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इंदौर नगर निगम ₹92.76 करोड़ फर्जी बिल घोटाला: ED ने तीन मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए

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इंदौर नगर निगम ₹92.76 करोड़ फर्जी बिल घोटाला: ED ने तीन मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए

सारांश

इंदौर नगर निगम में पाँच साल तक चले फर्जी बिलों के तंत्र ने ₹92.76 करोड़ की चपत लगाई — और अब ED ने एक इंजीनियर सहित तीन मुख्य आरोपियों को PMLA के तहत गिरफ्तार किया है। ₹22 करोड़ की नकदी जब्ती और ₹34 करोड़ की संपत्तियों की कुर्की के बाद जाँच की आँच निगम के भीतर तक पहुँचने के संकेत हैं।

मुख्य बातें

ED ने 1 जून को IMC फर्जी बिल घोटाले में तीन मुख्य आरोपियों अभय सिंह राठौड़ , मोहम्मद जाकिर , राहुल बडेरा को गिरफ्तार किया।
विशेष PMLA अदालत ने आरोपियों को 5 जून तक ED हिरासत में भेजा।
2018-2023 के बीच IMC में ₹119.53 करोड़ के फर्जी बिल जमा हुए; ₹86.54 करोड़ का धोखाधड़ी भुगतान।
2018 से पहले के ₹6.22 करोड़ गबन सहित कुल ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ ₹92.76 करोड़ ।
तलाशी में ₹22.04 करोड़ की नकदी/कीमती सामान जब्त; ₹34 करोड़ की अचल संपत्तियाँ कुर्क।
ठेकेदार जाकिर और बडेरा ने अपनी फर्मों के ज़रिये ₹71.78 करोड़ निकाले।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के इंदौर सब-जोनल कार्यालय ने 1 जून को इंदौर नगर निगम (IMC) के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच में तीन मुख्य आरोपियों — अभय सिंह राठौड़, मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा — को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई, जिसमें कुल धोखाधड़ी की राशि लगभग ₹92.76 करोड़ आँकी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

गिरफ्तार तीनों आरोपियों को इंदौर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 5 जून तक ED की हिरासत में भेज दिया। ED ने यह जाँच एमजी रोड पुलिस स्टेशन, इंदौर में IPC, 1860 के विभिन्न प्रावधानों के तहत दर्ज कई FIR और दाखिल चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी।

घोटाले का तरीका

एजेंसी की जाँच के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच IMC में लगभग ₹119.53 करोड़ के फर्जी एवं झूठे बिल जमा किए गए, जो ऐसे कार्यों के लिए थे जो ज़मीन पर हुए ही नहीं थे। इन मनगढ़ंत बिलों के आधार पर निगम के खजाने से लगभग ₹86.54 करोड़ का धोखाधड़ी भरा भुगतान कर दिया गया।

आगे की जाँच में सामने आया कि 2018 से पहले भी इसी तरीके से लगभग ₹6.22 करोड़ के सरकारी धन का गबन किया गया था। इस तरह कुल अनुमानित ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ ₹92.76 करोड़ तय की गई है।

आरोपियों की भूमिका

ED के अनुसार, अभय सिंह राठौड़ उस समय निगम में असिस्टेंट इंजीनियर थे और घोटाले के मुख्य साज़िशकर्ताओं में से एक के रूप में सामने आए — उन पर जाली वर्क ऑर्डर तैयार करवाने और उन्हें प्रोसेस कराने में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा ने अपनी स्वामित्व व नियंत्रण वाली फर्मों के ज़रिये फर्जी बिलों के बदले निगम से लगभग ₹71.78 करोड़ प्राप्त किए, जबकि इन फर्मों ने वास्तव में कोई काम नहीं किया।

जब्ती और कुर्की

इससे पहले ED ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाकर लगभग ₹22.04 करोड़ की नकदी और कीमती सामान जब्त किया था। इसके बाद 3 जुलाई 2025 के ‘प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर’ के ज़रिये लगभग ₹34 करोड़ की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया।

आगे क्या

एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अपराध से अर्जित शेष रकम, उससे खरीदी गई अन्य संपत्तियों और लेन-देन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के लिए जाँच जारी है। आने वाले हफ्तों में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संभावित निगम अधिकारियों की भूमिका पर भी पूछताछ की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना अस्तित्व वाले प्रोजेक्ट और ठेकेदार-इंजीनियर गठजोड़ बेरोकटोक चलता रहा। असली सवाल यह है कि ऑडिट तंत्र, आंतरिक वित्तीय जाँच और निगम परिषद किस स्तर पर सोते रहे। जब तक ‘बेनिफिशियल ओनर्स’ की पूरी श्रृंखला और राजनीतिक संरक्षण की कड़ियाँ सामने नहीं आतीं, तब तक ₹92.76 करोड़ का यह आँकड़ा भारत के नगर निगम वित्त में बहुत बड़े संरचनात्मक रिसाव का सिर्फ़ एक झलक भर रहेगा।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला क्या है?
यह 2018 से 2023 के बीच इंदौर नगर निगम (IMC) में चलाया गया एक मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट है, जिसमें ऐसे कार्यों के लिए लगभग ₹119.53 करोड़ के फर्जी बिल जमा किए गए जो असल में कभी हुए ही नहीं। इनके आधार पर निगम के खजाने से लगभग ₹86.54 करोड़ का धोखाधड़ी भुगतान निकाला गया।
ED ने किन तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है?
प्रवर्तन निदेशालय ने 1 जून को अभय सिंह राठौड़ (निगम में तत्कालीन असिस्टेंट इंजीनियर), ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और ठेकेदार राहुल बडेरा को PMLA, 2002 के तहत गिरफ्तार किया। तीनों को विशेष PMLA अदालत ने 5 जून तक ED हिरासत में भेज दिया है।
कुल धोखाधड़ी की राशि कितनी आँकी गई है?
ED की जाँच के अनुसार ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ की कुल राशि लगभग ₹92.76 करोड़ है, जिसमें 2018-2023 के बीच के ₹86.54 करोड़ और उससे पहले के ₹6.22 करोड़ का गबन शामिल है।
अब तक कितनी संपत्ति जब्त या कुर्क की गई है?
तलाशी अभियान में लगभग ₹22.04 करोड़ की नकदी और कीमती सामान जब्त किया गया था। इसके बाद 3 जुलाई 2025 के प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के ज़रिये लगभग ₹34 करोड़ की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की गईं।
आगे जाँच की दिशा क्या है?
ED शेष ‘अपराध से अर्जित’ रकम, उससे खरीदी गई अन्य संपत्तियों और लेन-देन की पूरी श्रृंखला का पता लगा रही है। संभावना है कि आने वाले समय में निगम के अन्य अधिकारियों, बिचौलियों और लाभार्थियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में आएगी।
राष्ट्र प्रेस
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