इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला: ईडी ने ₹3.48 करोड़ की 9 संपत्तियाँ जब्त कीं, कुल कुर्की ₹59.18 करोड़ पहुँची
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने इंदौर नगर निगम (आईएमसी) फर्जी बिल घोटाले में धन शोधन जाँच के तहत ₹3.48 करोड़ मूल्य की 9 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। जब्त संपत्तियाँ मध्य प्रदेश के इंदौर और धार जिलों में स्थित आवासीय मकान, फ्लैट, भूखंड, व्यावसायिक दुकानें और कृषि भूमि हैं, जो आरोपी व्यक्तियों, लाभार्थियों और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज हैं।
घोटाले की पृष्ठभूमि
ईडी की जाँच इंदौर के एमजी रोड पुलिस स्टेशन में दर्ज कई प्राथमिकियों के आधार पर शुरू हुई, जिनमें आरोप था कि आईएमसी के खजाने से फर्जी बिल, जाली वर्क ऑर्डर, मनगढ़ंत माप पुस्तिकाएँ और अन्य कूट-रचित दस्तावेज़ों के ज़रिये सार्वजनिक धन की धोखाधड़ी से निकासी की गई। ये धोखाधड़ी उन कार्यों से जुड़ी थी जो या तो कभी निष्पादित ही नहीं हुए या पहले से पूरे हो चुके वर्क ऑर्डरों के लिए दोबारा भुगतान लिया गया।
गौरतलब है कि यह घोटाला नगर निगम स्तर पर ठेकेदारों और सरकारी अधिकारियों की कथित मिलीभगत का उजागर होना दर्शाता है — एक ऐसा पैटर्न जो देश के कई शहरी निकायों में पहले भी सामने आ चुका है।
₹103.62 करोड़ के गबन का खुलासा
ईडी की जाँच में सामने आया कि विभिन्न ठेकेदार कंपनियों ने आईएमसी के अधिकारियों और स्थानीय निधि लेखापरीक्षा/निवासी लेखापरीक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से जाली कार्य-आदेश फ़ाइलें और फर्जी बिल तैयार किए, जिसके परिणामस्वरूप आईएमसी के खजाने से ₹103.62 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि का गबन हुआ।
जाँच के अनुसार, धोखाधड़ी से प्राप्त यह रकम नकद में निकाली गई, ठेकेदारों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य लाभार्थियों में बाँटी गई, संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित की गई, अन्य निधियों के साथ मिलाई गई और संपत्ति अधिग्रहण तथा व्यक्तिगत खर्चों में लगाई गई।
कुर्की और जब्ती का विवरण
इससे पहले ईडी ने 3 जुलाई 2025 को अंतरिम कुर्की आदेश जारी करते हुए इस मामले में ₹33.65 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। ताज़ा कुर्की के बाद इस मामले में कुर्क अचल संपत्तियों का कुल मूल्य ₹37.14 करोड़ हो गया है।
इसके अतिरिक्त, ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत आरोपियों और संबंधित संस्थाओं के परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया, जिसमें ₹22.04 करोड़ की नकदी, कीमती सामान और अन्य परिसंपत्तियाँ जब्त या फ्रीज़ की गईं। इस प्रकार इस मामले में कुल कुर्की और जब्ती ₹59.18 करोड़ तक पहुँच गई है।
तीन प्रमुख आरोपी न्यायिक हिरासत में
ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत 1 जून 2026 को तीन प्रमुख आरोपियों — अभय सिंह राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल बदेरा — को गिरफ्तार किया था। तीनों अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं और आगे की जाँच जारी है।
यह मामला शहरी निकायों में वित्तीय अनुशासन और तृतीय पक्ष लेखापरीक्षा की ज़रूरत को एक बार फिर रेखांकित करता है — विशेष रूप से ऐसे समय में जब केंद्र और राज्य सरकारें स्मार्ट सिटी और शहरी विकास परियोजनाओं पर अरबों रुपये खर्च कर रही हैं।