29 जून 2026
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TMC की हार जरूरी थी, गद्दारों का मुखौटा उतरा: कुणाल घोष का पश्चिम बंगाल चुनाव पर बड़ा बयान

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TMC की हार जरूरी थी, गद्दारों का मुखौटा उतरा: कुणाल घोष का पश्चिम बंगाल चुनाव पर बड़ा बयान

सारांश

TMC विधायक कुणाल घोष का कहना है कि पश्चिम बंगाल में पार्टी की हार एक ज़रूरी सफाई थी — जीत होती तो गद्दार, भ्रष्ट और अवसरवादी तत्व ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द डटे रहते। उनका यह बयान रितब्रत बनर्जी के 'बागी बहुमत' गुट पर सीधा हमला है।

मुख्य बातें

TMC प्रदेश प्रवक्ता कुणाल घोष ने 29 जून को एक्स पोस्ट के ज़रिए कहा कि 4 मई को हुई पार्टी की हार आवश्यक थी।
घोष ने निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी बहुमत' गुट को सीधे निशाना बनाया।
उनके अनुसार, जीत होती तो अवसरवादी, भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग ममता बनर्जी के करीब बने रहते।
घोष खुद बेलियाघाटा सीट से जीते, लेकिन उन्होंने पार्टी की समग्र हार को 'सफाई का अवसर' बताया।
ममता बनर्जी के नेतृत्व में समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी पुनर्निर्माण का भरोसा जताया।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बेलियाघाटा से विधायक और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल घोष ने 29 जून को कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार दरअसल एक आवश्यक सफाई थी — इसी हार ने पार्टी के भीतर छिपे अवसरवादियों और गद्दारों का असली चेहरा उजागर किया। घोष ने यह बयान अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट के ज़रिए दिया।

मुख्य घटनाक्रम

घोष ने लिखा, 4 मई को हुई पार्टी की हार ने उन्हें गहरा दुख दिया और बेलियाघाटा सीट से उनकी व्यक्तिगत जीत की खुशी भी उसके सामने फीकी पड़ गई। लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि अब उन्हें लगता है कि यह हार अंततः पार्टी के हित में रही। उनके अनुसार, यदि तृणमूल कांग्रेस जीत जाती, तो ये अवसरवादी तत्व ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द समर्थकों के भेष में डटे रहते।

किन पर साधा निशाना

घोष ने स्पष्ट रूप से TMC विधायक दल से निष्कासित रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी बहुमत' गुट को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी सत्ता में वापस आती, तो कई लोग दोस्ती का दिखावा करते हुए पार्टी में बने रहते, जो वास्तव में भ्रष्टाचार और चोरी के अवसर तलाश रहे थे।

उन्होंने आगे कहा, 'पार्टी में घुस आए कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग अपने विरोधियों पर और ज़्यादा अत्याचार करते तथा पार्टी के भीतर भी किसी को नहीं बख्शते।' उनके अनुसार, पुलिस, नौकरशाहों, उद्योगपतियों और बुद्धिजीवियों का एक स्वार्थी वर्ग भी राजनीतिक मंच का दुरुपयोग करता रहता।

समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी का डर

घोष ने यह भी कहा कि अगर पार्टी जीत जाती, तो पार्टी के सच्चे और समर्पित कार्यकर्ता, आयोजक और शुभचिंतक इन्हीं नकाबपोश गुटों की ज्यादतियों के कारण हाशिये पर चले जाते और पार्टी के भीतर घुटन महसूस करते। उनके अनुसार, हार ने उन्हें सुरक्षित रखा और पार्टी की आंतरिक गंदगी को सामने लाया।

आगे की राह: ममता के नेतृत्व में पुनर्निर्माण

घोष ने अपनी पोस्ट का समापन एक आशावादी स्वर में किया। उन्होंने कहा, 'इन नतीजों ने भले ही हमारी पार्टी को सत्ता से बेदखल कर दिया हो, लेकिन इन नतीजों से जमा गंदगी साफ करने में मदद मिली है।' उनके अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व में सच्चे और समर्पित कार्यकर्ता पार्टी का संघर्ष जारी रखेंगे और समय की कसौटी पार्टी को भविष्य के लिए मज़बूत बनाएगी।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और गुटबाज़ी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट और मुख्यधारा की पार्टी के बीच टकराव पार्टी पुनर्गठन की चुनौती को और जटिल बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह रितब्रत बनर्जी गुट के खिलाफ एक सुनियोजित राजनीतिक हमला भी है। गौरतलब है कि हार को 'आवश्यक' बताने की यह रणनीति पार्टी नेतृत्व को आंतरिक विद्रोह से बचाने और जवाबदेही को बाहरी तत्वों पर डालने का प्रयास भी हो सकती है। असली सवाल यह है कि क्या TMC इस 'सफाई' को संगठनात्मक सुधार में बदल पाएगी, या यह बयानबाज़ी केवल गुटीय राजनीति का एक और अध्याय बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुणाल घोष ने TMC की हार को जरूरी क्यों बताया?
कुणाल घोष के अनुसार, यदि TMC जीत जाती तो पार्टी के भीतर छिपे अवसरवादी, भ्रष्ट और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द बने रहते। हार ने इन तत्वों का असली चेहरा सामने ला दिया और समर्पित कार्यकर्ताओं को राहत दी।
कुणाल घोष ने किस गुट पर निशाना साधा?
घोष ने TMC विधायक दल से निष्कासित रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी बहुमत' गुट को स्पष्ट रूप से निशाना बनाया। उनका कहना है कि इस गुट के लोग जीत की स्थिति में पार्टी में दोस्ती का दिखावा करते हुए अपने स्वार्थ साधते रहते।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC को हार कब मिली?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए, जिनमें TMC को करारी हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, कुणाल घोष खुद बेलियाघाटा सीट से जीतने में सफल रहे।
क्या ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC का पुनर्निर्माण संभव है?
कुणाल घोष ने भरोसा जताया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में सच्चे और समर्पित कार्यकर्ता पार्टी का संघर्ष जारी रखेंगे। उनके अनुसार, समय की कसौटी पार्टी को भविष्य के लिए और मज़बूत बनाएगी।
कुणाल घोष ने यह बयान कहाँ दिया?
कुणाल घोष ने यह बयान 29 जून को अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट के ज़रिए दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि पार्टी की हार किस प्रकार आंतरिक सफाई का अवसर बनी।
राष्ट्र प्रेस
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