कुत्ते मालिक की पलक झपकते देख खुद भी झपकाते हैं आंखें — द रॉयल सोसाइटी में प्रकाशित नया अध्ययन
सारांश
मुख्य बातें
इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ पर्मा के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में सामने आया है कि पालतू कुत्ते अपने मालिक को पलक झपकाते देखकर स्वयं भी सामान्य से अधिक बार पलकें झपकाते हैं — और यह प्रतिक्रिया अनजान लोगों के साथ उतनी स्पष्ट नहीं होती। यह शोध 26 अगस्त 2026 को प्रतिष्ठित द रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन कैसे किया गया
शोध में 35 अलग-अलग नस्लों के कुत्तों को शामिल किया गया। प्रत्येक कुत्ते को 40-40 सेकंड के दो प्रकार के वीडियो दिखाए गए — एक में उनके अपने मालिक और दो अनजान व्यक्ति हर तीन सेकंड में पलक झपकाते थे, जबकि दूसरे वीडियो में वही लोग बिना पलक झपकाए सीधे कैमरे की ओर देखते थे। इस प्रयोग के ज़रिए शोधकर्ताओं ने कुत्तों की पलक-झपकाने की दर को दोनों स्थितियों में मापा।
मुख्य निष्कर्ष
अध्ययन में पाया गया कि जब वीडियो में लोग पलक झपका रहे थे, तो कुत्तों ने सामान्य स्थिति की तुलना में अधिक बार पलकें झपकाईं। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि यह प्रवृत्ति मुख्यतः तब देखी गई जब वीडियो में उनके अपने मालिक थे। अनजान चेहरों के साथ यह बदलाव उतना स्पष्ट नहीं था, जो यह संकेत देता है कि कुत्तों की यह प्रतिक्रिया सामाजिक जुड़ाव से प्रभावित होती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
शोधकर्ता चियारा कैनोरी के अनुसार, पलक झपकाना मूलतः आंखों को नम और सुरक्षित रखने की एक स्वाभाविक शारीरिक क्रिया है, लेकिन सामाजिक परिस्थितियाँ भी इस व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। उनके अनुसार, यह संभव है कि पलक झपकाना कुत्तों और उनके मालिकों के बीच ध्यान या भावनात्मक जुड़ाव का एक सूक्ष्म संकेत हो।
हालाँकि शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अध्ययन से यह सिद्ध नहीं होता कि कुत्ते जानबूझकर पलक झपकाकर कोई निश्चित संदेश देते हैं। प्रत्येक पलक का कोई तय अर्थ निकालना अभी वैज्ञानिक रूप से समर्थित नहीं है।
आम जनता पर असर
यह शोध पालतू जानवरों और इंसानों के बीच के सूक्ष्म संवाद को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि कुत्तों द्वारा इंसानी चेहरे के भावों को पढ़ने की क्षमता पर पहले भी अध्ययन हो चुके हैं, लेकिन पलक झपकाने जैसी बेहद सूक्ष्म क्रिया पर केंद्रित यह शोध अपेक्षाकृत नया है। पशु व्यवहार विशेषज्ञों के लिए यह निष्कर्ष भविष्य में कुत्तों के प्रशिक्षण और मानव-पशु संबंधों की गहरी समझ के लिए उपयोगी हो सकता है।
आगे क्या
शोधकर्ताओं ने संकेत दिया है कि भविष्य में और अध्ययनों की आवश्यकता है जो यह जाँच सकें कि क्या यह व्यवहार केवल दृश्य उत्तेजना के कारण है या इसमें भावनात्मक पहचान की भी भूमिका है। पशु संज्ञान के क्षेत्र में यह खोज नई शोध दिशाएँ खोल सकती है।