एआई समिट विरोध मामला: दिल्ली पुलिस ने 18 आरोपियों के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की

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एआई समिट विरोध मामला: दिल्ली पुलिस ने 18 आरोपियों के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की

सारांश

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने भारत मंडपम एआई समिट विरोध मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करना था।

Key Takeaways

  • दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 28 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
  • यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदयभानु चिब को मुख्य साजिशकर्ता नामित किया गया; श्री कृष्णा हरि, सिद्धार्थ अवधूत और मनीष शर्मा भी प्रमुख आरोपी।
  • घटना फरवरी में भारत मंडपम में हुई, जहाँ हाई सिक्योरिटी एरिया में 9 लोगों ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया और 4 को गिरफ्तार किया गया।
  • समिट में 100 से अधिक देश शामिल थे, जिनमें 92 देश और यूरोपीय संघ के सदस्य भी थे।
  • पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन का मकसद कथित तौर पर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करना था।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने मंगलवार, 28 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट में भारत मंडपम एआई समिट विरोध-प्रदर्शन मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन आरोपियों ने समिट के दौरान हंगामा करने और भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बदनाम करने की सुनियोजित साजिश रची थी। यह मामला फरवरी में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए प्रदर्शन से जुड़ा है।

मुख्य आरोपी और आरोप

चार्जशीट में यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभानु चिब को इस पूरे प्रकरण का मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। इसके अलावा यूथ कांग्रेस से जुड़े श्री कृष्णा हरि, सिद्धार्थ अवधूत और मनीष शर्मा को भी प्रमुख आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन सभी ने मिलकर समन्वित तरीके से हंगामे की तैयारी की थी।

घटनाक्रम: क्या हुआ था समिट के दिन

पुलिस के अनुसार, फरवरी में भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान हाई सिक्योरिटी एरिया में कुल 12 लोग मौजूद थे, जिनमें से 9 लोगों ने शर्ट उतारकर विरोध-प्रदर्शन किया। मौके पर 4 लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया गया था।

अंतरराष्ट्रीय महत्व और पुलिस का तर्क

पुलिस ने इससे पहले मार्च में अदालत को बताया था कि इस एआई समिट में 100 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया था, जिनमें 92 देश और यूरोपीय संघ के सदस्य भी शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि यह अपनी तरह का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय एआई आयोजन था और कथित तौर पर इस प्रदर्शन का मकसद इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचाना था।

आगे क्या होगा

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा। अदालत आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने पर फैसला करेगी। यूथ कांग्रेस की ओर से अभी तक इस चार्जशीट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, और यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।

Point of View

विरोध-प्रदर्शन और राष्ट्रविरोधी गतिविधि के बीच की रेखा को धुंधला करता है। गौरतलब है कि अब तक यूथ कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि बचाव पक्ष इन आरोपों को किस तरह चुनौती देगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और राष्ट्रीय छवि की रक्षा — दोनों के बीच संतुलन का यह मामला अदालत में कड़ी परीक्षा से गुज़रेगा।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

एआई समिट विरोध मामले में चार्जशीट क्या है?
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 28 अप्रैल को पटियाला हाउस कोर्ट में 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इन पर फरवरी में भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान हंगामा करने और सुनियोजित साजिश रचने का आरोप है।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन हैं?
यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदयभानु चिब को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। इसके अलावा श्री कृष्णा हरि, सिद्धार्थ अवधूत और मनीष शर्मा को भी प्रमुख आरोपी बनाया गया है।
एआई समिट के दिन क्या हुआ था?
फरवरी में भारत मंडपम के हाई सिक्योरिटी एरिया में 12 लोग मौजूद थे, जिनमें से 9 ने शर्ट उतारकर विरोध-प्रदर्शन किया। मौके पर 4 लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया गया था।
यह एआई समिट कितना बड़ा आयोजन था?
पुलिस के अनुसार इस समिट में 100 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया था, जिनमें 92 देश और यूरोपीय संघ के सदस्य शामिल थे। यह अपनी तरह का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय एआई आयोजन बताया जाता है।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
चार्जशीट दाखिल होने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने पर फैसला करेगी। इसके बाद आरोप तय होंगे और मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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