मध्य प्रदेश शिक्षा घोटाला: ईडी ने ₹20.47 करोड़ के अलीराजपुर ट्रेजरी फर्जीवाड़े में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के ब्लॉक शिक्षा कार्यालय (बीईओ), कट्टीवाड़ा से जुड़े ₹20.47 करोड़ के सरकारी फंड घोटाले में इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) के समक्ष एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। 10 जुलाई 2026 को दायर यह शिकायत 29 सितंबर 2025 को मुख्य आरोपी कमल राठौर और अन्य के विरुद्ध दर्ज की गई प्रारंभिक चार्जशीट का विस्तार है।
घोटाले का मुख्य घटनाक्रम
जांच के अनुसार, कमल राठौर ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 2018 से 2023 के बीच फर्जी बिलों को धोखाधड़ी से पास कराया और अलीराजपुर ट्रेजरी से गैरकानूनी तरीके से सरकारी राशि निकाली। यह जांच कट्टीवाड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
अपराध से अर्जित रकम को राठौर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर संचालित कई बैंक खातों के माध्यम से लेयर किया गया। इसके बाद यह धनराशि नकद में निकालकर धार जिले की गंधवानी तहसील में कृषि भूमि की खरीद में लगाई गई।
मनी लॉन्ड्रिंग की परत: 'श्री बालाजी धाम' प्रोजेक्ट
अवैध रूप से अर्जित धन के स्रोत को छिपाने के लिए आरोपियों ने खरीदी गई कृषि भूमि पर 'श्री बालाजी धाम' नाम से एक आवासीय प्लॉटिंग परियोजना खड़ी की। इस कदम का उद्देश्य गलत तरीके से हासिल की गई संपत्ति को वैध निवेश के रूप में प्रस्तुत करना था। आगे की जांच में सामने आया कि इस कृषि भूमि को 56 आवासीय प्लॉट में परिवर्तित कर दिया गया था।
संपत्ति जब्ती और कोर्ट की कार्रवाई
ईडी ने पीएमएलए के तहत तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए और कई बैंक खाते फ्रीज किए। एजेंसी ने आरोपियों की ₹4.43 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया, जिसकी पुष्टि 10 मार्च को एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने की। इसके बाद 23 जून के अस्थायी अटैचमेंट ऑर्डर के तहत सभी 56 प्लॉट भी जब्त कर लिए गए, जिनकी बाज़ार कीमत ₹6 करोड़ से अधिक आंकी गई है।
इंदौर की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ईडी पूरे देश में सरकारी फंड के दुरुपयोग और शिक्षा विभाग से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों में अपनी पकड़ मज़बूत कर रही है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में शिक्षा विभाग से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ₹20.47 करोड़ का यह घोटाला एक ज़िला स्तरीय कार्यालय से इतनी बड़ी राशि के गबन की गंभीरता को रेखांकित करता है।
आगे की जांच जारी है और कोर्ट की अगली सुनवाई में आरोपियों की पेशी अपेक्षित है।