मध्य प्रदेश सड़क घोटाला: ईडी ने ₹2.93 करोड़ बैंक राशि फ्रीज की, रीवा-जबलपुर में तलाशी
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रीवा और जबलपुर जिलों में विभिन्न परिसरों पर छापा मारकर ₹2.93 करोड़ के बैंक डिपॉजिट फ्रीज किए और ₹23.50 लाख नकद जब्त किए। 19 जून 2026 को चलाए गए इस तलाशी अभियान में बिटुमेन बिलों में हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच की गई।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी भोपाल जोनल कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान संपत्ति दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और ₹23.50 लाख नकद राशि सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए। इसके अलावा ₹2.93 करोड़ के बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट फ्रीज कर दिए गए।
यह जांच मध्य प्रदेश पुलिस की रीवा और जबलपुर आर्थिक अपराध शाखाओं द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज विभिन्न एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी।
घोटाले की कार्यप्रणाली
जांच में खुलासा हुआ कि ठेकेदारों ने मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (एमपीआरआरडीए) की परियोजना कार्यान्वयन इकाइयों के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर सड़क निर्माण के डामर/बिटुमेन कार्य के लिए जाली और मनगढ़ंत बिल जमा करके सरकारी भुगतान धोखाधड़ी से हासिल किया।
ईडी के अनुसार, ठेकेदारों ने कथित तौर पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के ₹55.60 करोड़ के बिलों में हेराफेरी की, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
मिलावटी डेयरी उत्पाद मामले में पूरक आरोप-पत्र
एक अलग मामले में, ईडी भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने 17 जून 2026 को मिलावटी डेयरी उत्पादों के निर्माण से जुड़े मामले में सुनील कुमार त्रिपाठी और अन्य के विरुद्ध विशेष न्यायालय (पीएमएलए), भोपाल में पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की। आरोपियों पर दूध की वसा को ताड़ के तेल और अन्य हानिकारक रसायनों से बदलने का आरोप है।
यह जांच भोपाल के हबीबगंज पुलिस स्टेशन और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (जेजीएफपीएल) के निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। विशेष न्यायालय ने आरोपियों को पेशी के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।
पूर्व कार्रवाई और गिरफ्तारियाँ
इससे पहले, ईडी ने पीएमएलए के प्रावधानों के तहत इस मामले में ₹23.59 करोड़ मूल्य की चल और अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की थीं। ईडी ने जेजीएफपीएल के प्रबंध निदेशक किशन मोदी और कंपनी के पूर्व सीईओ सुनील कुमार त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था। दोनों अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे क्या होगा
ईडी की जांच जारी है और सड़क निर्माण घोटाले में और भी संलिप्त पक्षों की पहचान की जा सकती है। गौरतलब है कि यह मामला सरकारी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, जहाँ ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया गया।