जीएसटी संग्रह जून में 13.9% उछला, ₹1.94 लाख करोड़ पर पहुँचा; नौ साल पूरे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में सकल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) संग्रह सालाना आधार पर 13.9 प्रतिशत बढ़कर ₹1,94,812 करोड़ पर पहुँच गया। जून 2025 में यह आंकड़ा ₹1,71,105 करोड़ था। ठीक इसी दिन जीएसटी को देशभर में लागू हुए नौ वर्ष भी पूरे हो गए।
संग्रह का विस्तृत विवरण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल सकल जीएसटी में सीजीएसटी (केंद्रीय जीएसटी) का योगदान ₹37,376 करोड़, एसजीएसटी (राज्य जीएसटी) का ₹45,116 करोड़ और आईजीएसटी (एकीकृत जीएसटी) का ₹1,12,320 करोड़ रहा। आईजीएसटी में आयात से प्राप्त ₹60,038 करोड़ की राशि भी सम्मिलित है।
जून में जीएसटी रिफंड ₹32,436 करोड़ रहा, जो जून 2025 के ₹25,121 करोड़ की तुलना में 29.1 प्रतिशत अधिक है। रिफंड को घटाने के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹1,62,377 करोड़ रहा — जून 2025 के ₹1,45,984 करोड़ के मुकाबले 11.2 प्रतिशत की वृद्धि।
पहली तिमाही का प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी संग्रह ₹6,31,699 करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह ₹5,82,542 करोड़ था — सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ का रिफंड जारी किया, जिससे तिमाही का शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ पर आ गया।
शीर्ष पाँच राज्यों का योगदान
जून में जीएसटी संग्रह में सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़) पहले स्थान पर रहा। इसके बाद गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का स्थान रहा। महाराष्ट्र का वर्चस्व देश की औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों की केंद्रीयता को रेखांकित करता है।
जीएसटी के नौ साल: एक नज़र
1 जुलाई 2017 को लागू किया गया जीएसटी आजादी के बाद का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाता है। इसने वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), सेल्स टैक्स सहित दर्जनों अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर 'एक देश, एक कर' की अवधारणा को साकार किया। गौरतलब है कि नौ वर्षों में जीएसटी संग्रह ने कई बार रिकॉर्ड तोड़े हैं, जो कर अनुपालन में सुधार और अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण का संकेत देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार राजकोषीय मज़बूती की दिशा में कदम बढ़ा रही है। आने वाले महीनों में त्योहारी सीज़न और बढ़ती उपभोक्ता माँग से जीएसटी संग्रह को और गति मिलने की उम्मीद है।