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ममता के नाम पर टिकट लेकर भाजपा जाना जनता से धोखा: टीएमसी विधायक कुणाल घोष

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ममता के नाम पर टिकट लेकर भाजपा जाना जनता से धोखा: टीएमसी विधायक कुणाल घोष

सारांश

ममता बनर्जी के नाम पर वोट माँगकर जीते नेता अब NDA की राह पर — TMC विधायक कुणाल घोष ने इसे जनता से धोखा करार दिया। पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलाव की सूचना भी विधायकों को मीडिया से मिली, जो आंतरिक संवाद पर सवाल उठाती है।

मुख्य बातें

TMC विधायक कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी के नाम पर टिकट लेकर BJP-NDA में जाना मतदाताओं के साथ धोखा है।
घोष ने दलबदल की संभावना जता रहे नेताओं पर 'सस्ती राजनीति' करने का आरोप लगाया।
TMC विधायक अशोक देब को चंद्रिमा भट्टाचार्य के राज्य अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी समाचार माध्यमों से मिली, पार्टी ने पहले कोई सूचना नहीं दी।
वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राजनीतिक रुख पर घोष ने विस्तृत टिप्पणी से परहेज़ किया।
घोष ने दावा किया कि संभावित दलबदल से TMC कमज़ोर नहीं होगी ।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक कुणाल घोष ने 8 जून 2026 को कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पार्टी के जो नेता अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में जाने की सोच रहे हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम पर जनता से वोट माँगे थे — और अब उनका यह रुख मतदाताओं के विश्वास के साथ सीधा धोखा है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस संभावित दलबदल को लेकर हलचल तेज है।

कुणाल घोष का सीधा आरोप

घोष ने स्पष्ट कहा कि जिन नेताओं के NDA के साथ जाने की चर्चा है, वे वही लोग हैं जिन्होंने 'दीदी, दीदी' के नारे लगाकर और ममता बनर्जी के नाम का इस्तेमाल कर चुनावी टिकट हासिल किया था। उनके अनुसार, ऐसी राजनीति को जनता अच्छी नज़र से नहीं देखती और इससे संबंधित नेताओं की साख पर गंभीर असर पड़ता है।

घोष ने इन नेताओं पर 'सस्ती राजनीति' करने का आरोप लगाया। हालाँकि, उन्होंने BJP पर सीधे दोषारोपण करने से परहेज़ किया और कहा कि पार्टी छोड़ने की यह प्रवृत्ति कुछ नेताओं की रणनीतिक सोच का हिस्सा हो सकती है, लेकिन इससे TMC कमज़ोर नहीं होगी।

राष्ट्रीय बनाम राज्य स्तर का मामला

घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि यह विषय केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका राष्ट्रीय राजनीति से सीधा संबंध है। उन्होंने कहा कि वे राज्य स्तर के प्रवक्ता हैं और राष्ट्रीय निर्णयों पर टिप्पणी का अधिकार लोकसभा में पार्टी का नेतृत्व संभालने वाले वरिष्ठ प्रतिनिधियों को है। पार्टी के भीतर यह विषय उच्च स्तर पर विचाराधीन बताया गया है।

संगठनात्मक बदलाव पर सवाल

इस बीच TMC विधायक अशोक देब ने पार्टी में हुए एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक फेरबदल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चंद्रिमा भट्टाचार्य को राज्य अध्यक्ष बनाए जाने की जानकारी उन्हें समाचार माध्यमों से मिली — इस निर्णय के बारे में पहले से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी। इस बयान ने पार्टी के भीतर संवाद और संगठनात्मक प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

सुखेंदु शेखर रॉय पर टिप्पणी

घोष ने वरिष्ठ नेता सुखेंदु शेखर रॉय के राजनीतिक रुख पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कुछ नेता समय-समय पर पार्टी छोड़ते और वापस आते रहे हैं। इसे उन्होंने व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय बताते हुए इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया।

आगे क्या

पश्चिम बंगाल में TMC और BJP के बीच राजनीतिक खींचतान के बीच यह दलबदल की अटकलें आने वाले हफ्तों में पार्टी की एकजुटता की असली परीक्षा लेंगी। वरिष्ठ नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतनी ही पार्टी के भीतर नेतृत्व और संवाद की कमज़ोरी की भी। चंद्रिमा भट्टाचार्य की नियुक्ति की सूचना विधायकों को मीडिया से मिलना यह संकेत देता है कि शीर्ष नेतृत्व और ज़मीनी विधायकों के बीच की खाई गहरी हो रही है। घोष BJP पर सीधा आरोप लगाने से बचे — यह सतर्कता बताती है कि पार्टी अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है कि यह भाजपा की सक्रिय 'ऑपरेशन लोटस' रणनीति है या नेताओं का स्वतःस्फूर्त मोहभंग। 2021 के बाद से बंगाल में दलबदल की यह पुनरावृत्ति TMC के लिए चुनावी नहीं, संगठनात्मक संकट है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुणाल घोष ने TMC नेताओं के BJP में जाने पर क्या कहा?
TMC विधायक कुणाल घोष ने कहा कि जो नेता ममता बनर्जी के नाम पर टिकट लेकर जीते और अब BJP-NDA में जाने की सोच रहे हैं, वे जनता के विश्वास के साथ धोखा कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'सस्ती राजनीति' बताया।
चंद्रिमा भट्टाचार्य को TMC का राज्य अध्यक्ष कब बनाया गया?
चंद्रिमा भट्टाचार्य को TMC का राज्य अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन पार्टी के विधायक अशोक देब के अनुसार उन्हें इस निर्णय की जानकारी समाचार माध्यमों से मिली — पार्टी की ओर से पहले कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी।
क्या TMC वास्तव में कमज़ोर होगी अगर नेता BJP में गए?
कुणाल घोष ने दावा किया कि संभावित दलबदल से TMC कमज़ोर नहीं होगी। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति कुछ नेताओं की व्यक्तिगत रणनीतिक सोच है, पार्टी के व्यापक जनाधार पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
सुखेंदु शेखर रॉय के बारे में कुणाल घोष ने क्या कहा?
घोष ने कहा कि कुछ नेता समय-समय पर पार्टी छोड़ते और वापस आते रहे हैं। उन्होंने सुखेंदु शेखर रॉय के रुख को व्यक्तिगत राजनीतिक निर्णय बताते हुए इस पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया।
पश्चिम बंगाल में TMC-BJP राजनीतिक हलचल का अगला कदम क्या होगा?
वरिष्ठ TMC नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई आने वाले हफ्तों में स्पष्ट होगी। घोष ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के निर्णयों पर लोकसभा में पार्टी का नेतृत्व संभालने वाले प्रतिनिधि ही आधिकारिक टिप्पणी करेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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