तृणमूल विधायक कुणाल घोष का विद्रोही तेवर: संगठनात्मक फैसलों पर खुलकर जताई नाराजगी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने 7 जून 2025 को सोशल मीडिया पर पोस्ट के ज़रिए पार्टी के हालिया संगठनात्मक फैसलों पर सीधे सवाल उठाए और अपनी नाराजगी सार्वजनिक की। यह बयान ऐसे समय आया है जब कोलकाता में तृणमूल के भीतर असंतोष की आवाज़ें लगातार तेज़ हो रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
6 जून 2025 को हुई TMC की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में कई अहम संगठनात्मक फैसले लिए गए। बैठक में अभिषेक बनर्जी को पार्टी का महासचिव बनाए रखने का निर्णय लिया गया। साथ ही दो नए उप महासचिव पद सृजित कर राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
इन फैसलों के अगले ही दिन घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वह ममता बनर्जी के चुनाव चिन्ह पर जीतकर विधायक बने हैं और राज्य चुनाव के महज एक महीने के भीतर कुछ नेताओं व विधायकों द्वारा निजी स्वार्थों के लिए पार्टी एवं ममता बनर्जी के साथ किए गए विश्वासघात का वह समर्थन नहीं करते।
घोष के बयान का सार
घोष ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट शब्दों में कहा, 'लेकिन अगर पार्टी की गलतियों को सुधारने के बजाय विभिन्न स्तरों पर वही गलतियाँ दोहराई जाती रहें, तो मैं उस पर आँखें बंद नहीं कर सकता।' उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम बंगाल के अलग-अलग ज़िलों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, छात्र और युवा उनसे लगातार संपर्क कर अपनी बात रख रहे हैं।
उन्होंने जोड़ा, 'मैं विश्वासघात और विश्वासघात करने वालों के साथ नहीं हूँ, लेकिन मैं अपने कान, आँख, दिमाग, दिल और मुँह सब खुले रखकर पार्टी के अंदर और बाहर की परिस्थितियों पर नज़र बनाए हुए हूँ।'
हार के बाद का असंतोष
गौरतलब है कि हाल के विधानसभा चुनावों में TMC की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर विद्रोह के स्वर उभरे थे। कई बागी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी की कॉरपोरेट शैली की कार्यप्रणाली और आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) पर अत्यधिक निर्भरता को हार की बड़ी वजह बताया था। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी नेतृत्व संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटा है।
ममता के साथ, लेकिन नीतियों से असहमत
घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़े हैं, किंतु पार्टी द्वारा लगातार दोहराई जा रही गलतियों का समर्थन करने में वह असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि वह असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और युवाओं से मुलाकात करेंगे और आगे की रणनीति बाद में तय की जाएगी।
राजनीतिक निहितार्थ
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, घोष जैसे वरिष्ठ प्रवक्ता का इस तरह सार्वजनिक असहमति जताना TMC के भीतर गहरी亀 亀 दरार का संकेत है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति के फैसलों पर खुलकर सवाल उठाना संगठनात्मक अनुशासन के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया और घोष की अगली चाल पर सबकी नज़रें टिकी हैं।