2 अगस्त 2026
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कोलकाता में ममता बनर्जी की हॉकर-विरोधी पदयात्रा पड़ी फीकी, जनसभा भी रद्द

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कोलकाता में ममता बनर्जी की हॉकर-विरोधी पदयात्रा पड़ी फीकी, जनसभा भी रद्द

सारांश

चुनावी हार के बाद पहली बड़ी सड़क कार्रवाई में ममता बनर्जी की पदयात्रा भीड़ जुटाने में नाकाम रही और जनसभा रद्द करनी पड़ी — यह TMC की घटती जमीनी ताकत का साफ संकेत है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 17 जून 2026 को एस्प्लेनेड से सुभाष मल्लिक स्क्वायर तक हॉकर बेदखली के विरोध में पदयात्रा निकाली।
कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी; पदयात्रा के बाद प्रस्तावित जनसभा रद्द कर दी गई।
ममता बनर्जी बिना संबोधन दिए कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गईं।
कई वरिष्ठ TMC नेता, जो सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठावान हैं, पदयात्रा से अनुपस्थित रहे।
ममता का पिछला सार्वजनिक कार्यक्रम 2 जून को सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हमले के विरोध में हुआ धरना था।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, विधायी दल पर ममता और अभिषेक की पकड़ कमज़ोर हुई है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार, 17 जून 2026 को मध्य कोलकाता में फेरीवालों (हॉकरों) के खिलाफ चलाए गए बेदखली अभियान के विरोध में पदयात्रा निकाली, लेकिन यह कार्यक्रम अपेक्षित भीड़ जुटाने में पूरी तरह विफल रहा। एस्प्लेनेड से सुभाष मल्लिक स्क्वायर तक चली इस पदयात्रा के समापन पर प्रस्तावित जनसभा को अंतिम समय में रद्द कर दिया गया और ममता बनर्जी बिना कोई संबोधन दिए ही वहाँ से चली गईं।

मुख्य घटनाक्रम

पदयात्रा में TMC के केवल कुछ वरिष्ठ नेता ही शामिल हो सके — बड़ी संख्या में कार्यकर्ता या समर्थक नहीं पहुँचे। उल्लेखनीय है कि कई ऐसे वरिष्ठ तृणमूल नेता, जो सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के प्रति अपनी निष्ठा जताते हैं, वे भी इस विरोध मार्च से दूर रहे। हॉकर बेदखली के अलावा इस मार्च में राज्य के विभिन्न हिस्सों में TMC कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों और पार्टी नेताओं की कथित झूठे मामलों में हो रही गिरफ्तारियों के मुद्दे भी उठाए गए।

चुनावी हार के बाद सिमटी सक्रियता

हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार और ममता बनर्जी की व्यक्तिगत चुनावी पराजय के बाद उन्होंने अपने सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रमों को काफी सीमित कर लिया है। वह अधिकतर सोशल मीडिया पर वीडियो संदेशों के माध्यम से ही अपनी बात रखती रही हैं। बुधवार से पहले उनका अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम 2 जून को हुआ धरना-प्रदर्शन था, जो दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में आयोजित किया गया था।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस कार्यक्रम के कमज़ोर रहने की एक बड़ी वजह यह है कि विधानसभा और लोकसभा में पार्टी के विधायी एवं संसदीय दल पर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की पकड़ पहले जैसी मज़बूत नहीं रही है। आलोचकों का कहना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी की आंतरिक एकता और जमीनी गोलबंदी की क्षमता दोनों कमज़ोर पड़ी हैं।

आम जनता और हॉकरों पर असर

राज्यभर में चलाए गए हॉकर बेदखली अभियान ने हज़ारों फेरीवालों की आजीविका को प्रभावित किया है। TMC ने इस अभियान को सत्तारूढ़ सरकार की 'जन-विरोधी नीति' करार दिया है, हालाँकि विरोध में जनभागीदारी की कमी से पार्टी की जमीनी पकड़ पर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब TMC अपनी चुनावी हार के बाद पुनर्गठन की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र इस बात पर है कि ममता बनर्जी आने वाले हफ्तों में सार्वजनिक कार्यक्रमों की गति बढ़ाती हैं या नहीं, और क्या पार्टी विपक्षी भूमिका में प्रभावी तरीके से खुद को स्थापित कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब खुद वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति बताती है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व की वैधता पर अघोषित सवाल उठ रहे हैं। हॉकर बेदखली एक ठोस जन-मुद्दा है जो व्यापक समर्थन जुटा सकता था, लेकिन जनसभा रद्द करना दर्शाता है कि पार्टी को खुद अपनी गोलबंदी क्षमता पर भरोसा नहीं है। TMC के लिए असली परीक्षा यह है कि क्या वह संगठनात्मक पुनर्निर्माण के बिना विश्वसनीय विपक्ष बन सकती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने कोलकाता में पदयात्रा क्यों निकाली?
ममता बनर्जी ने राज्यभर में चलाए गए हॉकर (फेरीवाला) बेदखली अभियान के विरोध में यह पदयात्रा निकाली। इसके साथ ही TMC कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों और पार्टी नेताओं की कथित झूठे मामलों में हो रही गिरफ्तारियों के मुद्दे भी उठाए गए।
पदयात्रा के बाद जनसभा क्यों रद्द की गई?
आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी और ममता बनर्जी बिना संबोधन दिए ही रवाना हो गईं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी की जमीनी गोलबंदी क्षमता कमज़ोर पड़ी है।
TMC की पदयात्रा में भीड़ कम क्यों रही?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार और ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पराजय के बाद पार्टी के विधायी दल पर उनकी पकड़ कमज़ोर हुई है। कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति इसी का संकेत मानी जा रही है।
ममता बनर्जी का इससे पहले अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम कौन सा था?
इससे पहले ममता बनर्जी का अंतिम सार्वजनिक कार्यक्रम 2 जून को दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में हुआ धरना-प्रदर्शन था। यह TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में आयोजित किया गया था।
पश्चिम बंगाल में हॉकर बेदखली अभियान क्या है?
राज्य सरकार द्वारा हाल ही में पश्चिम बंगाल में फेरीवालों को सार्वजनिक स्थानों से हटाने का अभियान चलाया गया, जिससे हज़ारों हॉकरों की आजीविका प्रभावित हुई है। TMC ने इसे जन-विरोधी नीति बताते हुए विरोध का आधार बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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