तृणमूल नेता शाहिदुल शेख चेन्नई से गिरफ्तार, व्यापारी पर हमले और दुकान जलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज स्थित बिशपुर पंचायत के उप प्रमुख और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता शाहिदुल शेख को शनिवार रात चेन्नई से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, शेख पर स्थानीय व्यापारी निताई दास के साथ मारपीट करने और उनकी दुकान में आग लगाने का आरोप है। घटना के बाद से फरार चल रहे शेख को हसनाबाद पुलिस स्टेशन की एक टीम और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने संयुक्त अभियान में दबोचा।
मुख्य घटनाक्रम
18 मई को हिंगलगंज के बैलाणी बाजार में कथित तौर पर तृणमूल नेता शेख और उनके सहयोगियों ने व्यापारी निताई दास के साथ मारपीट की। आरोप है कि उसी रात दास की दुकान में आग लगा दी गई, जिससे उन्हें कई लाख रुपए का नुकसान हुआ।
घटना की जाँच के बाद हसनाबाद पुलिस स्टेशन ने शेख की तलाश शुरू की। एक सूत्र से जानकारी मिलने पर पुलिस टीम चेन्नई रवाना हुई और फोन टावर लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए शेख का ठिकाना पता लगाया गया।
पुराने आरोपों की लंबी सूची
यह पहला मामला नहीं है जब शेख के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई हो। पुलिस के अनुसार, इससे पहले उनके विरुद्ध पंचायत निधि में गबन, आवास योजना के तहत घर दिलाने के नाम पर धन वसूली, बमबारी और धमकी देने जैसे मामले भी दर्ज हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में स्थानीय जन-प्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक आरोपों पर नज़रें टिकी हैं।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, 'फोन की टावर लोकेशन को ट्रैक किया गया और पता चला कि शेख चेन्नई में छिपा हुआ है। हसनाबाद पुलिस स्टेशन की टीम SOG के साथ मिलकर शनिवार रात उसे गिरफ्तार करने में सफल रही।'
पुलिस के अनुसार, शेख को पहले चेन्नई की अदालत में पेश किया जाएगा जहाँ ट्रांजिट रिमांड की माँग की जाएगी। इसके बाद उसे हसनाबाद लाया जाएगा।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
बसीरहाट जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, शेख को रविवार शाम हसनाबाद लाया जाएगा। इसके बाद सोमवार को उसे बसीरहाट सब-डिविजन कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहाँ पुलिस आरोपी की कस्टडी की माँग करेगी।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना में शामिल अन्य आरोपियों की भी तलाश जारी है और उनकी भूमिका की जाँच की जा रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पंचायत स्तर के जन-प्रतिनिधियों से जुड़े आपराधिक मामलों की यह कोई पहली घटना नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य में स्थानीय नेताओं के आपराधिक कृत्यों की बढ़ती शिकायतें शासन और जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं। शेख की गिरफ्तारी यह भी दर्शाती है कि अंतर-राज्यीय पुलिस समन्वय तेज़ हुआ है।