रुचि एक्रोनी केस: ईडी ने ₹7.76 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं, यूको बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कार्रवाई
सारांश
Key Takeaways
- ईडी इंदौर ने 28 अप्रैल 2026 को रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (अब स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड) की ₹7.76 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां कुर्क कीं।
- कंपनी पर यूको बैंक, इंदौर के साथ धोखाधड़ी कर ₹58 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
- जांच की शुरुआत सीबीआई एसीबी भोपाल की एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत की गई।
- इससे पहले भी ईडी इस मामले में ₹10.15 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है; कुल कुर्की ₹17.91 करोड़ से अधिक।
- कंपनी ने जाली दस्तावेजों के आधार पर 'लेटर ऑफ क्रेडिट' हासिल किए और जटिल कंपनी नेटवर्क के ज़रिए धन को वैध दिखाने की कोशिश की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंदौर उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने 28 अप्रैल 2026 को रुचि एक्रोनी इंडस्ट्रीज लिमिटेड — जिसे अब स्टीलटेक रिसोर्सेज लिमिटेड के नाम से जाना जाता है — से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹7.76 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। कुर्क की गई संपत्तियां कंपनी के नाम पर दर्ज भूमि के टुकड़ों के रूप में हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने इस मामले में जांच की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एसीबी भोपाल शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने यूको बैंक, इंदौर के साथ धोखाधड़ी कर ₹58 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी ने बेईमानी से अपनी समूह कंपनियों में निवेश किया और सहयोगी तथा संबंधित संस्थाओं को ऋण व अग्रिम राशि देकर धन का हेरफेर किया।
धोखाधड़ी का तरीका
जांच में सामने आया कि कंपनी ने क्रेडिट सुविधाएं और 'लेटर ऑफ क्रेडिट' जाली, मनगढ़ंत तथा हेरफेर किए गए दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए, जिनके पीछे कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी। इन माध्यमों से प्राप्त धन को योजनाबद्ध तरीके से अन्यत्र स्थानांतरित किया गया और परतें बनाकर आपस में जुड़ी कंपनियों के जटिल नेटवर्क के ज़रिए वापस उसी उधार लेने वाली इकाई तक पहुंचाया गया। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से अवैध रूप से निकाले गए धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई और बाद में इसका उपयोग विभिन्न अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
पहले भी हो चुकी है कुर्की
यह ऐसी पहली कार्रवाई नहीं है। ईडी इंदौर इससे पहले भी इस प्रकरण में ₹10.15 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है। इस प्रकार अब तक इस मामले में कुल कुर्क संपत्तियों का मूल्य ₹17.91 करोड़ से अधिक हो गया है। गौरतलब है कि यह मामला वित्तीय अनियमितताओं और संगठित तरीके से किए गए धन के दुरुपयोग का उदाहरण बताया जा रहा है।
आगे की कार्रवाई
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में संगठित धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते मामलों की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिन पर ईडी पिछले कुछ वर्षों में लगातार शिकंजा कस रही है।