इंदौर नव भारत गृह निर्माण घोटाला: ईडी ने पाँच आरोपियों के खिलाफ पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल, ₹4.64 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 जुलाई 2026 को इंदौर की नव भारत गृह निर्माण सहकारी संस्था लिमिटेड से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में पाँच आरोपियों के विरुद्ध विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। आरोप है कि इन व्यक्तियों ने संस्था के सदस्यों के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी कर संस्था को करीब ₹4.64 करोड़ का नुकसान पहुँचाया और अपराध से अर्जित धन को अचल संपत्तियों में खपाया।
किन आरोपियों के खिलाफ दाखिल हुई शिकायत
ईडी की इंदौर उप-जोनल इकाई ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत श्रीकांत घांटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ यह शिकायत दर्ज कराई। विशेष अदालत ने मामले में प्री-कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने इस प्रकरण की जाँच एमजी रोड थाना, इंदौर में दर्ज एक प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। उस एफआईआर में संस्था के पदाधिकारियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। गौरतलब है कि यह संस्था अपने सदस्यों से आवासीय उद्देश्यों के लिए धन एकत्र करती थी।
धोखाधड़ी का तरीका
जाँच में ईडी को पता चला कि संस्था के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों ने मिलकर सदस्यों के साथ धोखाधड़ी की। आरोप है कि संस्था के धन से खरीदी गई भूमि को विभिन्न संस्थाओं और व्यक्तियों को बेच दिया गया और उससे प्राप्त राशि का गबन किया गया।
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने भूमि बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड को नष्ट कर दिया और अवैध रूप से अर्जित धन को विभिन्न माध्यमों से छिपाने के बाद अचल संपत्तियाँ खरीदने में लगाया। जाँच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे षड्यंत्र में अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को व्यवस्थित तरीके से अलग-अलग स्तरों पर खपाया गया।
पहले हो चुकी है संपत्ति कुर्की
यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने इस मामले में कदम उठाया है। 12 फरवरी 2026 को एजेंसी ने पीएमएलए के तहत ₹64.16 लाख मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। ये संपत्तियाँ आरोपी श्रीकांत घांटे और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर दर्ज थीं।
आगे की जाँच जारी
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में जाँच अभी जारी है और जाँच के दौरान सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला उन सहकारी आवासीय संस्थाओं में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है, जो मध्यम वर्गीय परिवारों की जमापूँजी पर निर्भर करती हैं।