दिलीप घोष का टीएमसी पर तीखा हमला: 'ममता बनर्जी और भतीजे ही पार्टी में बचेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता दिलीप घोष ने 2 जून को न्यूटाउन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला और कहा कि पार्टी में इस कदर टूट आ गई है कि जल्द ही केवल ममता बनर्जी और उनके भतीजे ही उसमें बचेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब TMC के कई विधायकों और नेताओं के पार्टी छोड़ने की खबरें सामने आ रही हैं।
विधायकों की बैठक और अनुशासनहीनता
घोष ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने हाल ही में अपने विधायकों की बैठक बुलाई, लेकिन बड़ी संख्या में विधायक उसमें शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा, 'उनके विधायक विधानसभा तक में नहीं गए।' उनके अनुसार, ममता को अपने ही विधायकों को पार्टी से निकालने पर मजबूर होना पड़ रहा है — जो नेतृत्व के कमज़ोर होते आधार का संकेत है। घोष ने यह भी कहा कि TMC विधायक केवल सत्ता में रहने के लिए पार्टी में हैं; जैसे ही सत्ता जाएगी, वे भी चले जाएंगे।
पार्टी कार्यालयों से सामान बरामदगी
घोष ने TMC के पार्टी कार्यालयों से सामान निकाले जाने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, 40 बैरल तेल और पाँच साल पहले जनता की राहत के लिए भेजा गया सामान TMC के पार्टी कार्यालयों, विधायकों और काउंसलरों के दफ्तरों से मिला है। उन्होंने कहा, 'टीएमसी लुटेरों का दल था। आज जनता दरवाजा तोड़कर सामान निकाल रही है।' गौरतलब है कि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
TMC की विश्वसनीयता पर सवाल
घोष ने कहा कि TMC नेता चाहे अलग पार्टी बनाएं या एक साथ रहें, उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं बची है। उन्होंने कहा, 'राजनीति केवल धंधा नहीं है। बंगाल में राजनीति कमाने का धंधा बन गई थी।' उनके अनुसार, बंगाल की जनता ने अब इस स्थिति से पार्टी को बाहर निकाला है।
TMC के 15 साल के शासन पर टिप्पणी
घोष ने TMC के 15 वर्षों के शासन को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया और कहा कि बंगाल की जनता ने इन वर्षों में बहुत कुछ झेला। उन्होंने TMC नेताओं को सलाह दी कि वे नई सरकार के साथ सहयोग करें, क्योंकि यही सबके हित में होगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।
आगे क्या
TMC की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।