बैंक ऑफ बड़ौदा ₹255 करोड़ धोखाधड़ी: ईडी ने मुंबई-दिल्ली के 11 ठिकानों पर मारे छापे, करोड़ों जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 10 सितंबर 2026 को बैंक ऑफ बड़ौदा से कथित तौर पर ₹255.74 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुंबई और नई दिल्ली के 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई अलफारा इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (AIPL) और उसके निदेशकों तथा करीबी सहयोगियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की मुंबई जोनल कार्यालय-1 ने यह जाँच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की आर्थिक अपराध शाखा, चेन्नई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की, जो बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर आधारित थी। ईडी के अनुसार, सिविल निर्माण क्षेत्र की कंपनी AIPL ने 2012 में बैंक से ₹103 करोड़ की क्रेडिट सुविधा ली थी, जिसे 2015 में बढ़ाकर ₹360.50 करोड़ कर दिया गया। 18 जून 2018 को कंपनी का खाता एनपीए (NPA) घोषित हुआ, उस समय बैंक का बकाया ₹255.74 करोड़ था।
धोखाधड़ी का तरीका
जाँच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि कंपनी ने ₹75.02 करोड़ के लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) डिवॉल्व कराए और लगभग ₹164.59 करोड़ की बैंक गारंटी (BG) इनवोक कराई, जिससे कथित 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' उत्पन्न हुई। इस राशि को विभिन्न लाभार्थी और बिचौलिया कंपनियों के ज़रिए कई स्तरों पर घुमाकर दोबारा AIPL और उसकी समूह कंपनियों तक पहुँचाया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके।
ईडी ने यह भी पाया कि कंपनी ने ग्लेज्ड टाइल्स के निर्यात के नाम पर विदेशी बैंक गारंटी खुलवाई, जबकि वास्तविक निर्यात नहीं हुआ। इस माध्यम से धन सिंगापुर और हांगकांग स्थित विदेशी कंपनियों को भेजा गया। एलसी और बीजी के भुगतान न होने से बैंक को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
छापेमारी में क्या मिला
ईडी ने तलाशी के दौरान ₹18 लाख नकद, 9,567 अमेरिकी डॉलर और 860 क्वाचा विदेशी मुद्रा जब्त की। इसके अतिरिक्त लगभग ₹1.02 करोड़ की एफडी, करीब 1.75 करोड़ जापानी येन और 1,03,145 अमेरिकी डॉलर की जमा राशि फ्रीज की गई। बैंक लेनदेन, लेटर ऑफ क्रेडिट, बैंक गारंटी और अचल संपत्तियों से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और रिकॉर्ड भी जब्त किए गए।
जाँच की स्थिति और आगे की कार्रवाई
ईडी का कहना है कि जब्त दस्तावेज़ों से मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क और अपराध से अर्जित आय के वित्तीय प्रवाह की पुष्टि होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह मामला सीबीआई की जाँच के समानांतर चल रहा है, जो इसे बहु-एजेंसी वित्तीय अपराध जाँच बनाता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की आगे की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।