ममता बनर्जी स्कूटर से पहुंचीं पद्मपुकुर, तृणमूल नेता कुणाल घोष और बैश्वनोर चटर्जी हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी शनिवार, 25 जुलाई को स्कूटर पर सवार होकर कोलकाता के पद्मपुकुर इलाके पहुंचीं, जब पुलिस ने उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कुणाल घोष और बैश्वनोर चटर्जी को हिरासत में ले लिया। नीट परीक्षा प्रश्न पत्र लीक के विरोध में निकाले जाने वाले जुलूस को लेकर पुलिस और तृणमूल कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प के बाद यह गिरफ्तारियाँ हुईं।
मुख्य घटनाक्रम
तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) और TMC की आईटी सेल ने पद्मपुकुर से सीआईटी रोड होते हुए मौलाली चौराहे तक मार्च का आह्वान किया था। दोपहर से ही पार्टी नेता डोला सेन, कुणाल घोष और बैश्वनोर चट्टोपाध्याय समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पद्मपुकुर में इकट्ठा होने लगे थे।
तृणमूल का दावा है कि पुलिस ने पहले जुलूस की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया। TMCP अध्यक्ष प्रियंका अधिकारी को ईमेल के ज़रिए सूचित किया गया कि शुक्रवार को वामपंथियों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई अशांति के कारण अनुमति नहीं दी जा सकती।
कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला
अनुमति वापस लिए जाने के बाद TMCP ने कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। न्यायालय ने अवकाश के दिन भी याचिका पर सुनवाई की, लेकिन शुक्रवार की अशांति को आधार बनाते हुए याचिका खारिज कर दी और जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
पुलिस-कार्यकर्ता झड़प और गिरफ्तारियाँ
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने पद्मपुकुर से भीड़ को हटाने की कार्रवाई शुरू की, जिसके चलते तृणमूल नेताओं, कार्यकर्ताओं और पुलिसकर्मियों के बीच तनाव और झड़प हुई। इसी दौरान कुणाल घोष और बैश्वनोर चटर्जी को हिरासत में ले लिया गया।
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया
गिरफ्तारी की खबर मिलते ही ममता बनर्जी पार्टी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन के साथ मौके पर पहुंचीं और बाद में स्कूटर से कालीघाट स्थित अपने आवास लौट गईं। घर पहुंचने के बाद उन्होंने फेसबुक लाइव के ज़रिए अपना पक्ष रखा और सवाल उठाया कि अगर अन्य दलों को रैलियों की अनुमति दी जा रही है, तो तृणमूल के छात्रों और युवाओं को क्यों नहीं।
उन्होंने कहा, 'क्या तृणमूल अछूत है? क्या तृणमूल की आवाज़ को इस तरह दबाया जा सकता है?' यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब नीट परीक्षा प्रश्न पत्र लीक को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है।
आगे क्या
गिरफ्तार नेताओं की रिहाई और जुलूस पर प्रतिबंध को लेकर तृणमूल की कानूनी रणनीति क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटना पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी दल और राज्य पुलिस के बीच बढ़ते तनाव का संकेत है, जो आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।