22 जुलाई 2026
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तृणमूल विधायक कुणाल घोष का विद्रोही तेवर: संगठनात्मक फैसलों पर खुलकर जताई नाराजगी

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तृणमूल विधायक कुणाल घोष का विद्रोही तेवर: संगठनात्मक फैसलों पर खुलकर जताई नाराजगी

सारांश

TMC प्रवक्ता और विधायक कुणाल घोष ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के फैसलों के अगले ही दिन सोशल मीडिया पर खुलकर नाराजगी जताई — ममता के प्रति निष्ठा दोहराते हुए भी संगठनात्मक गलतियों पर आँखें बंद करने से इनकार किया। विधानसभा हार के बाद TMC के भीतर यह असंतोष नई परत उजागर करता है।

मुख्य बातें

कुणाल घोष ने 7 जून 2025 को सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए TMC के संगठनात्मक फैसलों पर खुलकर असहमति जताई।
6 जून की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में अभिषेक बनर्जी को महासचिव बनाए रखा गया; डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को नए उप महासचिव पद दिए गए।
घोष ने कहा — पार्टी की गलतियाँ दोहराई जाती रहें तो वह 'आँखें बंद नहीं कर सकते।' उन्होंने ममता बनर्जी के साथ व्यक्तिगत निष्ठा बनाए रखते हुए संगठनात्मक नीतियों से असहमति स्पष्ट की।
पश्चिम बंगाल के कई ज़िलों के कार्यकर्ता, छात्र और युवा घोष से संपर्क कर रहे हैं; वह जल्द मुलाकात करेंगे।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने 7 जून 2025 को सोशल मीडिया पर पोस्ट के ज़रिए पार्टी के हालिया संगठनात्मक फैसलों पर सीधे सवाल उठाए और अपनी नाराजगी सार्वजनिक की। यह बयान ऐसे समय आया है जब कोलकाता में तृणमूल के भीतर असंतोष की आवाज़ें लगातार तेज़ हो रही हैं।

मुख्य घटनाक्रम

6 जून 2025 को हुई TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में कई अहम संगठनात्मक फैसले लिए गए। बैठक में अभिषेक बनर्जी को पार्टी का महासचिव बनाए रखने का निर्णय लिया गया। साथ ही दो नए उप महासचिव पद सृजित कर राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।

इन फैसलों के अगले ही दिन घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह ममता बनर्जी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर विधायक बने हैं और राज्य चुनाव के महज एक महीने के भीतर कुछ नेताओं व विधायकों द्वारा निजी स्वार्थों के लिए पार्टी एवं ममता बनर्जी के साथ किए गए विश्वासघात का वह समर्थन नहीं करते।

घोष के बयान का सार

घोष ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'लेकिन अगर पार्टी की गलतियों को सुधारने के बजाय विभिन्न स्तरों पर वही गलतियाँ दोहराई जाती रहें, तो मैं उस पर आँखें बंद नहीं कर सकता।' उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग ज़िलों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, छात्र और युवा उनसे लगातार संपर्क कर अपनी बात रख रहे हैं।

उन्होंने जोड़ा, 'मैं विश्वासघात और विश्वासघात करने वालों के साथ नहीं हूँ, लेकिन मैं अपने कान, आँख, दिमाग, दिल और मुँह सब खुले रखकर पार्टी के अंदर और बाहर की परिस्थितियों पर नज़र बनाए हुए हूँ।'

हार के बाद का असंतोष

गौरतलब है कि हाल के विधानसभा चुनावों में TMC की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर विद्रोह के स्वर उभरे थे। कई बागी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कॉरपोरेट शैली की कार्यप्रणाली और आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर अत्यधिक निर्भरता को हार की बड़ी वजह बताया था। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी नेतृत्व संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।

ममता के साथ, लेकिन नीतियों से असहमत

घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं, किंतु पार्टी द्वारा लगातार दोहराई जा रही गलतियों का समर्थन करने में वह असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि वह असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और युवाओं से मुलाकात करेंगे और आगे की रणनीति बाद में तय की जाएगी।

राजनीतिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, घोष जैसे वरिष्ठ प्रवक्ता का इस तरह सार्वजनिक असहमति जताना TMC के भीतर गहरी亀 亀 दरार का संकेत है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के फैसलों पर खुलकर सवाल उठाना संगठनात्मक अनुशासन के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और घोष की अगली चाल पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुणाल घोष ने TMC के किन फैसलों पर नाराजगी जताई?
कुणाल घोष ने 6 जून 2025 को हुई TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में लिए गए संगठनात्मक फैसलों पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए। उन्होंने पार्टी की गलतियाँ दोहराए जाने पर आपत्ति जताई, हालाँकि उन्होंने किसी फैसले का सीधे नाम नहीं लिया।
TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक में क्या फैसले हुए?
6 जून 2025 की बैठक में अभिषेक बनर्जी को पार्टी का महासचिव बनाए रखा गया और दो नए उप महासचिव पद सृजित किए गए। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को ये नए पद सौंपे गए।
क्या कुणाल घोष TMC छोड़ने वाले हैं?
नहीं, घोष ने स्पष्ट किया है कि वह ममता बनर्जी के साथ हैं और उनके चुनाव चिन्ह पर जीते हैं। उन्होंने कहा कि वह पार्टी की गलतियों का समर्थन नहीं करते, लेकिन आगे की रणनीति बाद में तय होगी।
TMC में यह असंतोष क्यों उभरा है?
हाल के विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर बगावत के स्वर तेज़ हुए थे। कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कार्यप्रणाली और आई-पैक पर अत्यधिक निर्भरता को हार की वजह बताया था।
कुणाल घोष आगे क्या करेंगे?
घोष ने कहा है कि वह पश्चिम बंगाल के विभिन्न ज़िलों से संपर्क कर रहे असंतुष्ट कार्यकर्ताओं, छात्रों और युवाओं से मुलाकात करेंगे। आगे की रणनीति उन बैठकों के बाद तय की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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