3 जुलाई 2026
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इंदौर नव भारत गृह निर्माण घोटाला: ईडी ने पाँच आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल, ₹4.64 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

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इंदौर नव भारत गृह निर्माण घोटाला: ईडी ने पाँच आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल, ₹4.64 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

सारांश

इंदौर की नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था में ₹4.64 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में ईडी ने पाँच आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की। इससे पहले फरवरी 2026 में ₹64.16 लाख की संपत्तियाँ कुर्क हो चुकी हैं। जाँच अभी जारी है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 जुलाई 2026 को पाँच आरोपियों — श्रीकांत घांटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह — के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में अभियोजन शिकायत दाखिल की।
आरोप है कि आरोपियों ने नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड को करीब ₹4.64 करोड़ का नुकसान पहुँचाया।
संस्था की भूमि को विभिन्न संस्थाओं व व्यक्तियों को बेचकर प्राप्त राशि का गबन किया गया और रिकॉर्ड नष्ट किए गए।
12 फरवरी 2026 को ईडी ने पीएमएलए के तहत ₹64.16 लाख मूल्य की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से कुर्क की थीं।
विशेष अदालत ने प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए; जाँच अभी जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 जुलाई 2026 को इंदौर की नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में पाँच आरोपियों के विरुद्ध विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। आरोप है कि इन व्यक्तियों ने संस्था के सदस्यों के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी कर संस्था को करीब ₹4.64 करोड़ का नुकसान पहुँचाया और अपराध से अर्जित धन को अचल संपत्तियों में खपाया।

किन आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई शिकायत

ईडी की इंदौर उप-जोनल इकाई ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत श्रीकांत घांटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई। विशेष अदालत ने मामले में प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने इस प्रकरण की जाँच एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज एक प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। उस एफआईआर में संस्था के पदाधिकारियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। गौरतलब है कि यह संस्था अपने सदस्यों से आवासीय उद्देश्यों के लिए धन एकत्र करती थी।

धोखाधड़ी का तरीका

जाँच में ईडी को पता चला कि संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों ने मिलकर सदस्यों के साथ धोखाधड़ी की। आरोप है कि संस्था के धन से खरीदी गई भूमि को विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों को बेच दिया गया और उससे प्राप्त राशि का गबन किया गया।

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने भूमि बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया और अवैध रूप से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से छिपाने के बाद अचल संपत्तियाँ खरीदने में लगाया। जाँच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे षड्यंत्र में अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग स्तरों पर खपाया गया।

पहले हो चुकी है संपत्ति कुर्की

यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने इस मामले में कदम उठाया है। 12 फरवरी 2026 को एजेंसी ने पीएमएलए के तहत ₹64.16 लाख मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। ये संपत्तियाँ आरोपी श्रीकांत घांटे और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर दर्ज थीं।

आगे की जाँच जारी

ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जाँच अभी जारी है और जाँच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला उन सहकारी आवासीय संस्थाओं में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है, जो मध्यम वर्गीय परिवारों की जमापूँजी पर निर्भर करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा अदालत में साक्ष्य की मजबूती और पीड़ित सदस्यों को धन वापसी की व्यवस्था होगी। ₹64.16 लाख की कुर्की और ₹4.64 करोड़ के कथित नुकसान के बीच का अंतर यह सवाल उठाता है कि शेष राशि की वसूली कब और कैसे होगी — जो पीड़ित सदस्यों के लिए सबसे अहम सवाल है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था घोटाला क्या है?
यह इंदौर की एक सहकारी आवासीय संस्था में हुई कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें संस्था के पदाधिकारियों पर सदस्यों के धन से खरीदी गई भूमि को बेचकर ₹4.64 करोड़ का गबन करने का आरोप है। एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने पीएमएलए के तहत जाँच शुरू की।
ईडी ने किन पाँच आरोपियों के खिलाफ शिकायत दाखिल की है?
ईडी ने श्रीकांत घांटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ 3 जुलाई 2026 को विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
ईडी ने इस मामले में पहले क्या कार्रवाई की थी?
12 फरवरी 2026 को ईडी ने पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घांटे और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर दर्ज ₹64.16 लाख मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था।
आरोपियों ने धोखाधड़ी किस तरह की?
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने संस्था के धन से खरीदी गई जमीन को विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों को बेचकर प्राप्त राशि का गबन किया, बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड नष्ट किए और अवैध धन को अचल संपत्तियों में खपाया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
विशेष पीएमएलए अदालत ने प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। ईडी ने स्पष्ट किया है कि जाँच जारी है और नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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