तृणमूल नेता श्यामल मित्रा गिरफ्तार: वसूली, मारपीट और धमकी के आरोप, कोर्ट ले जाते वक्त फेंके अंडे
सारांश
मुख्य बातें
हावड़ा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मेयर-इन-काउंसिल (MMIC) के पूर्व सदस्य और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता श्यामल मित्रा को पुलिस ने कोलकाता के न्यू टाउन इलाके से गिरफ्तार किया है। उन पर जबरन वसूली, डराने-धमकाने और मारपीट के कई गंभीर आरोप हैं। पूर्व राज्य मंत्री अरूप रॉय के करीबी माने जाने वाले मित्रा को शनिवार को हावड़ा कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ कोर्ट परिसर के बाहर लोगों के एक समूह ने उन पर अंडे फेंके और कथित तौर पर मारपीट भी की।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, 4 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद दोपहर में काउंटिंग के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर पप्पू यादव की अगुवाई में एक पुलिस टीम ने हावड़ा मैदान की ओर जा रहे एक जुलूस को रोका। पुलिस का दावा है कि जुलूस में 400 से 500 लोग शामिल थे, जिनके हाथों में तृणमूल कांग्रेस के झंडे थे और वे बिना प्रशासनिक अनुमति के नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, जुलूस में शामिल लोगों को चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन की चेतावनी दी गई, लेकिन वे रुके नहीं और कथित तौर पर आक्रामक हो गए। आरोप है कि भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें सब-इंस्पेक्टर पप्पू यादव समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कुछ को अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।
शिकायतकर्ता का बयान
शिबपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराने वाले शुभजीत चट्टोपाध्याय ने आरोप लगाया कि 10 अप्रैल की रात हावड़ा के मंदिरतला में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्टी कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान श्यामल मित्रा और उनके साथियों ने उन पर हमला किया।
चट्टोपाध्याय के अनुसार, मित्रा ने उन्हें बंदूक दिखाकर धमकाया और ₹1.5 लाख की माँग की। मना करने पर कथित तौर पर बंदूक के बट से उनके सिर पर मारा गया। उस समय उनके पास मौजूद ₹1,030 रुपए भी जान से मारने की धमकी देकर छीन लिए गए।
कोर्ट में पेशी के दौरान हंगामा
शनिवार को जब श्यामल मित्रा को शिबपुर पुलिस स्टेशन से हावड़ा कोर्ट ले जाया जा रहा था, तो लोगों के एक समूह ने उन पर अंडे फेंके। आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में ही उनके साथ मारपीट भी की गई। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए उन्हें कोर्ट तक सुरक्षित पहुँचाया और हालात को और बिगड़ने से रोका।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से राजनीतिक हिंसा और पार्टी कार्यकर्ताओं पर हमलों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। श्यामल मित्रा पर लगे आरोप तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, क्योंकि वे पूर्व राज्य मंत्री अरूप रॉय के करीबी माने जाते हैं। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब TMC के किसी स्थानीय नेता पर वसूली या हिंसा के आरोप सामने आए हों।
आगे क्या होगा
मामले की जाँच शिबपुर पुलिस स्टेशन कर रहा है। कोर्ट में पेशी के बाद मित्रा की न्यायिक हिरासत या जमानत पर अगली सुनवाई होगी। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जाँच जारी है। यह देखना होगा कि तृणमूल कांग्रेस का नेतृत्व इस मामले में क्या रुख अपनाता है।