मई 2026 में जीएसटी संग्रह ₹1,94,184 करोड़, सालाना 3.2% वृद्धि; आयात राजस्व में 19% उछाल
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 1 जून 2026 को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद मई 2026 में सकल वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1,94,184 करोड़ पर पहुँच गया, जो करीब ₹2 लाख करोड़ के स्तर को छूता है। पिछले वर्ष मई में यह आँकड़ा ₹1,88,172 करोड़ था।
मुख्य आंकड़े: सकल और शुद्ध राजस्व
कुल शुद्ध जीएसटी राजस्व 3.3 प्रतिशत बढ़कर ₹1,66,904 करोड़ रहा। माह के दौरान कुल रिफंड 2.6 प्रतिशत बढ़कर ₹27,281 करोड़ हो गया। रिफंड समायोजन के बाद मई 2026 में सकल जीएसटी राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत रही, जबकि समायोजित घरेलू सकल जीएसटी वृद्धि करीब 5 प्रतिशत आंकी गई।
सकल घरेलू जीएसटी राजस्व ₹1,34,530 करोड़ रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 2.6 प्रतिशत कम है। हालाँकि, आयात से प्राप्त सकल जीएसटी राजस्व में तेज़ उछाल दर्ज हुआ — यह सालाना आधार पर 19.1 प्रतिशत बढ़कर ₹59,654 करोड़ पहुँच गया।
आधार-प्रभाव और एकमुश्त भुगतान का असर
गौरतलब है कि मई 2025 के जीएसटी संग्रह में एक दूरसंचार कंपनी द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए किए गए लगभग ₹10,000 करोड़ के एकमुश्त भुगतान का भी योगदान था। इस असाधारण मद को हटाकर देखें तो मई 2026 में समायोजित शुद्ध जीएसटी राजस्व वृद्धि लगभग 10 प्रतिशत रही, जो वास्तविक आर्थिक गतिविधि की बेहतर तस्वीर पेश करती है।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों का प्रदर्शन
अप्रैल में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.7 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड ₹2,42,702 करोड़ पर पहुँचा था, जो अब तक का सर्वोच्च मासिक संग्रह है। रिफंड समायोजन के बाद अप्रैल का शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹2,10,909 करोड़ रहा — सालाना 7.3 प्रतिशत की वृद्धि।
वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) में कुल सकल जीएसटी संग्रह 6.2 प्रतिशत बढ़कर ₹4.37 लाख करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह ₹4.11 लाख करोड़ था। शुद्ध जीएसटी राजस्व 5.5 प्रतिशत बढ़कर ₹3.78 लाख करोड़ पहुँचा। सरकार के अनुसार, यह प्रदर्शन पूरे वर्ष के जीएसटी राजस्व लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
घरेलू माँग और सेवा क्षेत्र की मज़बूती
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अप्रैल 2026-27 में वस्तुओं से जुड़ी कर योग्य आपूर्ति में 26.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि सभी 27 प्रमुख वस्तु श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली, जो घरेलू माँग की व्यापक मज़बूती का प्रमाण है। सेवा क्षेत्र ने भी कर योग्य आपूर्ति में 22.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और सभी प्रमुख सेवा श्रेणियों में सकारात्मक रुझान रहा।
राज्यों का प्रदर्शन
राज्यवार आँकड़ों के अनुसार, केरल ने 19 प्रतिशत की सर्वाधिक एसजीएसटी वृद्धि दर्ज की। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में 11-11 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 9 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 8 प्रतिशत और गुजरात में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आईजीएसटी सेटलमेंट के बाद हरियाणा ने 22 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की, जबकि कर्नाटक में 17 प्रतिशत, गुजरात और आंध्र प्रदेश में 16-16 प्रतिशत, केरल में 15 प्रतिशत और तेलंगाना में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताएँ भारत की कर-राजस्व वृद्धि को चुनौती दे रही हैं। आने वाले महीनों में आयात-आधारित राजस्व की रफ्तार और घरेलू खपत का रुझान यह तय करेगा कि वार्षिक जीएसटी लक्ष्य समय पर हासिल होता है या नहीं।