कुत्ते पढ़ सकते हैं इंसानी चेहरे की भावनाएँ: MRI स्कैन में वियना विश्वविद्यालय का चौंकाने वाला खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
यूनिवर्सिटी ऑफ विएना के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, कुत्ते न केवल इंसानी चेहरों की भावनाएँ पहचान सकते हैं, बल्कि उनका मस्तिष्क डर, गुस्से और उदासी जैसे अलग-अलग नकारात्मक भावों में भी अंतर करने में सक्षम है। 11 अगस्त को सामने आए इस शोध ने मनुष्य और उसके सबसे वफादार साथी के बीच के भावनात्मक संबंध को लेकर नई समझ विकसित की है।
शोध की पद्धति
शोधकर्ताओं ने पालतू कुत्तों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया ताकि वे जागते हुए और बिना किसी बंधन के एमआरआई स्कैनर में शांत होकर लेट सकें। अध्ययन में शामिल अधिकांश कुत्ते बॉर्डर कॉली नस्ल के थे, जो अपनी बुद्धिमत्ता के लिए जानी जाती है।
पहले चरण में 8 कुत्तों को खुश और सामान्य भाव वाले इंसानी चेहरों की तस्वीरें दिखाई गईं। स्कैन में पाया गया कि खुश चेहरे देखने पर कुत्तों के मस्तिष्क के उन हिस्सों में गतिविधि बढ़ी जो दृष्टि, सामाजिक संकेतों की पहचान और सकारात्मक अनुभव से जुड़े माने जाते हैं।
मुख्य निष्कर्ष
दूसरे चरण में 12 कुत्तों को खुश, उदास, डरे हुए और गुस्से वाले चेहरों की तस्वीरें दिखाई गईं। शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग की सहायता से मस्तिष्क की गतिविधियों का विश्लेषण किया।
परिणाम उल्लेखनीय रहे — कुत्तों के दिमाग ने खुश चेहरे को नकारात्मक भाव वाले चेहरों से स्पष्ट रूप से अलग पहचाना। पूरे मस्तिष्क की गतिविधि का विश्लेषण करने पर संकेत मिले कि कुत्ते डर और उदासी तथा डर और गुस्से के बीच अंतर कर सकते हैं। हालाँकि, गुस्से और उदासी को एक-दूसरे से अलग पहचानने में वे उतने सफल नहीं रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यूनिवर्सिटी ऑफ विएना की शोधकर्ता डॉ. लौरा कुआया के अनुसार, यह पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें संकेत मिले हैं कि कुत्तों का मस्तिष्क एक ही भावात्मक श्रेणी के भीतर अलग-अलग मानवीय भावनाओं में अंतर कर सकता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि गुस्से और उदासी को अलग न पहचान पाने की एक संभावित वजह यह हो सकती है कि इन दोनों भावों को समझने के लिए केवल चेहरा पर्याप्त नहीं होता — शरीर की मुद्रा और अन्य सामाजिक संकेत भी कुत्तों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अध्ययन की सीमाएँ
शोधकर्ताओं ने स्वयं स्वीकार किया कि इस अध्ययन की कुछ सीमाएँ हैं। नमूना आकार छोटा था और अधिकांश कुत्ते एक ही नस्ल — बॉर्डर कॉली — के थे। इसके अलावा, सभी कुत्ते पूर्णतः स्वस्थ थे और उनमें व्यवहार संबंधी कोई समस्या नहीं थी। इसलिए इन निष्कर्षों को सभी नस्लों पर समान रूप से लागू करने से पहले बड़े पैमाने पर शोध की आवश्यकता होगी।
आगे की दिशा
यह अध्ययन मनुष्य और कुत्ते के बीच हजारों वर्षों के साहचर्य की वैज्ञानिक पुष्टि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भविष्य में विभिन्न नस्लों और बड़े नमूनों पर किए जाने वाले शोध यह स्पष्ट कर सकते हैं कि क्या यह क्षमता सभी कुत्तों में समान रूप से पाई जाती है।