आसनसोल में तृणमूल पार्षद तरुण चक्रवर्ती गिरफ्तार, सरकारी राहत सामग्री जमाखोरी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले में आसनसोल नगर निगम के वार्ड 87 से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पार्षद तरुण चक्रवर्ती को मंगलवार, 2 जून को कथित तौर पर अपने आवास पर गरीबों के लिए आवंटित सरकारी राहत सामग्री जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके घर से बड़ी मात्रा में राहत पैकेज बरामद कर जब्त कर लिए हैं।
गिरफ्तारी और बरामदगी का ब्यौरा
पुलिस के अनुसार, तरुण चक्रवर्ती के आवास पर छापेमारी के दौरान वे राहत पैकेज मिले जो क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमज़ोर तबके के लोगों तक पहुँचाए जाने थे। समस्त जब्त सामग्री को पुलिस ने अपनी अभिरक्षा में ले लिया है। गिरफ्तार पार्षद को आसनसोल की एक स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा।
अतिरिक्त गंभीर आरोप
राहत सामग्री की जमाखोरी के अलावा, चक्रवर्ती पर कई अन्य संगीन आरोप भी लगाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक उन पर अवैध रेत व्यापार में संलिप्तता और आवास परियोजनाओं के तहत वित्तीय सहायता दिलाने के नाम पर गरीब लाभार्थियों से वसूली करने के आरोप हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हिरासत में पूछताछ के दौरान इन सभी आरोपों की विधिवत जाँच की जाएगी और आरोप सिद्ध होने पर कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दो अन्य TMC कार्यकर्ता भी गिरफ्तार
इसी क्रम में तृणमूल कांग्रेस के दो अन्य कार्यकर्ताओं — अनिरुद्ध बाघ और बलबीर सिंह — को भी मंगलवार को गिरफ्तार किया गया। इन तीनों पर जानीपुर के एक स्थानीय निवासी को धमकाने और उससे जबरन धन वसूलने का आरोप है। दोनों को सोमवार रात कानाईपुर इलाके से हिरासत में लिया गया था और उन्हें श्रीरामपुर की अदालत में पेश किया जाएगा।
नदिया में भी इसी तरह की कार्रवाई
गौरतलब है कि यह पहली ऐसी घटना नहीं है। इससे पहले नदिया जिले की कृष्णानगर पुलिस ने TMC-संचालित नवद्वीप नगर पालिका के अध्यक्ष बिमान कृष्ण साहा को उनके आवास के निकट एक स्थानीय क्लब भवन में अवैध रूप से राहत सामग्री जमा करने के आरोप में हिरासत में लिया था। उस छापेमारी में क्लब के दस कमरों से तिरपाल, कंबल और साड़ियाँ सहित भारी मात्रा में राहत सामग्री बरामद हुई थी।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं की कथित अवैध गतिविधियों पर प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई तेज़ हो गई है। आलोचकों का कहना है कि राहत सामग्री की जमाखोरी सबसे कमज़ोर तबके के लोगों को सीधे नुकसान पहुँचाती है, जिनके लिए यह सहायता आवंटित की जाती है। आने वाले दिनों में इन मामलों की न्यायिक सुनवाई से स्थिति और स्पष्ट होगी।