कोलकाता: भ्रष्टाचार के आरोप में एक और TMC पार्षद गिरफ्तार, KMC में अब तक तीन गिरफ्तारियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने कोलकाता नगर निगम (KMC) के एक और तृणमूल कांग्रेस पार्षद को जबरन वसूली और भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार किया है, जिसके साथ ही पिछले कुछ हफ्तों में इन आरोपों में पकड़े गए KMC के तृणमूल पार्षदों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। पुलिस ने बुधवार, 3 जून को बताया कि वार्ड नंबर 106 के पार्षद अरिजीत दास ठाकुर को मंगलवार रात गरफा थाने की टीम ने हिरासत में लिया।
मुख्य घटनाक्रम
कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दास ठाकुर पर आरोप है कि वे स्थानीय प्रमोटरों और कारोबारियों को धमकाकर कथित तौर पर पैसे वसूल रहे थे। एक लिखित शिकायत में कहा गया था कि वे लंबे समय से इलाके में निर्माण और व्यापारिक मामलों में दखल देकर वसूली की कोशिश कर रहे थे।
अधिकारियों ने पहले पार्षद को पूछताछ के लिए बुलाया और लंबी पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जाँच में शिकायत के तथ्यों की पुष्टि हुई।
एक दिन पहले सचिन सिंह की गिरफ्तारी
इससे पहले मंगलवार को नारकेलडांगा थाने की पुलिस ने वार्ड नंबर 36 के तृणमूल पार्षद सचिन सिंह को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया था। लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) के सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के समय सिंह के घर के सामने स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन भी किया और आरोप लगाया कि वे विरोधियों को धमकाने और पीटने में भी शामिल रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सिंह पर 2021 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद हुई चुनावी हिंसा में कथित संलिप्तता का भी आरोप है। उसी वर्ष उन्होंने पहली बार तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर KMC चुनाव जीता था।
तीसरी कड़ी: सुदीप पोले की गिरफ्तारी
23 मई को ठाकुरपुकुर पुलिस ने वार्ड नंबर 123 के तृणमूल पार्षद और बोरो नंबर 16 के चेयरमैन सुदीप पोले को भी जबरन वसूली के एक मामले में गिरफ्तार किया था। इन तीनों गिरफ्तारियों ने KMC में सत्तारूढ़ दल के पार्षदों पर लग रहे आरोपों की एक स्पष्ट कड़ी सामने रख दी है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि पिछले एक महीने में राज्यभर में बड़ी संख्या में तृणमूल पार्षदों को भ्रष्टाचार और उगाही के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। आलोचकों का कहना है कि यह कार्रवाई स्थानीय निकायों में कथित ‘कट मनी’ संस्कृति पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करती है, जबकि सत्तारूढ़ दल के समर्थक इसे चुनिंदा कार्रवाई बता रहे हैं।
आगे क्या
पुलिस ने संकेत दिया है कि गिरफ्तार पार्षदों से पूछताछ के आधार पर अन्य नामों की भी जाँच की जा सकती है। गिरफ्तार पार्षदों को अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ रिमांड और जमानत पर सुनवाई होगी।