात या दस रुपये तक की बढ़ोतरी हुई, जो दस प्रतिशत से भी कम है।' विर्क ने यह भी कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियों के प्रभाव को संभालना भारत सरकार की बड़ी उपलब्धि रही है और अब अमेरिका तथा अन्य देश भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।
जॉर्डन, लीबिया और माल्टा में भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत ने भारत को दुनिया का 'सबसे बड़ा और मज़बूत लोकतंत्र और सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था' बताया। उन्होंने कहा, 'ईरान संघर्ष और उससे पैदा हुए तनाव के कारण भारत ने अपनी ऊर्जा नीतियों में बदलाव करते हुए अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल करने पर ध्यान दिया है।' त्रिगुनायत ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के सामने घरेलू स्तर पर कुछ चुनौतियाँ हैं, लेकिन उसकी विदेश नीति आज मज़बूत और परिस्थितियों के अनुकूल है।
सरकार की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का एकमात्र लक्ष्य देश को सामाजिक, आंतरिक सुरक्षा और बाहरी खतरों के मोर्चे पर मज़बूत बनाना रहा है। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की नीति से भारत की विकास-केंद्रित नीतियों की तुलना भी की।
आम जनता पर असर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद ने कहा, 'भारत शायद एशिया का एकमात्र ऐसा देश है जहाँ पश्चिम एशिया संकट के बावजूद कीमतों में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई। जो भी महंगाई आई, उसका बोझ भारतीय सरकार ने संभाला और आम लोगों को इस संकट का ज़्यादा भार नहीं उठाना पड़ा।' गौरतलब है कि वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में घरेलू मूल्य स्थिरता बनाए रखना किसी भी सरकार के लिए एक कठिन राजनीतिक और आर्थिक चुनौती रही है।
आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, रुबियो के इस बयान से भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को नई गति मिल सकती है। भारत की बहु-स्रोत ऊर्जा रणनीति — जिसमें रूस, मध्य-पूर्व और अमेरिका सहित विभिन्न देशों से तेल और गैस की आपूर्ति शामिल है — को अब अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलती दिख रही है। भविष्य में यह कूटनीतिक समर्थन भारत को वैश्विक ऊर्जा वार्ताओं में और अधिक प्रभावशाली भूमिका दिला सकता है।