मध्य प्रदेश में एआई ने उजागर किया ₹600 करोड़ का वित्तीय घोटाला, डिप्टी सीएम देवड़ा बोले — दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 26 अगस्त 2026 को भोपाल में खुलासा किया कि राज्य के वित्त विभाग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित ऑडिट प्रणाली की सहायता से ₹600 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और रिकवरी की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ
देवड़ा के अनुसार, वित्त विभाग ने एआई-बेस्ड ऑडिट सिस्टम के ज़रिए संदिग्ध लेनदेन को ट्रैक किया, जिससे पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ संभव हो सका। उन्होंने बताया कि ट्रांजेक्शन में हेरफेर कर सरकारी खजाने को लंबे समय से नुकसान पहुँचाया जा रहा था। यह घोटाला कथित तौर पर कई विभागों में फैला हुआ था।
देवड़ा ने कहा, 'वित्त विभाग ने खुद एआई की मदद से इस मामले में हुई घटनाओं के पूरे क्रम का खुलासा किया है। दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। रिकवरी भी की गई है।'
जांच का दायरा और प्रभावित विभाग
उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच का दायरा और विस्तृत होगा। उन्होंने कहा, 'चाहे नगरीय प्रशासन हो या महिला एवं बाल विकास विभाग — जितने भी विभाग जांच में आएंगे, सभी की जांच की जाएगी।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों को लेकर सियासी बहस तेज है।
गौरतलब है कि सरकार ने रिकवरी की गई राशि को सरकारी खजाने में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में सभी संबंधित विभागों के रिकॉर्ड की व्यापक जांच की जाएगी।
सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
देवड़ा ने दोहराया कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, 'दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।' अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद जिन-जिन दोषियों का पता चलेगा, उन सभी पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
एआई प्रणाली को और मजबूत करने की योजना
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि भविष्य में ऐसी वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के लिए एआई ऑडिट सिस्टम को और अधिक सक्षम बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है, तो अन्य राज्य भी इसे अपना सकते हैं। मध्य प्रदेश का यह कदम सरकारी वित्तीय निगरानी में तकनीक के बढ़ते उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।