UPI चार्ज विवाद: कांग्रेस ने बताया 'डिजिटल यूटर्न', AAP ने गुजरात में सड़क पर उतरने की दी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार के उस निर्णय पर तीखी आपत्ति जताई है, जिसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा यूपीआई पर्सन टू मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। कांग्रेस ने इसे 'डिजिटल यूटर्न' करार दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने चेतावनी दी है कि वह आवश्यकता पड़ने पर सड़कों पर उतरेगी।
नई व्यवस्था में क्या बदलेगा
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा घोषित नए ढाँचे के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन के लिए ₹300 तय की गई है। ₹2,000 तक के सभी मर्चेंट भुगतान पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।
पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांज़ैक्शन राशि की परवाह किए बिना पूर्णतः मुफ्त रहेंगे। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर मात्र ₹5 का फ्लैट MDR तय किया गया है। पूँजी बाज़ार के लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है।
विशेष रूप से, QR कोड के ज़रिये प्रतिमाह ₹1 लाख तक भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी ज़ीरो MDR ढाँचे में ही बने रहेंगे। सरकार का अनुमान है कि लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन पर इस बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस और AAP की तीखी प्रतिक्रिया
गुजरात कांग्रेस के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने बुधवार को संयुक्त बयान जारी कर इस कदम को 'डिजिटल यूटर्न' बताया और आरोप लगाया कि यूपीआई उपयोगकर्ताओं के साथ विश्वासघात किया जा रहा है।
कांग्रेस ने गणना करते हुए दावा किया कि यदि वर्ष 2026 27 के अनुमानित यूपीआई लेनदेन मूल्य का पाँच प्रतिशत हिस्सा नए ढाँचे के दायरे में आता है, तो P2M लेनदेन पर सालाना ₹5,040 करोड़ का संभावित बोझ पड़ सकता है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह नया ढाँचा PhonePe और Google Pay जैसी विदेशी समर्थित भुगतान कंपनियों को लाभ पहुँचा सकता है, जिनकी मूल्य के हिसाब से यूपीआई बाज़ार में संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत बताई जाती है।
AAP के गुजरात संगठनात्मक महासचिव मनोज सोरठिया ने इसे 'शाही फरमान' कहा। उन्होंने कहा, "हमारे देश के रिटेल व्यापारियों का प्रॉफिट मार्जिन मुश्किल से 5 से 7 प्रतिशत है।" उनका तर्क था कि 0.4 प्रतिशत MDR व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और अंततः इसकी भरपाई ग्राहकों से की जा सकती है।
सोरठिया ने यह भी चेताया कि नए चार्ज से कुछ उपयोगकर्ता वापस नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं, जो डिजिटल भुगतान के प्रसार की दिशा में उठाए गए वर्षों के प्रयासों को कमज़ोर कर सकता है।
सरकार का पक्ष
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो सरकार द्वारा वसूला जाने वाला कर है और न ही ग्राहकों पर लगाया जाने वाला शुल्क — यह एक मर्चेंट साइड चार्ज है, जो बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच वितरित होता है।
बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि व्यापारी इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। यूपीआई ऐप्स को इन भुगतानों पर प्लेटफॉर्म या छुपे हुए शुल्क लगाने से प्रतिबंधित किया गया है। केंद्र ने कहा है कि यह नया ढाँचा तेज़ी से बढ़ते यूपीआई पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक टिकाऊ राजस्व मॉडल प्रदान करने के साथ साथ छोटे व्यापारियों और व्यक्तियों की सुरक्षा के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
आम जनता और व्यापारियों पर असर
गौरतलब है कि यूपीआई, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित संस्था NPCI द्वारा विकसित, भारत के रिटेल डिजिटल भुगतान की रीढ़ बन चुका है। नई व्यवस्था का असर मुख्यतः उन बड़े व्यापारियों पर पड़ेगा जो ₹2,000 से अधिक के लेनदेन नियमित रूप से संसाधित करते हैं।
हालाँकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि मौजूदा ढाँचे में सभी यूपीआई लेनदेन या P2P ट्रांसफर पर 0.4 प्रतिशत चार्ज नहीं लगाया गया है — 15 अक्टूबर से होने वाला बदलाव केवल विशिष्ट मर्चेंट साइड लेनदेन तक सीमित है।
आगे क्या होगा
विपक्ष के विरोध और व्यापारी संगठनों की चिंताओं के बीच 15 अक्टूबर 2026 की समय सीमा फिलहाल बरकरार है। AAP के सड़क पर उतरने की चेतावनी और कांग्रेस की संसदीय और सार्वजनिक मंचों पर आवाज़ उठाने की घोषणा को देखते हुए, यह मुद्दा आने वाले हफ्तों में और तेज़ हो सकता है। डिजिटल भुगतान क्षेत्र के विशेषज्ञों की नज़र इस पर है कि क्या सरकार लागू होने से पहले ढाँचे में कोई संशोधन करती है।