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मोबाइल फोन पर GST 18% से घटाकर 5% करो: ICEA की सरकार से माँग, 25 करोड़ फीचर फोन यूज़र्स पर दाँव

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मोबाइल फोन पर GST 18% से घटाकर 5% करो: ICEA की सरकार से माँग, 25 करोड़ फीचर फोन यूज़र्स पर दाँव

सारांश

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन चुका है, पर 25 करोड़ लोग अभी भी फीचर फोन पर हैं। ICEA का कहना है: GST को 18% से 5% करो — तभी असली डिजिटल समावेश होगा और घरेलू माँग विनिर्माण की रफ़्तार से कदम मिला सकेगी।

मुख्य बातें

ICEA ने 14 सितंबर 2026 को सरकार से मोबाइल फोन पर GST 18% से घटाकर 5% करने की माँग की।
भारत में अभी भी करीब 25 करोड़ लोग फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं; ऊँची कीमतें प्रमुख बाधा हैं।
मोबाइल फोन निर्माण ₹18,900 करोड़ (FY2014-15) से बढ़कर ₹6.27 लाख करोड़ (FY2025-26) हुआ; निर्यात ₹2.60 लाख करोड़ पर पहुँचा।
भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता ; FY26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद ।
AI डेटा सेंटर माँग से DRAM और NAND मेमोरी की वैश्विक आपूर्ति में दबाव, जिससे निर्माण लागत बढ़ी।
ICEA ने 2025 में भी GST समीक्षा के दौरान यही माँग उठाई थी।

इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने 14 सितंबर 2026 को केंद्र सरकार से मोबाइल फोन पर लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) को मौजूदा 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने की औपचारिक माँग की है। उद्योग संगठन का कहना है कि यह प्रस्ताव GST परिषद की अगली बैठक में रखा जाए, ताकि स्मार्टफोन को कम आय और ग्रामीण परिवारों के लिए किफायती बनाया जा सके।

समस्या की जड़: 25 करोड़ फीचर फोन उपयोगकर्ता

ICEA के अनुसार, भारत में अभी भी करीब 25 करोड़ लोग फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। स्मार्टफोन की ऊँची कीमतें इन उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी बाधा हैं। संगठन का तर्क है कि आज स्मार्टफोन केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और बैंकिंग तक पहुँच का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में GST कटौती सीधे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में समावेश को गहरा करेगी।

निर्माण में उछाल, घरेलू माँग में सुस्ती

ICEA ने बताया कि भारत में मोबाइल फोन निर्माण वित्त वर्ष 2014-15 के ₹18,900 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹6.27 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। इसी अवधि में निर्यात ₹1,566 करोड़ से उछलकर ₹2.60 लाख करोड़ हो गया। भारत अब मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है और वित्त वर्ष 2025-26 में मोबाइल फोन देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा।

हालाँकि, संगठन ने चेताया कि इस उत्पादन की उपलब्धि के बावजूद घरेलू माँग उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ी है। हैंडसेट खपत कमज़ोर पड़ी है, मोबाइल बदलने का चक्र लंबा हो गया है और एंट्री-लेवल स्मार्टफोन सेगमेंट दबाव में है।

वैश्विक आपूर्ति दबाव ने बढ़ाई लागत

ICEA ने यह भी रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित डेटा सेंटरों की बढ़ती माँग के कारण वैश्विक स्तर पर मोबाइल DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे मोबाइल फोन निर्माण लागत में वृद्धि हुई है। निर्माता इस अतिरिक्त लागत का केवल एक हिस्सा ही अपने स्तर पर वहन कर पाते हैं, शेष उपभोक्ता मूल्य में स्थानांतरित होती है।

GST कटौती से क्या बदलेगा

ICEA के अनुसार, GST दर 18% से 5% होने पर स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत घटेगी, पहली बार स्मार्टफोन खरीदने वाले उपभोक्ताओं को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक लोग औपचारिक डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ सकेंगे। गौरतलब है कि संगठन ने वर्ष 2025 में GST ढाँचे की समीक्षा के दौरान भी इसी माँग की वकालत की थी, जब कई उपभोक्ता श्रेणियों में कर दरें कम की गई थीं।

व्यापक असर: निवेश और उत्पादन क्षमता

उद्योग संगठन का मानना है कि बड़ा घरेलू बाज़ार मोबाइल फोन बिक्री बढ़ाएगा, औपचारिक बाज़ार को मज़बूत करेगा, उत्पादन क्षमता के बेहतर उपयोग में मदद करेगा और भारत के मोबाइल फोन एवं कंपोनेंट विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में नए निवेश को आकर्षित करेगा। यह माँग ऐसे समय में आई है जब सरकार मैन्युफैक्चरिंग को GDP का बड़ा हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है — और घरेलू खपत इस महत्वाकाँक्षा की धुरी बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि GST कटौती से राजस्व नुकसान की भरपाई कैसे होगी — और क्या सरकार इसे 'विकास-हितैषी कर सुधार' के रूप में फ्रेम कर GST परिषद में सहमति बना सकती है। घरेलू माँग और निर्यात के बीच यह खाई एक गहरी संरचनात्मक समस्या है: भारत फोन बना तो रहा है, लेकिन अपने ही नागरिक उन्हें खरीद नहीं पा रहे। सिर्फ कर कटौती पर्याप्त नहीं होगी — ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढाँचे और आसान किस्त योजनाओं के बिना माँग सीमित रहेगी। यह माँग 2025 की GST समीक्षा में भी उठी थी और तब भी अनसुनी रही — इस बार जवाबदेही की माँग और स्पष्ट होनी चाहिए।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ICEA ने मोबाइल फोन पर GST घटाने की माँग क्यों की है?
ICEA का कहना है कि 18% GST के कारण स्मार्टफोन की कीमतें ऊँची हैं, जिससे देश के करीब 25 करोड़ फीचर फोन उपयोगकर्ता स्मार्टफोन नहीं खरीद पा रहे। GST घटाकर 5% करने से डिवाइस सस्ती होगी और अधिक लोग डिजिटल सेवाओं से जुड़ सकेंगे।
अभी मोबाइल फोन पर कितना GST लगता है और प्रस्ताव क्या है?
फिलहाल मोबाइल फोन पर 18% GST लागू है। ICEA ने इसे घटाकर 5% करने की माँग की है और चाहती है कि यह प्रस्ताव GST परिषद की अगली बैठक में रखा जाए।
भारत में मोबाइल फोन निर्माण और निर्यात की स्थिति क्या है?
ICEA के आँकड़ों के अनुसार, भारत में मोबाइल फोन निर्माण FY2014-15 के ₹18,900 करोड़ से बढ़कर FY2025-26 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया है। निर्यात ₹1,566 करोड़ से उछलकर ₹2.60 लाख करोड़ पहुँचा और मोबाइल फोन FY26 में देश का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद रहा।
GST कटौती से आम उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
ICEA के अनुसार, GST घटने से स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत कम होगी, पहली बार खरीदने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन मिलेगा और अधिक लोग डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं, शिक्षा और बैंकिंग जैसी सुविधाओं से जुड़ सकेंगे।
क्या ICEA पहले भी यह माँग उठा चुकी है?
हाँ, ICEA ने वर्ष 2025 में GST ढाँचे की समीक्षा के दौरान भी मोबाइल फोन पर GST घटाने की वकालत की थी। उस समय कई उपभोक्ता श्रेणियों में कर दरें कम की गई थीं, लेकिन मोबाइल फोन पर कोई बदलाव नहीं हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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