तमिलनाडु वित्त मंत्री मैरी विल्सन के बचाव में स्वास्थ्य मंत्री अरुण राज — 'व्हिसलब्लोअर हैं, अपराधी नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के. अरुण राज ने बुधवार, 26 अगस्त को वित्त मंत्री एन. मैरी विल्सन का खुलकर बचाव करते हुए उन्हें भ्रष्ट व्यवस्था की शिकार और एक 'व्हिसलब्लोअर' बताया। विल्सन ने सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में स्वीकार किया था कि पिछली सरकार के कार्यकाल में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया था। इस बयान के बाद राज्य में तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।
मुख्य घटनाक्रम
चेन्नई में अपोलो मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह के अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए अरुण राज ने स्पष्ट किया कि विल्सन ने अपनी इच्छा से भ्रष्टाचार में भागीदारी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर निजी शैक्षणिक संस्थाओं के लिए रिश्वत को एक अनिवार्य प्रक्रिया बना दिया था, जिसके चलते विल्सन को भुगतान के लिए बाध्य किया गया।
अरुण राज ने कहा, 'वह जबरन रिश्वत और भ्रष्टाचार की शिकार हैं — उन्हें भुगतान के लिए मजबूर किया गया था।' उन्होंने यह भी कहा कि कानून उन लोगों की रक्षा करता है जो गलत कामों का पर्दाफाश करते हैं।
भाजपा की मांग और सरकार का जवाब
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तमिलनाडु अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने विल्सन को कैबिनेट से हटाने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। उनका तर्क था कि रिश्वत देना भी रिश्वत लेने जितना ही गंभीर अपराध है। अरुण राज ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दोनों परिस्थितियों में मूलभूत अंतर है।
स्कूल शिक्षा के पूर्व मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी ने भी विल्सन के कथित 'इकबालिया बयान' की विजिलेंस और एंटी-करप्शन निदेशालय से जांच कराने की मांग की है।
विवाद की जड़ — विधानसभा में दिया बयान
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एन. मैरी विल्सन ने सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा में खुलासा किया कि पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार के कार्यकाल में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग को रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया था। उनके अनुसार, उस दौर में अधिकारियों ने एक ऐसी व्यवस्था बना रखी थी जिसमें निजी स्कूलों और कॉलेजों को मंजूरी और सरकारी क्लीयरेंस के लिए गैर-कानूनी भुगतान करने पर विवश किया जाता था।
गौरतलब है कि विल्सन ने यह बयान स्वयं विधानसभा के पटल पर दिया, जिससे इसे सार्वजनिक रिकॉर्ड का हिस्सा माना जा रहा है। अरुण राज ने तर्क दिया कि चूंकि उन्होंने इस कथित प्रथा का सार्वजनिक रूप से खुलासा किया है, इसलिए उन्हें आरोपी नहीं, बल्कि व्हिसलब्लोअर के रूप में देखा जाना चाहिए।
कृषि भूमि और औद्योगिक परियोजनाओं पर भी सवाल
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री से खेती की ज़मीन को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए उपयोग किए जाने से जुड़ी चिंताओं पर भी सवाल किए गए। विशेष मामलों पर सीधा जवाब देने से बचते हुए उन्होंने सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, 'सरकार विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन जबरन भूमि अधिग्रहण और स्थानीय समुदायों की सहमति के बिना लागू की जाने वाली परियोजनाओं का वह विरोध करेगी।'
आगे क्या होगा
अरुण राज ने जांच की मांग करते हुए कहा कि भुगतान की परिस्थितियों और कथित तौर पर रिश्वत की मांग करने वालों की पहचान के लिए उचित जांच होनी चाहिए। यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है — क्या भ्रष्ट व्यवस्था में मजबूरन भागीदारी करने वाले को कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए? इस सवाल का जवाब आने वाले दिनों में विजिलेंस विभाग और न्यायपालिका तय करेंगे।