मार्को रुबियो बोले- भारत की ऊर्जा जरूरतों में अमेरिका निभाएगा बड़ी भूमिका, वेनेजुएला तेल पर भी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 27 जून को व्हाइट हाउस में दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि अमेरिका, भारत की तेज़ी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। रुबियो ने भारत की ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच गहरा ऊर्जा सहयोग दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
रुबियो का बयान: 'हमारे पास समाधान हैं'
रुबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मुझे लगता है कि जाहिर है भारत बहुत लंबे समय से अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और इसलिए यह प्रवृत्ति जारी रहेगी। हम निश्चित रूप से इसका हिस्सा बनना चाहेंगे। हमें लगता है कि हमारे पास इस बारे में कुछ समाधान हैं।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा एक विविध आपूर्ति आधार बनाए रखने पर टिकी होगी।
रुबियो ने यह भी कहा कि वाशिंगटन और नई दिल्ली अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार गहरा कर रहे हैं, और ऊर्जा इस साझेदारी का एक केंद्रीय स्तंभ बन चुका है।
मध्य-पूर्व शांति और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार से जुड़ाव
रुबियो ने इस मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्य-पूर्व में तनाव कम करने की कोशिशों से जोड़ा। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने मध्य-पूर्व में शांति को मौका इसलिए दिया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि हमारे सहयोगी देशों के लिए बाज़ार में अधिक ईंधन उपलब्ध हो।" यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच उतार-चढ़ाव का सामना कर रही हैं।
वेनेजुएला के कच्चे तेल पर भारत की विशेष क्षमता
रुबियो ने वेनेजुएला को भारत के लिए कच्चे तेल के एक संभावित अतिरिक्त स्रोत के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि भारत न सिर्फ अमेरिका, बल्कि वेनेजुएला से भी बात कर रहा है। हम उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए बहुत करीब से काम कर रहे हैं।"
रुबियो ने यह भी बताया कि भारत की रिफाइनिंग क्षमता उसे वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल (हेवी क्रूड) को प्रसंस्कृत करने के मामले में दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में रखती है। उन्होंने कहा, "इसलिए हम इसे भी सुगम बनाने की कोशिश करेंगे।" गौरतलब है कि वेनेजुएला का हेवी क्रूड अधिकांश रिफाइनरियों के लिए तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, और भारत की यह विशेषज्ञता उसे एक रणनीतिक लाभ देती है।
भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के व्यापक आयाम
रुबियो ने ऊर्जा को उन कई क्षेत्रों में से एक बताया जहाँ दोनों देशों के साझा रणनीतिक हित हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था, आपूर्ति शृंखला, महत्त्वपूर्ण खनिज, सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को भी इस सहयोग के अहम स्तंभ बताया। रुबियो ने कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा और अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है। हमारे बीच बहुत सी समानताएँ हैं और हम मिलकर कई क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।"
उन्होंने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को भी रेखांकित करते हुए कहा कि यह समुदाय दोनों देशों के बीच एक अतिरिक्त और मज़बूत सेतु का काम करता है।
भारत की ऊर्जा माँग: पृष्ठभूमि
भारत दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है। बढ़ती घरेलू माँग को पूरा करने के लिए नई दिल्ली ने कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के आयात में लगातार वृद्धि की है। ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाना — किसी एक स्रोत पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए — भारत की ऊर्जा सुरक्षा नीति का एक केंद्रीय तत्त्व बन चुका है। तेल और LNG व्यापार के साथ-साथ, दोनों देश सिविल परमाणु ऊर्जा, स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी और महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला में भी सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। आगे देखें तो यह साझेदारी भारत की ऊर्जा रणनीति को नई दिशा देने में निर्णायक साबित हो सकती है।