11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मध्य प्रदेश शिक्षा घोटाला: ईडी ने ₹20.47 करोड़ के अलीराजपुर ट्रेजरी फर्जीवाड़े में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मध्य प्रदेश शिक्षा घोटाला: ईडी ने ₹20.47 करोड़ के अलीराजपुर ट्रेजरी फर्जीवाड़े में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की

सारांश

मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले में ब्लॉक शिक्षा कार्यालय से ₹20.47 करोड़ की सरकारी राशि गबन कर 'श्री बालाजी धाम' आवासीय परियोजना में लगाई गई। ईडी ने अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर ₹6 करोड़ से अधिक के 56 प्लॉट जब्त किए हैं।

मुख्य बातें

ईडी के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने 10 जुलाई 2026 को इंदौर स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की।
मामला अलीराजपुर जिले के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय, कट्टीवाड़ा से ₹20.47 करोड़ के सरकारी फंड गबन से जुड़ा है।
मुख्य आरोपी कमल राठौर ने 2018 से 2023 के बीच फर्जी बिलों से अलीराजपुर ट्रेजरी से धन निकाला।
अपराध की रकम से धार जिले की गंधवानी तहसील में जमीन खरीदकर 'श्री बालाजी धाम' नाम से 56 आवासीय प्लॉट बनाए गए।
ईडी ने ₹4.43 करोड़ की संपत्ति पहले कुर्क की; अब ₹6 करोड़ से अधिक मूल्य के 56 प्लॉट भी जब्त।
इंदौर स्पेशल कोर्ट ने नई चार्जशीट का संज्ञान लेकर आरोपियों को नोटिस जारी किए।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय (बीईओ), कट्टीवाड़ा से जुड़े ₹20.47 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के समक्ष एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। 10 जुलाई 2026 को दायर यह शिकायत 29 सितंबर 2025 को मुख्य आरोपी कमल राठौर और अन्य के विरुद्ध दर्ज की गई प्रारंभिक चार्जशीट का विस्तार है।

घोटाले का मुख्य घटनाक्रम

जांच के अनुसार, कमल राठौर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 2018 से 2023 के बीच फर्जी बिलों को धोखाधड़ी से पास कराया और अलीराजपुर ट्रेजरी से गैरकानूनी तरीके से सरकारी राशि निकाली। यह जांच कट्टीवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।

अपराध से अर्जित रकम को राठौर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित कई बैंक खातों के माध्यम से लेयर किया गया। इसके बाद यह धनराशि नकद में निकालकर धार जिले की गंधवानी तहसील में कृषि भूमि की खरीद में लगाई गई।

मनी लॉन्ड्रिंग की परत: 'श्री बालाजी धाम' प्रोजेक्ट

अवैध रूप से अर्जित धन के स्रोत को छिपाने के लिए आरोपियों ने खरीदी गई कृषि भूमि पर 'श्री बालाजी धाम' नाम से एक आवासीय प्लॉटिंग परियोजना खड़ी की। इस कदम का उद्देश्य गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति को वैध निवेश के रूप में प्रस्तुत करना था। आगे की जांच में सामने आया कि इस कृषि भूमि को 56 आवासीय प्लॉट में परिवर्तित कर दिया गया था।

संपत्ति जब्ती और कोर्ट की कार्रवाई

ईडी ने पीएमएलए के तहत तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए और कई बैंक खाते फ्रीज किए। एजेंसी ने आरोपियों की ₹4.43 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया, जिसकी पुष्टि 10 मार्च को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने की। इसके बाद 23 जून के अस्थायी अटैचमेंट ऑर्डर के तहत सभी 56 प्लॉट भी जब्त कर लिए गए, जिनकी बाज़ार कीमत ₹6 करोड़ से अधिक आंकी गई है।

इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।

व्यापक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ईडी पूरे देश में सरकारी फंड के दुरुपयोग और शिक्षा विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ₹20.47 करोड़ का यह घोटाला एक ज़िला स्तरीय कार्यालय से इतनी बड़ी राशि के गबन की गंभीरता को रेखांकित करता है।

आगे की जांच जारी है और कोर्ट की अगली सुनवाई में आरोपियों की पेशी अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आवासीय परियोजनाओं और परिवार के बैंक खातों के जरिए 'वैध' बनाया जाता है। पाँच साल तक चले इस फर्जीवाड़े का पकड़ में न आना ट्रेजरी ऑडिट तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर करता है। ईडी की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि इतने वर्षों तक आंतरिक वित्तीय निगरानी ने इसे क्यों नहीं पकड़ा। शिक्षा विभाग के बजट में इस तरह की चोरी अंततः उन बच्चों की कीमत पर होती है जिनके लिए यह धन आवंटित था।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग ट्रेजरी घोटाला क्या है?
यह अलीराजपुर जिले के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय, कट्टीवाड़ा से ₹20.47 करोड़ की सरकारी राशि के गबन का मामला है। मुख्य आरोपी कमल राठौर और अन्य ने 2018 से 2023 के बीच फर्जी बिलों के जरिए अलीराजपुर ट्रेजरी से यह धन निकाला।
ईडी ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
ईडी ने पीएमएलए के तहत तलाशी ली, दस्तावेज जब्त किए, बैंक खाते फ्रीज किए और ₹4.43 करोड़ की संपत्ति कुर्क की। 23 जून के अटैचमेंट ऑर्डर से ₹6 करोड़ से अधिक मूल्य के 56 आवासीय प्लॉट भी जब्त किए गए। 10 जुलाई 2026 को इंदौर स्पेशल कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की गई।
'श्री बालाजी धाम' प्रोजेक्ट का मामले से क्या संबंध है?
'श्री बालाजी धाम' एक आवासीय प्लॉटिंग परियोजना है जो धार जिले की गंधवानी तहसील में बनाई गई। आरोप है कि घोटाले की रकम से खरीदी गई कृषि भूमि को 56 आवासीय प्लॉट में बदलकर इस परियोजना के नाम पर अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
इस मामले में कोर्ट की क्या स्थिति है?
इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने 10 जुलाई 2026 को दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट का संज्ञान ले लिया है और सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं। यह सप्लीमेंट्री शिकायत 29 सितंबर 2025 को दाखिल प्रारंभिक चार्जशीट पर आधारित है।
इस घोटाले में किसे सबसे अधिक नुकसान हुआ?
यह सरकारी शिक्षा बजट से जुड़ा मामला है, इसलिए अलीराजपुर जिले के उन विद्यार्थियों और शिक्षा संस्थानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ जिनके लिए यह धन आवंटित था। ₹20.47 करोड़ की यह राशि शिक्षा सुविधाओं और संसाधनों पर खर्च होनी थी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले